ब्रिटेन की लोरी डेनमैन 19 साल पहले भारत घूमने आई थीं. इस यात्रा पर फूड पॉइजनिंग या फिर किसी तरह के इंफेक्शन से बचने के लिए उन्होंने काफी सावधानी बरती. पूरे सफर के दौरान नॉन-वेज से परहेज रखा. लेकिन गलती से उन्होंने कुछ ऐसा खा लिया, जिसके चलते वे एक दुर्लभ बीमारी का शिकार हो गईं. ऐसा लोरी का कहना है.
'भारत यात्रा के बाद मेरे दिमाग में 38 पैरासाइट मिले', ब्रिटिश महिला को मेंटल हॉस्पिटल जाना पड़ा
ब्रिटेन की लोरी डेनमैन साल 2007 में भारत आई थीं. ये यात्रा उनके लिए बेहद खुशनुमा रही. लेकिन इस दौरान एक माइक्रोस्कोपिक जीव उनके बॉडी में प्रवेश कर गया, जिसके चलते चार साल बाद उनको एक बेहद गंभीर बीमारी का पता चला. इसके चलते लोरी सालों तक कष्ट और पीड़ा में रहीं.


बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लोरी डेनमैन साल 2007 में तीन महीने के लिए भारत आई थीं. हिंदुस्तान की यात्रा उनके लिए बेहद खुशनुमा रही. उन्होंने यहां खूब एन्जॉय किया. लौटने के तीन साल बाद एक दिन वॉशरूम में उनके मल में टेपवर्म का पता चला.
इसके बाद वह डॉक्टर के पास गईं. चेकअप कराया. उनका स्टूल टेस्ट नॉर्मल था. इसके चलते फिर से वो नॉर्मल लाइफ में लौट आईं. लेकिन साल भर के भीतर उनको भयानक सिरदर्द होने लगा. फिर साल 2011 में उनको पहली बार दौरा पड़ा. लोरी ने बताया,
मुझे बोलने में दिक्कत हो रही थी. अगले ही पल मुझे होश आया तो मैं एम्बुलेंस में थी और सोचने लगी कि यह कैसे और क्यों हुआ?
इसके बाद हॉस्पिटल में लोरी का कैट और एमआरआई स्कैन किया गया. रिजल्ट का इंतजार कर रही लोरी को डॉक्टर ने बताया,
हमने आपके स्कैन देखे हैं. आपके दिमाग में 38 पैरासाइट मिले हैं.
लोरी और उनकी मां ये सुनकर हैरान रह गईं. पहले तो उनको लगा कि यह टॉक्सोप्लाज्मोसिस नाम की बीमारी है. यह इंफेक्टेड बिल्लियों के मल के कॉन्टैक्ट में आने से होता है. लेकिन फिर लोरी की मां ने पूछा कि क्या इसका कोई संबंध साल भर पहले मिलने वाले उस टेपवर्म से है, जो लोरी के मल में मिला था. फिर आगे की जांच के बाद पता चला कि उनको न्यूरोसिस्टिसकोर्सिस है. और टेपवर्म मिलना उसका पहला लक्षण था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ये बीमारी कच्चे या अधपके सूअर के मांस (पोर्क) खाने, टेपवर्म के अंडों के संपर्क में आए पानी पीने से होता है. यही नहीं अगर खाना बनाने या परोसने वाला कोई व्यक्ति इस बीमारी से संक्रमित है और उसने टॉयलेट जाने के बाद अच्छे से साबुन से हाथ नहीं धोए, तो टेपवर्म के अंडे उसके हाथों के जरिए खाने की चीजों या पानी में चले जाते हैं. लोरी के मुताबिक उन्होंने भी भारत यात्रा के दौरान अनजाने में कोई ऐसी ही दूषित चीज खा या पी ली थी, जिससे ये अंडे उनके पेट से होते हुए खून के रास्ते उनके दिमाग तक पहुंच गए.
नरक बन गई जिंदगी
लोरी के लिए यह सफर किसी बुरे सपने जैसा था. डॉक्टरों ने पहले उनके दिमाग के कीड़े मारने के लिए दवा और स्टेरॉयड दिए. कुछ दिन तो सब ठीक रहा. लेकिन फिर अचानक एक दिन काम करते वक्त वो बेहोश होकर गिर पड़ीं. दवाओं के असर से जब कीड़े मरने लगे तो उनके दिमाग में भयंकर सूजन आ गई.
इस बीमारी ने उनको मानसिक तौर पर तोड़ दिया. उन्हें चीजें याद नहीं रहतीं. शरीर के कुछ हिस्से सुन्न होने लगे. वो डिप्रेशन का शिकार हो गईं. हालत इतनी खराब हुई कि उनको 6 हफ्ते के लिए मेंटल हॉस्पिटल (न्यूरोसाइकिएट्रिक वार्ड) में भर्ती करना पड़ा.
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अब कैसी हैं लोरी?
साल 2011 से 2018 तक लोरी इस बीमारी से जूझती रहीं. लेकिन इस दौरान उनका परिवार और दोस्त साथ खड़े रहे. इसी बीच उन्होंने एक आर्ट फाउंडेशन कोर्स भी किया. साल 2018 तक वो पूरी तरह से बेहतर महसूस करने लगीं. फिर उन्होंने इंटीरियर डिजाइन में डिग्री हासिल की और साल 2022 में वो फिर से काम पर लौट गईं.
सालों की तड़प, लंबे इलाज और अपनी मजबूत इच्छाशक्ति से लोरी ने इस बीमारी पर विजय पा ली. अब वे दुनिया को अपनी कहानी सुना रही हैं ताकि लोग जागरूक हो सकें. उनका कहना है कि उन्होंने तो अपनी तरफ से पूरी सावधानी बरती, लेकिन फिर भी बीमारी का शिकार हो गईं. इसलिए बाहर खाते समय लोगों को साफ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए और फलों-सब्जियों को अच्छे से धोकर इस्तेमाल करना जरूरी है.
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