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पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होंगे मोजतबा, वजह बड़ी है

ईरान के मोजतबा खामेनेई खुद लोगों के बीच आना चाहते थे. वह अंतिम संस्कार की नमाज की अगुवाई भी करना चाहते थे, क्योंकि परंपरा के अनुसार दिवंगत नेता की नमाज पढ़ाई जाती है. लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी.

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मोजतबा अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे (PHOTO-ITG)

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  • मोजतबा खामेनेई अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होंगे क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से उनकी उपस्थिति की अनुमति नहीं दी है।
  • इजरायल के साथ बढ़े तनाव के कारण सुरक्षा एजेंसियां मोजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से सामने आने से रोक रही हैं क्योंकि उनका सार्वजनिक प्रदर्शन खतरनाक माना जा रहा है।
  • अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान में शोक का माहौल है और कई देश उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए तेहरान पहुंच रहे हैं, जिससे राजकीय सम्मान के साथ समारोह आयोजित होगा।

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं होंगे. और इसकी वजह है उनकी अपनी सुरक्षा. ये बातें भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने कही हैं. इंडिया टुडे से बात करते हुए हकीम इलाही ने कहा कि इजरायल के साथ बढ़े तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां मोजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से सामने आने की अनुमति नहीं दे रही हैं.

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उन्होंने अगर बताया,

‘मैं पिछले हफ्ते ईरान में था. वहां मेरी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हुई, जो मोजतबा ख़ामेनेई से मिले थे. उन्होंने बताया कि वह लोगों के बीच आना चाहते हैं, उनसे मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसकी इजाजत नहीं दे रहीं. उनका कहना है कि यह बहुत खतरनाक होगा और उन्हें पूरी सुरक्षा देना संभव नहीं है. इसलिए मुझे लगता है कि वो सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आएंगे.’

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क्यों सुरक्षा देना संभव नहीं?

हकीम इलाही ने बताया कि मोजतबा खामेनेई खुद लोगों के बीच आना चाहते थे. वह अंतिम संस्कार की नमाज की अगुवाई भी करना चाहते थे, क्योंकि परंपरा के अनुसार दिवंगत नेता की नमाज पढ़ाई जाती है. लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी. उनका कहना है कि यह बहुत खतरनाक है और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देना संभव नहीं होगा. इसलिए मुझे लगता है कि वह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आएंगे.

यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है, जब दुनिया भर से हजारों शोकाकुल लोग और कई देशों के प्रतिनिधि तेहरान पहुंच रहे हैं. तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाना है. हकीम इलाही ने यह भी बताया कि अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद अब तक पूरे ईरान में शोक का माहौल है. उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ अपना नेता नहीं, बल्कि अपना मार्गदर्शक खो दिया है. उनके मुताबिक, अली खामेनेई की जगह कोई नहीं ले सकता.

हकीम इलाही ने कहा,

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‘ईरान और दूसरे देशों से बड़ी संख्या में लोग अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं. लोग अपनी एकजुटता दिखाने के लिए आ रहे हैं. वे यह संदेश देना चाहते हैं कि हम आपके साथ हैं, हम आपको कभी नहीं भूलेंगे और आपके रास्ते पर चलते रहेंगे.’

इजरायल को चेतावनी

इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ आगे भी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए अयातुल्ला हकीम इलाही ने दावा किया कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान पहले से अधिक मजबूत होकर उभरा है. उन्होंने कहा कि कई देशों ने ईरान की तारीफ की और कहा कि ईरान ने यह युद्ध जीता है. वो कहते हैं,

‘मेरी मुलाकात कई देशों के लोगों से हुई. उनमें से बहुत से लोग ईरान की तारीफ कर रहे थे. उनका कहना था कि इस युद्ध में ईरान की जीत हुई है. मैं भी यही कहना चाहता हूं कि ईरान आज भी पूरी तरह मजबूत है और अपनी आखिरी खून की बूंद तक अपनी रक्षा करने के लिए तैयार है.’

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जल्द शुरू होगी अंतिम यात्रा

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की राजकीय अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू होगी, जबकि 9 जुलाई को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. ये अंतिम यात्रा सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रहेगी. उनका पार्थिव शरीर ईरान और इराक के कई शहरों से होकर गुजरने वाला है. पीएम नरेंद्र मोदी समेत कई भारतीय नेताओं को भी अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में बुलाया गया है.

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