उत्तराखंड के पहाड़ों में फिर से आग लगने की जानकारी सामने आई है (Uttarakhand Forest Fire). खबर है कि 29 मई की रात को उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से लगी वरुणावत पहाड़ी पर अचानक आग भड़क गई. कई घंटों चली मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया जा सका.
उत्तराखंड के जंगलों में फिर लगी भीषण आग, घंटों के मशक्कत के बाद पाया जा सका काबू
आग की सूचना मिलते ही NDRF के 16 जवान, SDRF के 13, वन विभाग के 12 और आपदा प्रबंधन/QRT के 5 सदस्य मौके पर पहुंचे.

पहाड़ी पर आग देखते ही स्थानीय लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल फैल गया. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सूचना मिलते ही NDRF के 16 जवान, SDRF के 13, वन विभाग के 12 और आपदा प्रबंधन/QRT के 5 सदस्य मौके पर पहुंचे. कई घंटों की मेहनत के बाद धीरे-धीरे आग पर काबू पाया गया. जानकारी मिली है कि आबादी वाले इलाके के पास से आग पूरी तरह से बुझ चुकी है. वहां मौजूद घर भी आग की चपेट में आने से बच गए. जानमाल के नुकसान की भी कोई जानकारी नहीं है.

आग से उठे धुएं से आसपास के पूरे इलाके में धुंध की चादर छा गई है. साथ ही पूरे इलाके में तेजी से गर्मी बढ़ गई है.
27 मई को उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक का सालरा गांव में भी आग लगने की जानकारी सामने आई थी. हादसे में एक दर्जन से ज्यादा घर जलकर खाक हो गए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग एक घर में शॉर्ट सर्किट के चलते लगी और देखते ही देखते अगल-बगल के घरों में फैल गई. दुर्घटना में छह लोग घायल हुए थे.
जिला मजिस्ट्रेट मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और अग्निशमन दल की टीम ने ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया.
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इससे पहले कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ में सबसे अधिक आग लगने की घटनाएं सामने आई थीं. वहां फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं. इसके अलावा अल्मोड़ा, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर जैसे जिलों के जंगली क्षेत्र आग की चपेट में आए थे. गढ़वाल मंडल में नरेंद्र नगर, उत्तरकाशी, मसूरी, कोटद्वार, टिहरी गढ़वाल, गोपेश्वर, रूद्रप्रयाग के वन्य क्षेत्र भी आग की चपेट में चुके आ चुके हैं. ज्यादातर इलाकों में आग पर काबू पा लिया गया है. कुछ इलाकों में अभी भी आग धधक रही है.
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