अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के पैसे में हेराफेरी और चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने इनसे लगभग 80 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. ये कार्रवाई विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर की गई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 7 के पास से अलग-अलग रकम बरामद की है. कुल मिलाकर सात आरोपियों से 79 लाख 80 हजार रुपये बरामद हुए हैं.
रामलला के चढ़ावे की चोरी, 7 आरोपियों के पास मिले करीब 80 लाख रुपये
राम मंदिर के चढ़ावे के पैसे में हेराफेरी और चोरी के मामले में गिरफ्तार किए गए 8 लोगों में से 7 के पास से लगभग 80 लाख की नकदी बरामद हुई है. सरकारी वकील ने बताया कि ये पैसे कथित तौर पर मंदिर के चढ़ावे से चोरी किए हुए पैसों का हिस्सा है.


सरकारी वकील एके वर्मा ने बताया कि यह रकम कथित तौर पर मंदिर के चढ़ावे से चुराए गए पैसों का हिस्सा है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने सभी 8 आरोपियों को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. एके वर्मा ने मीडिया को बताया कि उनको तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. इन सबको 29 जून को आगे की कार्यवाही के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PAC) के तहत फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा. उन्होंने बताया,
अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास से 79 लाख 80 हजार रुपये मिले हैं. आठवें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पास से कोई नकदी या कीमती सामान नहीं मिला है.
बैंक कर्मचारी भी जांच के दायरे में
सरकारी वकील ने बताया कि चढ़ावे के पैसे में आरोपियों की मदद करने के शक में बैंक के 5 से 6 कर्मचारी जांच के दायरे में हैं. इन सबकी भूमिकाओं की जांच की जा रही है. गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट में काम कर रहे थे. ये सभी उस टीम का हिस्सा थे, जो 40 दानपात्रों के चढ़ावे को तीर्थयात्री सुविधा केंद्र पहुंचाने के बाद गिनती का काम करते थे. टिन्नू यादव मॉनिटरिंग की भूमिका में था. बाकी सभी नकदी गिनने के काम में लगे थे. शिकायत के मुताबिक, इन अभियुक्तों ने आपसी साजिश के तहत श्रद्धालुओं के चढ़ाए गए पैसे का गबन किया और ट्रस्ट के फंड का दुरुपयोग किया.
SOP फॉलो नहीं किया गया
SIT की शुरुआती जांच में पता चला कि चढ़ावे की गिनती और मैनेजमेंट के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया गया था. लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा था. सूत्रों के अनुसार, सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और SBI के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी. इसमें चढ़ावे की गिनती, हुंडियों (दान पात्र) की सुरक्षा, नकदी के मैनेजमेंट और रिकॉर्ड रखने को लेकर डिटेल्ड SOP तैयार की गई थी. इस पर SBI की ओर से गोविंद मिश्र और ट्रस्ट की ओर से अनिल मिश्रा ने सिग्नेचर किए थे. लेकिन SIT की जांच में पता चला कि चढ़ावे की गिनती के दौरान SOP को फॉलो नहीं किया जा रहा था.
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SIT रिपोर्ट में इसका भी जिक्र है कि आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना ऑफिशियल आदेश के हुंडियों के चाबियां थीं. जांच में ये भी पता चला है कि ट्रस्ट को काफी पहले से ही चढ़ावे में हेराफेरी की आशंका थी, जिसके बाद SOP बनाई गई थी, लेकिन फिर भी इसे फॉलो नहीं किया गया.
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