अमेरिका ने एक भारतीय कारोबारी, उनकी पत्नी और उनसे जुड़ी कई कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ये लोग ईरान को अपना तेल बेचने में मदद कर रहे थे. इसके लिए जहाजों की फर्जी पहचान और दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे. अमेरिका का कहना है कि इस नेटवर्क की मदद से ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचकर अपना तेल दूसरे देशों तक पहुंचा रहा था.
जहाजों के फर्जी पेपर बनाकर ईरान की मदद कर रहा था भारतीय कारोबारी? यूएस ने लगाया प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने में मदद करने के आरोप में भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनसे जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ये लोग जहाजों के फर्जी रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज तैयार कर ईरान के तेल को दूसरे देशों तक पहुंचाने में मदद कर रहे थे. इस कार्रवाई में दो अन्य भारतीय नागरिकों और भारत से जुड़ी नौ कंपनियों को भी शामिल किया गया है. प्रतिबंधों के तहत अमेरिका में मौजूद इनकी संपत्ति फ्रीज होगी और अमेरिकी कंपनियां इनके साथ कारोबार नहीं कर सकेंगी.

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार, 4 नवंबर को इन प्रतिबंधों का ऐलान किया. जिन लोगों पर कार्रवाई हुई है, उनमें चंडीगढ़ के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद शामिल हैं. इनके अलावा दो भारतीय नागरिक अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. आरोप है कि ये दोनों इस दंपती से जुड़ी कंपनियों में डायरेक्टर थे. इस कार्रवाई में भारत से जुड़ी नौ कंपनियां शामिल हैं.
जहाजों की फर्जी पहचान बनाने का आरोपअमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी कम से कम 2014 से जहाजों के रजिस्ट्रेशन में धोखाधड़ी कर रहे थे. आरोप है कि उन्होंने ऐसी वेबसाइट और संस्थाएं बनाईं, जो खुद को अलग-अलग देशों के समुद्री विभाग का प्रतिनिधि बताती थीं. जबकि उन देशों की सरकारों ने उन्हें ऐसी कोई इजाजत नहीं दी थी.
इन वेबसाइट के जरिए कथित तौर पर जहाजों का रजिस्ट्रेशन, नाविकों की ट्रेनिंग और जहाजों को सर्टिफिकेट देने जैसी सेवाएं दी जाती थीं. आरोप है कि इस नेटवर्क ने अरूबा, गुयाना, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते जैसे देशों के नाम पर जहाजों का रजिस्ट्रेशन करने का दावा किया.
दरअसल, किसी जहाज पर लगा झंडा बताता है कि वह किस देश के नियमों के तहत चल रहा है. सही रजिस्ट्रेशन होने पर उस देश की समुद्री एजेंसियां जहाज की निगरानी कर सकती हैं. लेकिन अमेरिका का आरोप है कि इस नेटवर्क ने फर्जी दस्तावेज बनाकर ईरान का तेल ले जाने वाले जहाजों को दूसरे देशों की पहचान दी. इससे जहाजों की असली पहचान और उनके मालिकों को छिपाने में मदद मिली. अमेरिका के मुताबिक, इनमें से कुछ जहाज ईरान की सेना और उसके सहयोगी संगठनों के लिए भी काम कर रहे थे.
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अमेरिका ने इन लोगों और कंपनियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत अमेरिका में मौजूद इनकी संपत्ति और बैंक खातों में रखे पैसे फ्रीज कर दिए जाएंगे. यानी ये लोग उस पैसे और संपत्ति का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा, अमेरिका की कोई भी कंपनी या वहां का कोई नागरिक इनके साथ कारोबार नहीं कर सकेगा. अगर ऐसा करना है तो पहले अमेरिकी सरकार से इजाजत लेनी होगी.
ये पाबंदियां उन कंपनियों पर भी लागू होंगी, जिनमें इन लोगों या इनकी कंपनियों की 50 फीसदी या उससे ज्यादा की हिस्सेदारी है. अमेरिका ने ये भी कहा है कि दूसरे देशों के लोग और कंपनियां भी मुश्किल में पड़ सकते हैं. अगर वे इन लोगों को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं या ऐसे किसी काम में उनका साथ देते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है.
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