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'नारेबाजी का मौसम है, आप भी प्रोटेस्ट कर सकते हैं', CJI सूर्यकांत ने ऐसा क्यों कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों में रोटेशन की मांग वाली याचिका खारिज कर दी. CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह गलत जगह अपनी मांग उठा रहे हैं और चाहें तो विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं.

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सीजेआई ने आरक्षित सीटों के रोटेशन की मांग वाली याचिका खारिज कर दी. (फोटो- India Today)

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  • सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने आरक्षित सीटों के रोटेशन की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस पर फैसला संसद और संवैधानिक संस्थाओं का काम है।
  • याचिकाकर्ता ने कहा कि कई विधानसभा सीटें दशकों से SC-ST के लिए आरक्षित हैं, जिससे एक ही परिवार के लोग बार-बार चुनाव जीत रहे हैं और दूसरे उम्मीदवारों को अवसर नहीं मिल रहा है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को संसद एवं सरकार के सामने उठाया जाना चाहिए और मतदाता अपने प्रतिनिधियों से कानून में बदलाव के लिए अपील कर सकते हैं।

‘आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं. ये समय विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी का अच्छा मौसम है. आप भी ये कर सकते हैं.’ आरक्षित सीटों के रोटेशन की याचिका पर CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को यही जवाब दिया. CJI का कहना था कि याचिकाकर्ता गलत दरवाजा खटखटा रहे हैं. वो जिस बदलाव की बात कर रहे हैं, वो सुप्रीम कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं है. बेंच ने आगे कहा कि इस पर फैसला लेना संसद और संवैधानिक संस्थाओं का काम है. सुप्रीम कोर्ट संसद का तीसरा सदन नहीं बन सकता.

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क्या है याचिका?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने एक याचिका आई थी, जिसमें चुनावों में SC-ST के लिए आरक्षित सीटों को बदलते रहने यानी रोटेशन की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि कई विधानसभा सीटें 1972 से ही SC-ST के लिए आरक्षित हैं. सीटें नहीं बदलने की वजह से एक ही परिवार के लोग बार-बार चुनाव लड़ रहे हैं और जीत रहे हैं. इससे दूसरे उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल पा रहा है.

याचिका में मांग की गई कि आरक्षित सीटों की समय-समय पर अदला-बदली होनी चाहिए. याचिकाकर्ता का कहना था कि दशकों तक एक ही सीट आरक्षित रहने से वोटरों के पास उम्मीदवार चुनने के विकल्प कम हो जाते हैं. इससे उनके वोट देने के अधिकार पर भी असर पड़ता है.

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क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि ये ऐसा मुद्दा है, जिसे कोर्ट में नहीं बल्कि संसद और सरकार के सामने उठाया जाना चाहिए. उन्होंने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि इसके लिए वो अपनी आवाज उठाएं और सांसदों पर दबाव बनाकर कानून बनाने के लिए कहें. 

वहीं, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि आरक्षित सीटों को बदलने का फैसला संसद और संवैधानिक संस्थाओं को करना है. इसमें भले ही मतदाताओं के पास उम्मीदवार चुनने के विकल्प कम हों, लेकिन उनका वोट देने का अधिकार तो बरकरार है. जस्टिस बागची ने कहा कि अगर कोई कानून साफ तौर पर मनमाना है तो कोर्ट उसे रद्द कर सकता है या उसमें बदलाव को समझा सकता है. लेकिन कोर्ट खुद संविधान में नया नियम जोड़कर आरक्षित सीटों को बदलने की व्यवस्था नहीं बना सकता. उन्होंने कहा, 

हम संसद का तीसरा सदन नहीं बन सकते.

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एक ही परिवार के लोगों के बार-बार चुने जाने के सवाल पर बेंच ने कहा कि वोटर इस मुद्दे को अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के सामने उठा सकते हैं और इसे चुनावी मुद्दा बना सकते हैं. CJI सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि जनता अपने नेताओं से कह सकती है कि अगर आरक्षित सीटों और परिसीमन के नियमों में बदलाव नहीं किया गया तो वो उन्हें वोट नहीं देंगे.ॉ

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने ये सब बातें कहते हुए याचिका खारिज कर दी.  

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