क्या अमेरिका और इजरायल फिर से ईरान पर एक बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं? अमेरिकी युद्धपोत ईरान की ओर बढ़ रहे हैं. इजरायली लड़ाकू विमानों ने हमले का अभ्यास कर लिया है. और, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान की एक बेहद सुरक्षित, न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ी फैसिलिटी को टारगेट बनाने का फैसला कर लिया है. ये सब कुछ तब हो रहा है जब अमेरिका में 3 नवंबर को चुनाव होने हैं और इजरायल में चुनाव हो चुके हैं.
डॉनल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ क्या बड़ा प्लान कर रहे? चुनाव ख़त्म होते ही लेंगे एक्शन!
अमेरिकी युद्धपोत ईरान की ओर बढ़ रहे हैं. इजरायली लड़ाकू विमानों ने हमले का अभ्यास कर लिया है. तो क्या चुनाव की आड़ में डॉनल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के खिलाफ हमले की प्लानिंग कर रहे? इन पांच बिंदुओं से पता चल जाएगा.

खबर है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू डॉनल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ एक और बड़ा हमला करने का दबाव डाल रहे हैं. उधर ट्रंप ने भी ईरान पर हमला करने का रास्ता खोल रखा है. तो क्या है अमेरिका-इजरायल का संभावित प्लान? हाल ही में हुए पांच ऐसे डेवलपमेंट के बारे में जानेंगे जो इस ओर इशारा करते हैं कि ईरान के ऊपर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
9000 अमेरिकी सैनिकों की तैनातीपहला, US नेवल इंस्टीट्यूट (USNI) के अनुसार, थियोडोर रूजवेल्ट नाम का एयरक्राफ्ट कैरियर 27 सितंबर को अमेरिका के सैन डिएगो से रवाना हुआ. 28 अक्टूबर की एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया कि इस तैनाती में लगभग 9,000 सैन्यकर्मी शामिल हैं.
एक अमेरिकी अधिकारी ने समाचार एजेंसी को बताया कि अतिरिक्त बलों के आने से इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़कर 20,000 से अधिक नाविकों और मरीन तक पहुंच सकती है. इन्हें सैकड़ों विमानों का समर्थन भी हासिल होगा.
दूसरा, 19 अक्टूबर को, इजरायल के दर्जनों लड़ाकू विमान और ईंधन भरने वाले विमान सीरिया और इराक के ऊपर से होते हुए ईरान की सीमा की ओर गए. मगर वे ईरानी हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही वापस लौट आए. एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने इस अभ्यास के बारे में अमेरिका को पहले से बता रखा था. और इसे ‘पावर प्रोजेक्शन’ कहा गया.
‘मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब’ का इस्तेमालतीसरा, ट्रंप ने ईरान के एक खास ठिकाने का भी जिक्र किया है, जिस पर हमला हो सकता है. 31 अक्टूबर को फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा,
‘हमने उनके (ईरान) परमाणु सिस्टम को नष्ट कर दिया है. अभी भी एक या दो ऐसी जगहें हैं जिन्हें देखना बाकी है.’
ट्रंप ने 'पिकएक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) का नाम लिया, जो ईरान के नतान्ज परमाणु साइट के पास जमीन के अंदर बनी एक जगह है. इससे पहले, 15 अक्टूबर को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ GBU-43/B (मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स) का इस्तेमाल करने की संभावना जताई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, ये हमला 7 नवंबर को हो सकता है.
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मिडिल ईस्ट देशों को दी वॉर्निंगचौथा, एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अक्टूबर को हुई टेलीफोन बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे चुनावों के तुरंत बाद हमला कर दें. बताया गया कि ट्रंप बातचीत को थोड़ा और समय देना चाहते हैं. हालांकि, उन्होंने भी हमला करने का एक रास्ता खुला रखा है.
पांचवां संकेत वॉशिंगटन द्वारा मिडिल ईस्ट देशों को दी गई चेतावनियों से मिलता है. 28 अक्टूबर को, एसोसिएटेड प्रेस ने मामले की जानकारी रखने वाले दो राजनयिकों के हवाले से बताया कि अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्र के कई सहयोगी देशों को सलाह दी है कि वे चुनावों के बाद अमेरिका द्वारा संभावित हमलों के लिए तैयार रहें. उन्होंने ईरानी हमलों से भी सचेत रहने को कहा है.
आज 3 नवंबर को अमेरिका में चुनाव है. अमेरिकी संसद में किसके पास बहुमत होगी इसका फैसला होगा. उधर इजरायल में भी नेतन्याहू की कुर्सी जाने की संभावना है. तो ऐसे में ट्रंप-नेतन्याहू के प्लान पर भी सवाल खड़े होते हैं. उधर, ईरान ने अपना स्टैंड साफ़ रखा है. वो हमलों का जवाब देने के लिए तैयार है और साथ ही बातचीत का रास्ता भी खोल रखा है.
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