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'हमने काम कर दिया, डील हो या न हो... ', US ने ईरान जंग से बाहर आने का टाइम बता दिया

Iran-US talks Amid War: प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने कहा वो ईरान का इतना नुकसान करना चाहते हैं कि वो सीधे पाषाण कला में चला जाए. न्यूक्लियर हथियार बनाने से कोसों दूर हो जाए. तब अमेरिका खुद को जंग से बाहर ले आएगा चाहे डील हो या न हो. दूसरी तरफ उनके विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ डील कराने में लगे हैं.

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ईरान और अमेरिकी दूत विट्कॉफ के बीच सीधी बातचीत हो रही है. (फोटो-इंडिया टुडे)

क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के आगे घुटने टेक दिए हैं? कल तक जिस स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को खुलवाने के लिए धमकी देते नहीं थक रहे थे. आज बिना डील किए जंग छोड़ने की बात क्यों कर रहे हैं? ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ डील हो या न हो, दो से तीन हफ्ते में अमेरिका जंग से बाहर निकल आएगा. वहीं दूसरी तरफ उनके विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ डील कराने में लगे हैं. और ईरान ने भी मान लिया कि सीधी बातचीत चल रही है. ट्रंप का ये बयान ईरान-अमेरिका जंग में नया मोड़ ला सकता है.

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मंगलवार, 01 अप्रैल को वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने कहा, 

‘हमने ईरान में सत्ता परिवर्तन कर दिया है. अब जो लोग ईरान पर शासन कर रहे हैं वो रैशनल और कम रैडिकल लोग हैं. मुझे लगता है कि हम दो से तीन हफ़्तों में जंग से बाहर आ जाएंगे. हम ये सुनिश्चित करेंगे कि ईरान अब न्यूक्लियर हथियार न बना पाए.’

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‘हमारी उनसे लगातार बातचीत जारी है. अगर वो बातचीत के लिए तैयार होते हैं तो ठीक. नहीं तो बात करने के लिए कुछ रह नहीं गया है. हमने पहले ही ईरान का बहुत नुकसान कर दिया है. इतना कि जिसकी भरपाई करने में उन्हें 15-20 साल लग जाएंगे.’

प्रेसिडेंट ट्रंप ने ये भी कहा कि वो 'ईरान का इतना नुकसान करना चाहते हैं कि वो सीधे पाषाण कला में चला जाए'. न्यूक्लियर हथियार बनाने से कोसों दूर हो जाए. तब अमेरिका खुद को जंग से बाहर ले आएगा चाहे डील हो या न हो. उन्होंने ये भी कहा कि इससे पहले डील हो भी सकती है क्योंकि ईरान डील के लिए बेसब्र है.  

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ईरान की किससे डील की बात चल रही?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि अमेरिका से उन्हें सीधे संदेश आ रहे हैं. प्रेसिडेंट ट्रंप ने कई बार ये दावा किया कि ईरान के साथ सीधी बातचीत चल रही है. ईरान ने अब जाकर इस बात को माना है. लेकिन ये साफ़ किया कि मैसेज रिसीव करने को नेगोशिएशन न समझा जाए. 

उन्होंने अल जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 

‘मुझे मिडिल ईस्ट के अमेरिकी दूत स्टीव विट्कॉफ से संदेश मिले हैं. हमने 15 पॉइंटर अमेरिकी प्रपोजल पर कोई जवाब नहीं भेजा है. ना ही हमने उनके सामने अपनी शर्तें रखीं हैं.’

उन्होंने बताया कि उन्हें इनडाइरेक्ट मैसेज भी मिले. कुछ धमकियों के तौर पर और कुछ में मांगे बताई गईं. उनका कहना है कि ईरान अभी तक वॉशिंगटन के साथ फॉर्मल बातचीत में नहीं है. इसलिए एक्सचेंज ऑफ़ मैसेज को नेगोशिएशन नहीं कहा जा सकता है. 

विदेश मंत्री ने बातचीत के दौरान ये भी साफ कर दिया कि तेहरान केवल सीज़फायर करने के लिए जंग नहीं रोकेगा. जंग तब तक चलेगी, जब तक पूरी तरह चीज़ें सेटल नहीं हो जातीं. ईरान और अमेरिका के सिक्योरिटी एजेंसियों के बीच भी बैक चैनल के रास्ते बात हो रही है. इंटरव्यू में अब्बास अराघची ने साफ़ नहीं किया कि ईरान-अमेरिका के बीच सीधी बात कब हो सकती है. 

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