ईरान के साथ जारी जंग में पहली बार अमेरिका और इजरायल के बीच फूट नजर आई है. रविवार, 8 मार्च को इजरायल ने एयरस्ट्राइक में ईरान के 30 तेल डिपो तबाह कर दिए. तेहरान में शाहरान तेल डिपो में हुए धमाके से शहर के एक बड़े हिस्से में धुएं का गुबार छा गया. इजरायल के बड़े पैमाने पर ईरानी तेल ठिकानों को निशाना बनाने से अमेरिका काफी नाराज है. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की सरकार ने भी इस पर चिंता जाहिर की है.
अमेरिका-इजरायल में पहली बार दिखी 'फूट', ईरानी डिपो पर हमले के बाद ट्रंप ने तबीयत से झाड़ा
Israel Attack Iran Oil Depot: इजरायली एयर फोर्स के तेल डिपो पर हमले से तेहरान में बड़ी आग लग गई. मीलों दूर से आग की लपटें दिखाई दीं और राजधानी घने धुएं से ढक गई. ईरान ने भी पलटवार की चेतावनी दी है. इस बीच अमेरिका से इस मामले पर खबर आई है, जो चौंकाने वाली है.


अमेरिकी न्यूज वेबसाइट Axios ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि एक अमेरिकी अधिकारी, इजरायली अधिकारी और मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से सहयोगी देशों के बीच यह पहली बड़ी असहमति है.
ट्रंप सरकार को चिंता है कि इन हमलों की वजह से आम ईरानी मौजूदा इस्लामिक शासन के साथ खड़े हो सकते हैं. इससे अमेरिका और इजरायल का साझा ईरान के इस्लामिक शासन को सत्ता से उखाड़ने का सपना उल्टा पड़ सकता है. इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों में ईरानी तेल डिपो पर हमले और आग लगा सकते हैं.
इजरायली एयर फोर्स के तेल डिपो पर हमले से तेहरान में बड़ी आग लग गई. मीलों दूर से आग की लपटें दिखाई दीं और राजधानी घने धुएं से ढक गई. IDF ने एक बयान में दावा किया कि ईरानी सरकार तेल डिपो का इस्तेमाल अपनी मिलिट्री समेत अलग-अलग कंज्यूमर्स को तेल सप्लाई करने के लिए करती है.

इजरायल ने पहले ही अमेरिका को हमले की जानकारी दी थी. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका इस बात से अनजान था कि इजरायली हमला इतने बड़े पैमाने पर होगा. ईरान के 30 तेल डिपो को निशाना बनाने पर एक सीनियर अमेरिकी अफसर ने कहा, “हमें नहीं लगता कि यह अच्छा आइडिया था.” एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने इस मामले में इजरायल को एक मैसेज भेजा है. यह मैसेज बेहद सख्त था, जिसे इजरायल को दी गई 'गाली' माना जा सकता है.
ईरान में जिन जगहों पर हमला हुआ, वे तेल प्रोडक्शन की जगहें नहीं हैं. अमेरिकी अधिकारियों को चिंता है कि जलते हुए डिपो की फुटेज तेल बाजारों को डरा सकती हैं, जिससे तेल-गैस की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं. ट्रंप के एक सलाहकार ने Axios को बताया,
"राष्ट्रपति को हमला पसंद नहीं है. वे तेल बचाना चाहते हैं. वे इसे जलाना नहीं चाहते. और यह लोगों को गैस की ज्यादा कीमतों की याद दिलाता है."
ईरान ने भी तेवर दिखाते हुए अमेरिका-इजरायल को धमकी दी कि वो भी वेस्ट एशिया के तेल ठिकानों पर हमला कर सकता है. ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन्स को देखने वाले खतम अल-अनबिया हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रहे, तो तेहरान पूरे इलाके में ऐसे ही हमलों से जवाब दे सकता है.
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उन्होंने आगे कहा कि ईरान ने अब तक वेस्ट एशिया के फ्यूल और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट नहीं किया है. उन्होंने धमकी दी कि अगर ईरान ऐसा करता है, तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.
ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने चेताया कि अगर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रहे, तो ईरान 'बिना देर किए' जवाब देगा. गालिबाफ ईरान सरकार के सबसे सीनियर अधिकारियों में से एक हैं. वहीं, एक इजरायली मिलिट्री अधिकारी ने कहा कि तेल डिपो पर हमलों का मकसद ईरान को यह बताना था कि वो इजरायली सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करना बंद करे.
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