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ताइवान के राष्ट्रपति दूसरे देश निकलने वाले थे, चीन ने विमान उड़ने ही नहीं दिया

एस्वातिनी उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जो ताइवान को न सिर्फ देश के रूप में मान्यता देता है बल्कि अब भी उसके साथ आधिकारिक रिश्ते बनाए हुए है.

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ताइवान के राष्ट्रपति (दायें) का रास्ता चीन ने रोक दिया. (फोटो- India Today)

ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते (Lai Ching-te) ने आरोप लगाया है कि चीन ने उनके जहाज को उड़ने नहीं दिया. वह दक्षिण अफ्रीकी देश एस्वातिनी के दौरे पर जा रहे थे. लेकिन चीन ने तीन देशों पर दबाव बनाकर उनका हवाई रास्ता रोक दिया. इसकी वजह से उन्हें अपना दौरा रद्द करना पड़ा.

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‘एक्स’ पर लाइ चिंग-ते ने लिखा कि चीन की ये जबरदस्ती वाली कार्रवाई दिखाती है कि तानाशाही शासन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं के लिए कितना बड़ा खतरा है. उन्होंने ये भी कहा कि धमकी या जबरदस्ती दुनिया के साथ जुड़ने के ताइवान के इरादे को डिगा नहीं सकती.  

बता दें कि चीन ताइवान को अपने देश का हिस्सा मानता है और उसके किसी भी तरह के अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाने पर आपत्ति जताता है. एस्वातिनी उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जो ताइवान को न सिर्फ देश के रूप में मान्यता देता है बल्कि अब भी उसके साथ आधिकारिक रिश्ते बनाए हुए है. लाइ चिंग-ते 22 अप्रैल को एस्वातिनी के राजा किंग मस्वाती-III (King Mswati III) के शासन के 40 साल पूरे होने के मौके पर वहां जाने वाले थे.

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‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि सेशेल्स (Seychelles), मॉरीशस (Mauritius) और मेडागास्कर (Madagascar) ने अचानक बिना कुछ बताए उनके जहाज के अपने एयरस्पेस से गुजरने की इजाजत रद्द कर दी. ताइवान का दावा है कि इसके पीछे चीन का भारी दबाव था. एक ताइवानी सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, चीन ने इन तीनों देशों पर आर्थिक दबाव डाला था. उन्हें कर्ज में राहत खत्म करने की धमकी दी थी, जिसके बाद इन देशों ने राष्ट्रपति का रास्ता रोक दिया.

राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि चीन की ऐसी दबाव वाली हरकतें दिखाती हैं कि ऐसे तानाशाही रवैये वाले देश दुनिया की शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं. उन्होंने कहा, 

एस्वातिनी देश की मेरी यात्रा से ठीक पहले हमारे हवाई रास्ते पर पड़ने वाले कई देशों ने चीन के दबाव में आकर अचानक हमारी उड़ान की इजाजत रद्द कर दी. किसी भी तरह की धमकी या जबरदस्ती दुनिया के साथ जुड़ने के ताइवान के इरादे को डिगा नहीं सकती. न ही वैश्विक समुदाय में हमारे योगदान को कम कर सकती है. 

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ताईवा के राष्ट्रपति की एक्स पोस्ट

उन्होंने आगे कहा कि बाहरी दबाव के बावजूद दुनिया भर में समान सोच वाले साझेदारों के साथ दोस्ती बनाने का उनका संकल्प अडिग है.

राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते की उड़ान रोके जाने के बारे में मेडागास्कर की प्रतिक्रिया आई है. यहां के एक अधिकारी ने कहा कि मेडागास्कर की विदेश नीति ‘वन चाइना’ को मानती है. उड़ान रोकने का फैसला उनके अपने एयरस्पेस के अधिकार के तहत लिया गया. 

वहीं, सेशेल्स और मॉरिशस ने अभी तक इस बारे में कुछ नहीं कहा है. 

बता दें कि चीन को ताइवानी राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते से खास आपत्ति है. वह उन्हें अलगाववादी कहता है. लाइ का विचार है कि ताइवान का भविष्य सिर्फ वहां के लोग ही तय करेंगे और वे चीन के उस दावे को नहीं मानते, जिसमें वो ताइवान को चीन का हिस्सा कहता है. नवंबर 2024 के बाद लाइ चिंग-ते का यह पहला विदेशी दौरा होता. इससे पहले उन्होंने मार्शल आइलैंड, टुवालु (Tuvalu) और पलाऊ (Palau) का दौरा किया था.

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