ईरान-अमेरिका सीजफायर के बीच अमेरिका के हथियार स्टॉक को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. ऐसा दावा किया गया है कि अमेरिका की सारी मिसाइलें अब धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं. यह दावा किसी और ने नहीं, बल्कि US डिफेन्स डिपार्ट्मन्ट के एक एक्सपर्ट ने किया है. उन्होंने दावा किया कि ईरान-अमेरिका जंग में अमेरिकी सेना ने अपनी महत्वपूर्ण मिसाइलों के भंडार को काफी हद तक कम कर दिया है. यहां तक कि एक ‘new term risk’ क्रिएट हो चुका है. और अगर कुछ सालों में अमेरिका एक और जंग की शुरुआत करता है, तो ये स्टॉक पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.
खाली हो रहा अमेरिका का मिसाइल स्टॉक? ईरान पर ट्रंप के नरम पड़ने की वजह पता चली
Patriot एयर डिफेंस मिसाइलों का भी लगभग 50% इस्तेमाल हो चुका है. इन्हें आने वाली मिसाइल का पता लगाने, उसे निशाना बनाने और फिर उसे नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. ये जानकारी Center for Strategic and International Studies की नई रिपोर्ट में सामने आई है.


पिछले 7 हफ्तों की लड़ाई में अमेरिका ने अपने Precision Strike Missiles का करीब 45% खर्च कर दिया है. ये मिसाइलें 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी से दुश्मनों के ठिकानों पर अटैक कर सकती हैं. THAAD मिसाइलों का भी कम से कम 50% स्टॉक इस्तेमाल हो चुका है. ये मिसाइलें बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने के लिए होती हैं.
Patriot एयर डिफेंस मिसाइलों का भी लगभग 50% इस्तेमाल हो चुका है. इन्हें आने वाली मिसाइल का पता लगाने, उसे निशाना बनाने और फिर उसे नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. ये जानकारी Center for Strategic and International Studies की नई रिपोर्ट में सामने आई है. इसी रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देते हुए बताया गया है कि ये आंकड़े पेंटागन के सीक्रेट डेटा से भी काफी मेल खाते हैं.
वैसे तो 2026 की शुरुआत में पेंटागन ने मिसाइल प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कई कॉन्ट्रैक्ट साइन किए थे. लेकिन नई मिसाइलें बनने और डिलीवर होने में अभी भी 3 से 5 साल लगेंगे. यानी कमी तुरंत पूरी नहीं होगी.
फिलहाल शॉर्ट टर्म में अमेरिका के पास इतना स्टॉक है कि वो ईरान के खिलाफ लड़ाई जारी रख सके. अगर सीज़फायर टूट भी जाए, तब भी ऑपरेशन चल सकता है. लेकिन दिक्कत कहीं और है. अमेरिका के पास अब इतने हथियार नहीं बचे हैं कि वो चीन जैसे बड़े दुश्मन से लंबी लड़ाई लड़ सके.
CSIS की ये रिपोर्ट कहती है कि पुराने लेवल तक स्टॉक वापस आने में कई साल लग जाएंगे. रिपोर्ट के ऑथर Mark Cancian ने कहा कि इतनी ज्यादा मिसाइल खर्च होने से अमेरिका थोड़ा कमजोर हो गया है, खासकर वेस्टर्न पैसिफिक इलाके में. उन्होंने कहा कि स्टॉक भरने में 1 से 4 साल लगेंगे. और उसे और मजबूत करने में उससे भी ज्यादा समय लगेगा.
वहीं पेंटागन के स्पोक्स्पर्सन Sean Parnell ने कहा कि अमेरिकी सेना के पास अभी भी जरूरत के हिसाब से सारी चीजें है. उन्होंने ये भी कहा कि Donald Trump के आने के बाद अमेरिका ने कई सक्सेस्फुल ऑपरेशन किए हैं और उसकी ताकत अभी भी बरकरार है.
यही नहीं, CSIS की रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि अमेरिका अपने कई और हथियार भी तेजी से इस्तेमाल कर चुका है. जैसे Tomahawk मिसाइल का करीब 30% स्टॉक खत्म हो चुका है. ये लंबी दूरी की, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली और सटीक निशाना लगाने वाली सबसोनिक क्रूज मिसाइल है.
लॉन्ग रेंज JASSM मिसाइल का 20% से ज्यादा इस्तेमाल हो गया है. ये रडार से छिपने वाली और लंबी दूरी की हवा से जमीन पर अटैक करने वाली क्रूज मिसाइल है. SM-3 और SM-6 मिसाइलों का भी करीब 20% स्टॉक खत्म हो चुका है. SM-3 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए है, जबकि SM-6 एक ट्राई पर्पज मिसाइल है. इन सबको फिर से बनाने में 4 से 5 साल लगेंगे.
ये आंकड़े Donald Trump के उस दावे से अलग हैं. जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है. हालांकि, उन्होंने खुद ही अमेरिकी संसद यानी US Congress से मिसाइलों के लिए एक्स्ट्रा फंड मांगा है. आपको पता ही है कि अमेरिका में सेना या पेंटागन सीधे पैसा खर्च नहीं कर सकते. उन्हें बजट के लिए US Congress का अप्रूवल चाहिए होता है.
ट्रंप ने कहा था कि वो सिर्फ ईरान के लिए नहीं, बल्कि और कई वजहों से ज्यादा फंड मांग रहे हैं. उनके पास हथियार हैं, लेकिन वो उन्हें बचाकर भी रख रहे हैं. ट्रंप ने आगे कहा कि ‘ये एक छोटी कीमत है, जो हमें चुकानी पड़ रही है ताकि हम दुनिया में सबसे ताकतवर बने रहें. बेसिकली, टॉप पर बने रहने के लिए इतना खर्च तो चलता है.'
इसके अलावा US गवर्नमेंट ने प्राइवेट कंपनियों के साथ नए एग्रीमेंट किए हैं, जिससे आगे चलकर प्रोडक्शन बढ़ेगा. लेकिन पहले कम ऑर्डर दिए गए थे, इसलिए अभी जल्दी नई मिसाइलें मिलना मुश्किल है.
गौर करने वाली बात ये है कि जंग शुरू होने से पहले ही US के Joint Chiefs of Staff के चेयरमैन Dan Caine ने चेतावनी दी थी कि अगर युद्ध लंबा चला, तो इससे हथियारों का स्टॉक इम्पैक्ट होगा. खासकर वो हथियार जो इज़रायल और यूक्रेन को सपोर्ट करने में लगते हैं. अब अमेरिका में विपक्षी नेता भी चिंता जता रहे हैं.
डेमोक्रेटिक सीनेटर Mark Kelly ने कहा, “ईरान के पास तो बड़ी मात्रा में Shahed ड्रोन बनाने की क्षमता है. वो बैलिस्टिक मिसाइल भी बना सकता है. मीडियम रेंज और शॉर्ट रेंज मिसाइलें भी उसके पास हैं. उसका स्टॉक भी काफी बड़ा है. हमारे पास क्या है?”
Mark Kelly ने चिंता जताते हुए ये भी कहा कि एक समय के बाद ये पूरा मामला ‘मैथ का सवाल’ बन जाता है. यानी कितनी मिसाइलें इस्तेमाल हो रही हैं और उन्हें दोबारा भरने की रफ्तार क्या है. उन्होंने सवाल उठाया कि एयर डिफेंस के लिए नई मिसाइलें आखिर आएंगी कहां से.
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