राष्ट्रपति पेजेश्कियान की 'माफी' से ईरान में उबाल, IRGC भी नाराज, दुबई पर हमले में 1 की मौत
Masoud Pezeshkian Apology: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बयान ने IRGC के कई सीनियर कमांडर्स को नाराज किया है. Iran की सत्ता में बैठे धर्मगुरु और नेताओं ने भी उनके बयान का विरोध जताया है.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की अरब देशों से 'माफी' ने नया संग्राम खड़ा कर दिया है. उन्होंने खाड़ी देशों पर हमले के लिए ना केवल उनसे माफी मांगी थी, बल्कि उन्हें भरोसा दिया था कि उनके ऊपर ईरान अटैक नहीं करेगा. इस बात ने ईरानी शासन में बैठे लोगों समेत ताकतवर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) को नाराज कर दिया है. अरब देशों पर हमले नहीं रुके और दुबई पर अटैक में 1 शख्स की मौत हो गई. हालांकि, पेजेश्कियान ने हमला ना करने करने पर एक शर्त भी रखी थी.
बीते एक हफ्ते से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जरबदस्त सैन्य संघर्ष चल रहा है. 28 फरवरी को ईरान पर हमला हुआ, तो उसने भी इजरायल और अरब देशों में मौजूद अमेरिकी बेसों को निशाना बनाया. पेजेश्कियान ने शर्त रखी थी कि अगर अरब देश अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले में नहीं होने देंगे, तो उन पर ईरान अटैक नहीं करेगा. अगर अरब देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल करने दिया, तो ईरान हमला करेगा.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेश्कियान की माफी आई तो, IRGC और धार्मिक तबके के शीर्ष लोगों ने तुरंत विरोध किया. राष्ट्रपति को भी कुछ हद तक पीछे हटना पड़ा. 8 मार्च को ईरानी धर्मगुरु और सांसद हामिद रसाई ने पेजेश्कियान की माफी पर प्रतिक्रिया देते हुए X पर लिखा,
"यह दिखाता है कि मिस्टर पेजेश्कियान ने अनजाने में नहीं, बल्कि जान-बूझकर और एक जॉइंट प्रोजेक्ट के तहत यह बात कही थी ताकि सीजफायर लागू किया जा सके और अमेरिका और इजरायल को उस दलदल से बचाया जा सके जिसमें वे फंसे हुए हैं. ईरान का हित सिर्फ गैर-कानूनी जायोनी वजूद को खत्म करने और दबदबे वाले शासन की कमर तोड़ने में है."
इससे पहले हामिद रसाई ने एक वीडियो में कहा था कि ईरान की एक्सपर्ट असेंबली को तुरंत नए सुप्रीम लीडर के नाम का ऐलान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि तीन सदस्यों वाली टेंपरेरी काउंसिल का कामकाज तुरंत रोक देना चाहिए.
रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरानी शासन की टॉप पोजिशन बैठे लोग इस्लामिक रिपब्लिक की सुरक्षा और अमेरिका-इजरायल के विरोध में हैं. हालांकि, उनके आपसी नजरिए में विरोधाभास है. दो सीनियर सूत्रों ने बताया कि ईरान की लीडरशिप ने कभी-कभी पश्चिम के साथ बातचीत में एक टैक्टिक के तौर पर कट्टरपंथियों और नरमपंथियों के बीच मतभेदों को उठाया है, लेकिन शनिवार को पेजेश्कियान के बयान पर हुए विवाद ने असली मतभेदों को दिखाया है.
ईरानी लीडरशिप में एक अहम पद पर और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के ऑफिस के एक करीबी ने बताया कि राष्ट्रपति के बयान ने IRGC के कई सीनियर कमांडर्स को भी नाराज किया है. खामेनेई की मौत के बाद ईरानी शासन को एक टेंपरेरी लीडरशिप काउंसिल चला रही है. इस काउंसिल में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, चीफ जस्टिस अयातुल्ला गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के धर्मगुरु अयातुल्ला अलीरेजा अराफी शामिल हैं.
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राष्ट्रपति के बयान पर चीफ जस्टिस अयातुल्ला गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने कहा कि रीजन के कुछ देशों ने अपने इलाके को ईरान पर हमलों के लिए इस्तेमाल होने दिया है. उन्होंने कहा, "उन टारगेट पर भारी हमले जारी रहेंगे."
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के हमले ना करने वाले बयान के बाद भी अरब देशों पर ईरानी हमलों की खबरें आईं. संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में एक ड्रोन हमला हुआ, जिसमें पाकिस्तानी मूल के एक शख्स की मौत हो गई.
8 मार्च को दुबई मीडिया ऑफिस ने बताया कि अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अल बरशा इलाके में एक हवाई हमले का मलबा एक गाड़ी पर गिर गया, जिससे एक पाकिस्तानी ड्राइवर की मौत हो गई. दुबई मरीना में एक टावर के सामने एक सफल इंटरसेप्शन के बाद मलबा गिरा. हालांकि, इसमें कोई घायल नहीं हुआ.
वीडियो: खामेनेई के X अकाउंट से ट्वीट के जरिए इजरायल को क्या चेतावनी दी गई?

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