ईरान से जंग में अमेरिका बेतहाशा पैसे बहा रहा है. यह दावा ईरान का नहीं, बल्कि खुद पेंटागन का है. पेंटागन अधिकारियों ने बेतहाशा पैसे खर्च होने की पुष्टि की है. पेंटागन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में 33.4 अरब डॉलर (लगभग 3.21 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए हैं. इस दौरान 22 अरब डॉलर से ज्यादा के तो बस हथियार इस्तेमाल हुए है. लेकिन खर्चा सिर्फ हथियारों पर नहीं हुआ है. इस जंग में अमेरिका का दर्जनों विमान तबाह हुए हैं. इसके अलावा अमेरिका के स्वामित्व वाली सैकड़ों इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.
ईरान से जंग में अमेरिका ने बहा दिए 33.4 अरब डॉलर, सिर्फ हथियारों पर खर्च किए 22 अरब
पेंटागन के इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट में 28 फरवरी से 30 जून तक ईरान युद्ध में अमेरिकी खर्च और सैन्य नुकसान का ब्यौरा दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद पर करीब 22 अरब डॉलर खर्च हुए.

US डिफेंस डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल की एक रिपोर्ट में जंग के दौरान हुए नुकसान का पहला आधिकारिक ब्यौरा सामने आया है. यह रिपोर्ट 28 फरवरी से 30 जून के बीच हुए खर्चों का लेखा-जोखा है. इससे अमेरिकी हथियारों के स्टॉक पर पड़ रहे दबाव का भी पता चलता है. हालांकि प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने बार-बार इन खबरों को खारिज किया है. वो इस बात से साफ इंकार करते हैं कि अमेरिका को गोला-बारूद की कमी का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन डिफेंस डिपार्टमेंट ने हथियारों के स्टॉक को फिर से भरने में देरी और इसमें आ रही बाधाओं की बात मानी है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान अमेरिका ने इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद पर लगभग 22 अरब डॉलर खर्च किए. इसके अलावा, तमाम इक्विमेंट्स को तकरीबन 3.7 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. साथ ही अन्य खर्चों में 7.4 अरब डॉलर और जुड़ गए हैं. कुल मिलाकर देखें तो ये आंकड़ा 33.4 अरब डॉलर पर पहुंचता है.
नुकसान में अमेरिका के कुछ सबसे महत्वपूर्ण विमान शामिल थे. इनमें फाइटर जेट, हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर, हेलीकॉप्टर और बिना पायलट वाले निगरानी ड्रोन्स/UAV तक शामिल हैं. इस जंग में अमेरिका के कम से कम चार F-15E फाइटर जेट नष्ट हो गए हैं. इनमें से तीन को 1 मार्च को कुवैत के ऊपर फ्रेंडली फायर (अपनी ही सेना की गोलीबारी) में मार गिराया गया था. एक और विमान ईरान के ऊपर लड़ाई के दौरान लापता हो गया था. मार्च में ही हुई ईरानी गोलीबारी से कम से कम एक F-35A स्टील्थ फाइटर क्षतिग्रस्त हो गया. जबकि कम से कम एक A-10 ग्राउंड-अटैक विमान भी मार गिराया गया था.
अमेरिका को अपने सपोर्ट विमानों के मामले में भी नुकसान उठाना पड़ा है. जंग में कम से कम सात KC-135 एरियल-रीफ्यूलिंग टैंकर नष्ट हो गए हैं. जबकि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर एक E-3 सेंट्री एयरबोर्न अर्ली-वॉर्निंग विमान क्षतिग्रस्त हो गया.
अन्य विमानों के नुकसान में एक HH-60W हेलीकॉप्टर, एक MQ-4C ट्राइटन निगरानी करने वाला और एक AH-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर शामिल थे. ईरान में कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान चार AH-6 हेलीकॉप्टर नष्ट कर दिए गए.
लेकिन सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा MQ-9 रीपर ड्रोन से जुड़ा है. कुल 30 रीपर ड्रोन नष्ट हो गए हैं. इससे अमेरिकी मिशन की लागत और बढ़ गई है. क्योंकि ये ड्रोन मुख्य रूप से निगरानी करने, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों में अमेरिका के सबसे अहम हथियारों में से है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिकी ड्रोन्स पर हमले करने का दावा किया है. उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका के एक सबमर्सिबल (पानी के नीचे चलने वाले वाहन) को कब्जे में ले लिया है.
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सैकड़ों ठिकाने तबाह हुएअमेरिका का नुकसान सिर्फ विमानों तक ही सीमित नहीं हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक हमलों से कुवैत, बहरीन, कतर, UAE, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है. इसके अलावा अमेरिकी लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कैंपेन के दौरान और उससे पहले एक पर्याप्त नेवल बेस और उसके लिए सपोर्ट पोर्ट बनाना एक बड़ी चुनौती थी. क्योंकि पोर्ट तक पहुंचने और नेवल फ्लीट को फिर से जरूरी सामान पहुंचाने में मुश्किलें आ रही थीं. लॉजिस्टिक्स सपोर्ट को डिएगो गार्सिया ले जाने से एक और समस्या खड़ी हो गई. रिपोर्ट में CENTCOM के हवाले से कहा गया,
लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर को डिएगो गार्सिया ले जाने में दूरी एक समस्या रही, क्योंकि समुद्र में लंबी यात्रा के कारण लॉजिस्टिक्स साइकिल 14 से 18 दिन का हो गया.
पैसा बहाने पर भी हथियारों की कमीअमेरिका ने इस जंग में बेतहाशा पैसे बहाए हैं. लेकिन फिर भी उसके गोला-बारूद के स्टॉक में भारी कमी देखने को मिल रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि डिफेंस डिपार्टमेंट अब खरीद की प्रक्रियाओं और प्रोडक्शन में लगने वाले समय को व्यवस्थित करने पर काम कर रहा है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि स्टॉक को फिर से भरा जा सके और किसी भी आपात स्थिति में तेजी से जवाब दिया जा सके.
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