दुनिया के कुछ शीर्ष वैज्ञानिकों के साथ बहुत अजीब चीजें हो रही हैं. कुछ वैज्ञानिकों की आधी रात को कार हादसों में मौत हुई है और कुछ अचानक ही गायब हो गए. हालांकि, इन सभी वैज्ञानिकों में एक बात कॉमन देखने को मिली है. इन सबने मिलिट्री टेक्नोलॉजी के सबसे नए क्षेत्रों में काम किया है. इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाइपरसोनिक हथियार, न्यूक्लियर रिसर्च और स्पेस डिफेंस शामिल हैं. ये सभी घटनाएं किसी साजिश की तरफ इशारा कर रही हैं. इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि यह महज एक इत्तेफाक है या कोई सोची-समझी साजिश?
US-चीन के 20 वैज्ञानिक हुए अचानक लापता, रहस्यमय मौत या फिर कोई बड़ी साजिश?
US और China के करीब 20 वैज्ञानिकों की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई या वे लापता हो गए. ये सभी घटनाएं किसी साजिश की तरफ इशारा कर रही हैं और एक सवाल खड़ा कर रही हैं क्या यह महज एक इत्तेफाक है या कोई सोची-समझी साजिश?


अमेरिका में ऐसे 11 वैज्ञानिकों की पहचान हुई है, जिनकी असामान्य परिस्थितियों में मौत हो गई या वे लापता हो गए. इस लिस्ट में ताजा नाम एक युवा रिसर्चर का है. ब्रिटिश अखबार 'द मिरर' के मुताबिक, एमी एस्क्रिडेज (34) की 11 जून, 2022 को अमेरिका के हंट्सविले में मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि वैज्ञानिक ने खुदकुशी की थी और खुद पर गोली चलाई थी. हालांकि, अधिकारियों ने इस पर विस्तार से कुछ नहीं बताया, जिससे उनकी मौत को लेकर कई सवाल अधूरे रह गए हैं.
सभी वैज्ञानिक न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च और एडवांस्ड हथियारों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 की शुरुआत से, कई जाने-माने वैज्ञानिक और रिसर्चर या तो लापता हो गए हैं या फिर उनकी मौत असामान्य परिस्थितियों में हुई है. इनमें से कई वैज्ञानिक लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी, NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी और MIT जैसे संस्थानों से जुड़े थे.
यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है. रिपब्लिकन नेता एरिक बर्लिसन ने इन घटनाओं को ‘विदेशी साजिश’ की तरफ इशारा बताया है. ‘X’ पर उन्होंने लिखा,
“हम न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड हथियारों और स्पेस के मामले में चीन, रूस और ईरान के साथ मुकाबला कर रहे हैं. इस बीच, हमारे टॉप साइंटिस्ट्स लगातार गायब होते जा रहे हैं.”
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस स्थिति को ‘काफी गंभीर मामला’ बताया है. साथ ही यह उम्मीद भी जताई कि यह महज एक इत्तेफाक हो सकता है. फिलहाल, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है.
चीन से भी ऐसे ही मामले सामने आ रहे हैं. चीनी और विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इसी तरह के संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले कम से कम नौ वैज्ञानिकों की मौत हुई है. ज्यादातर मामलों में मौत की वजह एक्सीडेंट या अचानक बीमारी बताई गई है. कुछ मामलों में तो वजह ही नहीं बताई गई है. वैज्ञानिकों की उम्र 26 से 68 साल के बीच थी.
अमेरिकी अखबार ‘न्यूजवीक’ के मुताबिक, इन नौ मामलों में एक मामला फेंग यांगहे का भी है. वे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी में 38 साल के प्रोफेसर थे, जिनकी जुलाई 2023 में बीजिंग में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी. चीनी सेना के घटनाक्रम पर नजर रखने वाले एक रिसर्चर ने बताया कि इस मामले के कुछ पहलू अजीब लग रहे हैं. इनमें दुर्घटना का समय और उनकी मौत के बारे में सरकार की तरफ से दी गई जानकारी शामिल है. रिसर्चर ने कहा,
"फेंग, ताइवान से जुड़े AI सिमुलेशन के पीछे का मुख्य दिमाग थे. यह बहुत अजीब बात है कि यह दुर्घटना आधी रात को हुई."
AI सिमुलेशन का मतलब कंप्यूटर के भीतर एक ऐसी 'आभासी दुनिया' तैयार करना है जहां AI मॉडल यह सीख सकें कि असली दुनिया में चीजें कैसे काम करती हैं. रिसर्चर ने सरकारी बयानों में इस्तेमाल की गई शब्दावली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले किसी व्यक्ति के लिए आमतौर पर यह नहीं कहा जाता कि उसने अपनी जान का ‘बलिदान’ दिया है.
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फिलहाल, ऐसा कोई सबूत नहीं है कि अमेरिका, चीन, रूस या कोई अन्य देश वैज्ञानिकों को निशाना बनाने के लिए कोई ऑपरेशन चला रहा है. हालांकि, पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. उदाहरण के लिए, ईरान के न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स को इजरायल कई सालों से टारगेट कर रहा है. आरोप है कि यह देश के न्यूक्लियर प्रोग्राम को धीमा करने की कोशिश है.
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