अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यह कार्रवाई मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना पर ईरानी हमले के जवाब में की गई. 28 जुलाई को ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया था. अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी.
जॉर्डन बेस पर हमले से भड़का अमेरिका, ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी की
US Attack on Iran: अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. यह कार्रवाई जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बेस पर ईरानी हमले के जवाब में की गई.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ‘X’ पर एक पोस्ट में बताया,
"अमेरिकी सेना ने बुधवार, 29 जुलाई की रात 8 बजे (ET) ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए. ये हमले 28 जुलाई को मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना पर ईरानी हमलों की कोशिश का कड़ा जवाब हैं."
ये नए हमले तब हुए जब ईरान ने 28 जुलाई को जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस की तरफ कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. CENTCOM ने बताया कि सभी मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया गया था. अमेरिकी सेना के मुताबिक, मिसाइलें ईरानी इलाके से दागी गईं थी. उन्होंने इसे ‘सरप्राइज अटैक’ बताया. हालांकि CENTCOM ने यह नहीं बताया कि ईरानी मिसाइलों का निशाना क्या था, लेकिन एक्सिओस समेत अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि निशाना जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बेस था.
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24 जुलाई को अमेरिका ने हमले पर रोक लगाई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी मिलिट्री कमांडर ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को सलाह दी थी कि हमले के जरिए जो अमेरिका हासिल करना चाहता था, वो पूरा हो चुका है. साथ ही ईरान की जिन साइट्स पर हमला किया जा सकता है, वो भी अब कम हो गई हैं. ये सलाह मानते हुए ट्रंप ने हमले रोक दिए. लेकिन जॉर्डन पर ईरानी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया.
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक्सिओस को बताया था कि ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत ‘बहुत अच्छी’ चल रही है. साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ये बातचीत सफल नहीं रही तो वो फिर से उस प्लान पर लौट जाएंगे, जहां वो दो दिन पहले थे. यानी ईरान पर फिर से हमले किए जाएंगे. इसी महीने जॉर्डन में एक ईरानी हमले में दो अमेरिकी अधिकारियों की मौत हो गई थी.
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