इस घटना को लेकर वाल्मीकि समाज के लोगों में गुस्सा है. उन्होंने पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन भी किया.
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक़, जगदीशपुर थाने के मालखाने से 25 लाख रुपए नगद और 2 पिस्तौल चोरी हुए थे. पुलिस द्वारा ज़ब्त किया गया सामान मालखाने में ही रखा जाता है. पुलिस ने पिछले हफ्ते 24 लाख रुपए और 4 किलो सोना ज़ब्त किया था, जो मालखाने में रख दिया गया था. इसके अलावा बाक़ी कुछ मामलों में भी पुलिस ने जो कुछ जब्ती की, वो सब भी वहीं रखा हुआ था. रविवार 17 अक्टूबर की सुबह जब मोहर्रिर थाने पर पहुंचा और मालखाने को खोलकर देखा तो उसे कुछ शक हुआ. तहकीकात में चोरी की बात सामने आई. मालखाने से इतनी बड़ी रकम की चोरी की जानकारी मिलते ही हड़कम्प मच गया. आनन-फ़ानन में SP सिटी विकास कुमार समेत पुलिस के कई बड़े अधिकारी थाना पहुंचे. पुलिस ने अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज़ किया. थाने के एसएचओ समेत 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया.
पुलिस कस्टडी में तबीयत हुई खराब
एसएसपी मुनिराज ने आजतक को बताया कि घटना के बाद थाने की CCTV फ़ुटेज निकाली गई. CCTV के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया. उसके बाद सोमवार को थाने में सफ़ाई का काम करने वाले अरुण को गिरफ़्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में उसने अपना जुर्म भी क़बूल कर लिया. पुलिसकर्मी अरुण को साथ लेकर मंगलवार को उसके घर पहुंचे. एसएसपी मुनिराज ने बताया कि अरुण के घर से पुलिस को 15 लाख रुपए बरामद हुए. बरामदगी के दौरान अरुण की तबीयत ख़राब हो गई. उसके बाद पुलिस अरुण को अस्पताल ले गई. इस दौरान अरुण के परिजन भी साथ में थे. अस्पताल में अरुण को मृत घोषित कर दिया गया.

मृतक का भाई सोनू. (आजतक को दिए बयान की वीडियो का स्क्रीनग्रैब)
परिजनों ने पुलिस पर लगाए आरोप
मालखाने से चोरी के आरोप में पकड़े गए अरुण की मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर सवाल उठाए और मारपीट के आरोप लगाए हैं. अमर उजाला के मुताबिक, मां कमला देवी ने दावा किया कि पुलिसवालों ने चोरी का आरोप लगाते हुए पूरे परिवार को उठा लिया था और पिटाई की. अरुण कुछ पुलिसवालों के नाम बता रहा था. नाम उजागर न हो जाएं, इसलिए उसे मार दिया गया. मृतक की पत्नी सोनम ने भी पुलिस पर पिटाई के आरोप लगाए और कहा कि उन पर पैसा लाने का दबाव बनाया जा रहा था. अरुण के छोटे भाई ने आजतक से बात करते हुए सोनू ने कहा कि,
"पुलिस ने अरुण को मारा पीटा, जिससे उसकी मौत हुई है. अरुण की दो बेटियां हैं. सरकार को उनकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए."
बहरहाल आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा 302 के तहत मुक़दमा दर्ज़ कर लिया गया है. एसएसपी आगरा ने इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर समेत पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किए जाने की भी जानकारी दी है. आगरा जोन के ADG राजीव कृष्णा ने बताया कि जो पांच पुलिसकर्मी जांच टीम का हिस्सा थे, उन सभी को निलंबित कर दिया गया है. पूरे मामले की जांच एक गजटेड ऑफिसर को सौंपी गई है. मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी फैसला हुआ है.
सियासी घमासान शुरू
इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी योगी आदित्यनाथ की सरकार पर निशाना साधा. यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सच छिपाने के लिए पुलिसकर्मियों ने ही सफाईकर्मी की हत्या कर दी. उन्होंने ट्वीट में लिखा,
कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी ने भी सवाल उठाया कि किसी को पुलिस कस्टडी में पीट-पीटकर मार देना कहां का न्याय है? वाल्मीकि जयंती के दिन यूपी सरकार ने उनके संदेशों के खिलाफ काम किया है. मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाकर पुलिसवालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.

प्रियंका को रोकने के बाद महिला पुलिसकर्मियों ने उनके साथ सेल्फी भी ली. (फोटो आजतक)
बसपा के नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपए का मुआवज़ा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की. पोस्टमॉर्टम हाउस पर पीड़ित परिवार से मिलने के लिए कई विपक्षी नेता भी पहुंच गए. इसी दौरान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह मीनू की कुछ लोगों से कहासुनी भी हुई.















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