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ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान ने जंगी जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भेजा, भारत भी तैयारी में?

भारतीय शिप के मालिकों ने केंद्र सरकार से उन्हें नौसेना की सुरक्षा देने की मांग की है. सरकार भी उनकी इस मांग पर विचार कर रही है.

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होर्मुज में फंसे भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी इंडियन नेवी? (तस्वीर- India Today)

तेल और गैस लेकर आ रहे भारतीय जहाज ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हैं. खबर है कि इन जहाजों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय नौसेना अपने वॉरशिप भेजने के बारे में सोच रही है. पाकिस्तान ने तो इस पर काम भी शुरू कर दिया है. वहां की नेवी ने सोमवार, 9 मार्च को बताया कि वह होर्मुज स्ट्रेट में फंसे पाकिस्तानी कमर्शियल जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी. 

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इसके लिए राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी के दो जहाजों को पहले ही नौसेना की सुरक्षा दी जा चुकी है. इसमें एक शिप की तस्वीर भी पाकिस्तानी सेना ने सोशल मीडिया पर डाली थी, जिसमें एक वॉरशिप कच्चे तेल से भरे टैंकर के साथ चलता दिखाई दे रहा है. 

अब खबर है कि भारत भी इसी योजना पर विचार कर रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की 4 मार्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के कारण फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भारतीय झंडे वाले तकरीबन 38 कमर्शियल जहाज फंसे हैं. इनमें 1100 से ज्यादा नाविक सवार हैं. फंसे हुए भारतीय जहाजों में तेल और PNG के टैंकर भी शामिल हैं, जो गोलीबारी की चपेट में आने के डर से होर्मुज स्ट्रेट को पार नहीं कर रहे.

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ऐसे में भारतीय शिप के मालिकों ने केंद्र सरकार से उन्हें नौसेना की सुरक्षा देने की मांग की है. सरकार भी उनकी इस मांग पर विचार कर रही है. मंगलवार, 10 मार्च को ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने शिपिंग महानिदेशालय (क्रू ब्रांच) के कैप्टन पीसी मीणा के हवाले से बताया कि भारत सरकार इस योजना पर विचार कर रही है कि भारतीय नौसेना के जहाजों को भेजकर होर्मुज में फंसे जहाजों को एस्कॉर्ट किया जाए. बताया जा रहा है कि एक-दो दिन में इस पर फैसला आने की उम्मीद है.

बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था, जो 11वें दिन भी जारी है. इससे दुनिया भर के कई देशों में तेल और गैस की सप्लाई पर संकट आ गया है. ईरान के कंट्रोल वाले होर्मुज स्ट्रेट में कई देशों के जहाज फंसे हुए हैं. पाकिस्तान में तो इस वजह से ऊर्जा का ऐसा संकट है कि स्कूल-कॉलेज और दफ्तर भी बंद कर दिए गए हैं. भारत पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि वेस्ट एशिया से एनर्जी सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहां भी होर्मुज के रास्ते ही आता है. 

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक, भारत में कच्चे तेल की 55 फीसदी आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है. इसमें तेल आयात का 35 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है. इसके अलावा, भारत अपनी गैस यानी एलपीजी की लगभग दो-तिहाई मांग इंपोर्ट के जरिए पूरी करता है. इसका अधिकांश हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता है. भारत के एलपीजी आयात के लगभग 80 फीसदी हिस्से की आपूर्ति होर्मुज से होती है.

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