"लीडर को पढ़ने-लिखने की कोई ज़रूरत नहीं है. नेता कोई पढ़ा-लिखा हो, इसकी उसको कोई आवश्यकता ही नहीं. मैं मंत्री हूं. मेरे पास निजी सचिव होता है. स्टाफ होता है. विभाग होता है उसका. विभागाध्यक्ष होते हैं. जेल मुझे थोड़े न चलानी है. जेल के अधीक्षक बैठे हैं, जेलर बैठे हैं. जेल इन्हें चलानी है. मुझे तो जेल में ये कहना है कि खाना अच्छा बनना चाहिए, जेल का प्रबंध कैसा हो. नेता दूरदर्शी होना चाहिए. नेता का पढ़ना और उसकी डिग्री से उसका कोई मतलब नहीं होना चाहिए."खुद्दे देख लीजिए :
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