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अफ्रीका को छोटा दिखाने वाला दुनिया का नक्शा बदल गया, अमेरिका ने अकेले किया विरोध

United Nations में New World Map बनाने का प्रस्ताव पारित हो गया है. इस प्रस्ताव को 164 देशों को समर्थन मिला है. एकमात्र US ने इस प्रस्ताव को वोट नहीं दिया है. जबकि, इस नक्शे को बनाने का उद्देश्य Africa के आकार और हिस्सों को पूरी तरह से दिखाना है.

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UN में वर्ल्ड के नए नक्शे को बनाने वाला प्रस्ताव पारित. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेंबली में अफ्रीका के वास्तविक आकार को सही ढंग से दिखाने वाले नक्शे को अपनाने का प्रस्ताव 164 देशों के समर्थन से पारित हुआ है जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया।
  • मर्केटर नक्शा, जिसे 1569 में यूरोपीय खोजकर्ताओं की सहायता के लिए बनाया गया था, अफ्रीका के आकार को ग्रीनलैंड के बराबर दिखाता था, जिससे अफ्रीका की भौगोलिक और विकास संबंधी वास्तविकता गलत समझी जाती थी।
  • इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद दुनियाभर के संस्थान नक्शे के बदलाव पर काम शुरू करेंगे, और फरवरी 2026 में अफ्रीकन यूनियन के 54 देशों द्वारा नई नक्शा परियोजना को आधिकारिक रूप से अपनाया जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) की जनरल असेंबली में दुनिया का पारंपरिक नक्शा ‘बदलने’ का प्रस्ताव पारित हो गया. नक्शे को बदलने के लिए अफ्रीकी देश टोगो की ओर से ‘Correct The Map’ मुहिम चलाई गई थी. इसे अफ्रीकन यूनियन (AU) का समर्थन मिला था. प्रस्ताव में खासतौर पर अफ्रीका के आकार और हिस्सों को ज्यादा सही ढंग से दिखाने की बात कही गई थी. UN में इस प्रस्ताव को भारत, फ्रांस और इंग्लैंड समेत 164 देशों का समर्थन मिला है जबकि, एकमात्र अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया है. 

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इसके अलावा 6 देशों एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने वोटिंग से दूरी बनाकर रखी. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, UN में हुए इस मतदान से दुनियाभर के संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले नक्शों में बदलाव आएगा. 16वीं सदी से मर्केटर नक्शे का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी हाल के दिनों में काफी आलोचना हुई.

अफ्रीका को ग्रीनलैंड के बराबर दिखाया

यह पुराना मैप अफ्रीका को ग्रीनलैंड के आकार के बराबर दिखाता है. जबकि, असल में यह उससे करीब 14 गुना बड़ा है. मर्केटर नक्शे के आलोचकों का कहना है कि इससे भूमध्य रेखा के पास के देशों की विकास की जरूरतों और उनकी संभावनाओं को कम करके आंका जाता है. मर्केटर नक्शे को 1569 में फ्लेमिश नक्शा बनाने वाले जेरार्डस मर्केटर ने बनाया था. इसका उद्देश्य यूरोपीय खोजकर्ताओं को दुनियाभर में यात्रा करने के लिए मदद करना था. 

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उनके नक्शे में जो ‘गड़बड़ी’ की असल वजह यह है कि ग्लोब की सतह को ‘टू-डायमेंशनल चार्ट’ पर सही से दिखा पाना नामुमकिन है. मर्केटर नक्शे में पृथ्वी के घुमाव को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है. यह भूमध्य रेखा के पास के देशों को उनके असली आकार से छोटा और ध्रुवों के पास के देशों को बड़ा दिखाता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए साल 2018 में नक्शा बनाने वाली एक टीम ने समान क्षेत्रफल वाला नक्शा बनाया. इसका नाम‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ रखा गया.

‘Correct The Map’ कैंपेन

फरवरी 2026 में AU के 54 देशों ने इस नक्शे को अपना लिया. साथ ही कहा कि यह ‘सभी महाद्वीपों और खासतौर पर अफ्रीका को ज्यादा सही ढंग से दिखाता है.’ नक्शे को बदलने के लिए ‘Correct The Map’ कैंपेन ग्रुप ने कहा,

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‘आप अमेरिका, चीन, भारत, जापान, मैक्सिको और यूरोप के बड़े हिस्से को अफ्रीका में समा सकते हैं और इसके बाद भी जमीन बच जाएगी.’

BBC ने रॉयटर्स के हवाले से बताया कि टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने शुक्रवार, 4 सितंबर को वोटिंग से पहले कहा कि ‘निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से होती है.’ डुसी ने इससे पहले UN की एक ब्रीफिंग में कहा,

नक्शा कभी भी निष्पक्ष नहीं होता. यह सोच को आकार देता है और इस बात पर असर डालता है कि दुनिया में लोगों और महाद्वीपों की जगह को कैसे समझा जाता है.

फ्रांस ने किया सपोर्ट

डुसी की इन बयानों को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो का सपोर्ट मिला. बैरो ने कहा कि उनका मंत्रालय मर्केटर मैप का इस्तेमाल बंद करने जा रहा है. उन्होंने अपने एक बयान में कहा,

जाहिर है कि नक्शा बदलने से दुनिया नहीं बदलती है. लेकिन दुनिया को गलत तरीके से दिखाने वाले नक्शे को सही करना सच की ओर एक कदम है.

हालांकि, इन सबसे इतर UN में अमेरिकी प्रतिनिधि यारयना फेरेंसेविच ने नक्शे में बदलाव के प्रस्ताव को ‘UN जनरल असेंबली के काम और मकसद का मजाक उड़ाने वाला बताया.’ हालांकि, UN में यह प्रस्ताव पारित हो गया था. 

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