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मदद नहीं, मुआवजा दो... नेपाल ने बाढ़ से नुकसान के लिए भारत-चीन-अमेरिका से हर्जाना मांगा

Nepal के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि कूटनीतिक तौर पर देश का रुख अब 'मदद' मांगने से बदलकर 'न्याय और मुआवजे' की मांग करने की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि नेपाल ऐसे वैश्विक संकट की कीमत चुका रहा है, जिसे उसने पैदा नहीं किया है.

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नेपाल में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई. (PTI)

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  • नेपाल में आई भयंकर बाढ़ के कारण 1,127 लोगों की मौत हुई और करीब 3,900 लोग लापता हैं, जिसके बाद नेपाल ने भारत, चीन और अमेरिका से मुआवजे की मांग की है।
  • नेपाल का कहना है कि चीन, अमेरिका और भारत जैसी बड़ी कार्बन उत्सर्जक देशों की जिम्मेदारी है कि वे क्लाइमेट चेंज से प्रभावित कमजोर देशों को मुआवजा दें।
  • नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के FRLD बोर्ड को आर्थिक मदद के लिए अनुरोध पत्र भेजा है, जिसकी अगली बैठक 10 दिसंबर को होगी, जिससे क्लाइमेट चेंज प्रभावित देशों को सहायता मिलने में मार्ग प्रशस्त होगा।

प्राकृतिक आपदा आती है, तो हर कोई मदद के लिए खड़ा हो जाता है. इस वक्त नेपाल भी आपदा से पीड़ित है. वहां बाढ़ के कारण 1,127 लोगों की मौत हो गई, और करीब 3,900 लोग लापता हैं. भारत समेत दुनिया के कई देश मुसीबत में घिरे नेपाल की मदद कर रहे हैं. लेकिन, नेपाल को 'मदद' नहीं 'मुआवजा' चाहिए. नेपाल ने भारत, चीन और अमेरिका से बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा मांगा है. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह को यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका भेजने की बात चल रही है, ताकि इस मांग को जोर-शोर से उठाया जा सके.

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Nepal ने मुआवजा मांगने की वजह भी बताई

नेपाल का कहना है कि उसके जैसे देशों पर क्लाइमेट चेंज के कारण आपदाओं का लगातार खतरा बना रहता है. चीन, अमेरिका और भारत कार्बन उत्सर्जन पैदा करने वाले तीन सबसे बड़े देश हैं. नेपाल ने कहा कि तीनों देशों की यह जिम्मेदारी है कि वे उन कमजोर देशों को मुआवजा दें जो ऐसे उत्सर्जन का नतीजा भुगत रहे हैं.

31 अगस्त को नेपाली न्यूज चैनल कांतिपुर न्यूज से बात करते हुए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि कूटनीतिक तौर पर देश का रुख अब 'मदद' मांगने से बदलकर 'न्याय और मुआवजे की मांग करने की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि नेपाल से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन ना के बराबर होता है. फिर भी, देश एक ऐसे वैश्विक संकट की कीमत चुका रहा है, जिसे उसने पैदा नहीं किया है.

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शिशर खनाल ने आगे कहा,

"यह चैरिटी का मामला नहीं है. यह कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी का मामला है. चीन (जो दुनिया में सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाला देश है), अमेरिका (दूसरे नंबर पर) और भारत (तीसरे नंबर पर) जैसे बड़े इंडस्ट्रियल एमिटर देशों की, नेपाल जैसे कमजोर देशों को मुआवजा देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है."

नेपाली अखबार द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाली सरकार ने ‘फंड फॉर रिस्पॉन्डिंग टू लॉस एंड डैमेज’ (FRLD) के बोर्ड को एक रिक्वेस्ट लेटर भेजा है. इसमें 26 अगस्त को नेपाल के भोटेकोशी नदी में आई भयंकर बाढ़ से हुए नुकसान से निपटने के लिए आर्थिक मदद मांगी गई है.

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FRLD यूनाइटेड नेशंस की एक बॉडी है, जो यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के फाइनेंशियल सिस्टम के तहत काम करती है. ये क्लाइमेट चेंज के ऐसे असर का सामना कर रहे विकासशील देशों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करती है, जिन्हें बदला नहीं जा सकता. क्लाइमेट से जुड़े नुकसान से उबरने की कोशिशों को आर्थिक मदद देकर, यह फंड लोगों को फिर से बसने और ढलने में मदद करता है.

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Nepal ने FRLD Board से कितना पैसा मांगा?

लेटर पर नेपाली वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले और कृषि मंत्री गीता चौधरी ने साइन किए हैं. काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, नेपाल में वन मंत्रालय में संयुक्त सचिव और FRLD बोर्ड के सदस्य महेश्वर ढकाल ने कहा कि लेटर में यह साफ नहीं है कि कितना नुकसान पहुंचा है, ये बोर्ड पर निर्भर करता है कि वो कितनी मदद देता है. उन्होंने आगे कहा,

"क्योंकि हम सच में क्लाइमेट चेंज के बुरे असर से परेशान हैं, इसलिए हमने बोर्ड से बात की है. अगली बोर्ड मीटिंग 10 दिसंबर को होने की उम्मीद है, लेकिन हम उससे पहले तुरंत जवाब और सपोर्ट चाहते हैं."

उन्होंने बताया कि यह पहली बार है जब नेपाल ने इस बॉडी से सपोर्ट मांगा है. अगर नेपाल इस बोर्ड के जरिए मदद पाने में कामयाब रहा, तो इससे क्लाइमेट चेंज के कारण आपदा का सामना करने वाले छोटे देशों के लिए मदद पाने का रास्ता खुल सकेगा.ने 

वीडियो: नेपाल बाढ़ के 5 दिन बाद Nuwakot से Rasuwa तक के रास्ते का क्या हाल है?

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