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यूक्रेन से सीधे अजीत डोभाल के पास आया फोन, रूस के नाराज होने का खतरा खड़ा हो गया?

फ्रांस और जर्मनी ने भी भारत से इस मुद्दे पर बात की है

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जेलेंस्की और अजीत डोभाल (फोटो- ट्वटिर/PTI)

24 फरवरी की तारीख आते ही यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू हुए एक साल पूरा हो जाएगा. इससे पहले यूक्रेन की राजधानी कीव से एक बड़ी खबर सामने आई है. कीव ने संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली (UNGA) में एक प्रस्ताव पर नई दिल्ली से समर्थन मांगा है. इसके लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय से नई दिल्ली को फोन भी लगाया गया है.

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ग्लोबल साउथ देशों से समर्थन मांगा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के कार्यालय के प्रमुख एंड्री यरमक ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से फोन पर बातचीत की. बातचीत में यरमक ने डोभाल से UNGA के एक प्रस्ताव पर भारत से समर्थन की बात कही. हाल ही में यूक्रेन ने अपने साथी देशों के साथ मिलकर देश में शांति बहाली के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया था. इस ड्राफ्ट पर अगले कुछ दिनों में UNGA के इमरजेंसी सेशन के दौरान वोटिंग की जाएगी. यूक्रेन चाहता है कि भारत इसपर उसका समर्थन करे.

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डोभाल से बातचीत में यरमक ने कहा कि यूक्रेन विशेष रूप में ग्लोबल साउथ के देशों से समर्थन की उम्मीद कर रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी में हुए ‘वॉइस ऑफ दी ग्लोबल साउथ’ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करते हुए भारत ने खुद को ग्लोबल साउथ देशों के लीडर के रूप में बताया था. यरमक ने डोभाल से कहा,

“भारत का सहयोग हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. हमें विश्वास है कि भारत हमारे प्रस्ताव का समर्थन करेगा, क्योंकि इस प्रस्ताव में क्षेत्रीय अखंडता की बात की गई है. हमारा लक्ष्य पारदर्शी और स्पष्ट है. हम रूसी क्षेत्र में एक सेंटीमीटर का दावा नहीं करते हैं. हम सिर्फ अपना क्षेत्र वापस लेना चाहते हैं.”

फ्रांस और जर्मनी ने भी भारत से समर्थन की बात कही

रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के अलावा फ्रांस और जर्मनी ने भी भारत से इस प्रस्ताव पर समर्थन की बात कही है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस के राजनयिक सूत्रों ने अपनी ओर से इस बात की पुष्टि भी की है. लेकिन फ्रांस ने ऐसे संकेत दिए हैं कि भारत यूक्रेन के इस प्रस्ताव पर वोट से दूर रहेगा. कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत ने यूक्रेन के पक्ष में वोट दिया तो रूस के नाराज होने का खतरा है.

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संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन से जुड़े प्रस्तावों पर मतदान में पिछले एक साल में भारत कई मौकों पर अनुपस्थित रहा है. इसी कारण अब देखना होगा कि UNGA में यूक्रेन के इस प्रस्ताव पर भारत क्या फैसला करता है.

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