The Lallantop

शहीद उधम सिंह के परपोते को चपरासी की नौकरी भी नहीं मिल रही

सीएम ने जॉब देने से मना कर दिया. सांसद भगवंत मान ने फोन उठाना बंद कर दिया. दिहाड़ी मजदूरी कर घर चला रहे हैं.

Advertisement
post-main-image
img - thelallantop
आजादी की लड़ाई में शहीद हुए हर क्रांतिकारी पर क्लेम करने को राजनैतिक पार्टियां हमेशा तैयार रहती हैं. आजाद हों, लाला लाजपत राय हों या भगत सिंह. या फिर दुश्मन का लंदन तक पीछा करने वाले उधम सिंह. लेकिन इन शहीदों के परिवार आज कहां किन परिस्थिति में जिंदगी बसर कर रहे हैं. इसकी जानकारी लेने का रिस्क कोई नहीं लेता. शहीद ऊधम सिंह का परपोता एक चपरासी की पोस्ट के लिए स्ट्रगल कर रहे हैं. जग्गा सिंह नाम है इनका. उधम सिंह की बड़ी बहन आस कौर के परपोते हैं. 10 साल पहले कांग्रेस की सरकार थी. तो सीएम थे अमरिंदर सिंह. उन्होंने वादा किया था नौकरी दिलाने का. फिर सरकार गई. और वादा 'क्या हुआ तेरा वादा' हो गया. जग्गा सिंह बहुत मुश्किल में जिंदगी बिता रहे हैं. शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी से कई बार रिक्वेस्ट की. लेकिन नतीजा सिफर रहा.

उधम सिंह ने 21 साल बाद लिया जलियांवाला बाग कांड का बदला

फिर भी अगर कोई कनफ्यूज हो तो जान ले. जलियांवाला बाग कांड तो पता ही होगा.13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में ये कांड हुआ था. भीषण नरसंहार हुआ था. गवर्नर माइकल ओ डायर इसके पीछे था. उधम सिंह वहां मौजूद थे इस कांड के वक्त. बदले की आग में जलते उधम सिंह ने 21 साल बाद लंदन जाकर माइकल ओ डायर को मारा. 21 साल मामूली नहीं होते हैं. वहीं लंदन में उधम सिंह का केस चला और फांसी दे दी गई.

कपड़े की दुकान पर ढाई हजार रुपए की सैलरी में काम करते हैं जग्गा सिंह

जग्गा सिंह की फैमिली में 6 लोग हैं. बूढ़े पिता जीत सिंह के साथ रहते हैं. जग्गा सिंह ने हाईस्कूल तक पढ़ाई की है. दिहाड़ी मजदूर हैं. संगरूर में एक कपड़े की दुकान है, उसी में काम करते हैं. 2500 रुपए महीने की तनख्वाह है.

वादा पिछली सरकार का था, इसलिए ये सरकार नौकरी नहीं दे रही

जग्गा सिंह बताते हैं कि अमरिंदर सिंह की चिट्ठी लेकर डीएम के पास गए. कहा कि भले चपरासी की हो, लेकिन सरकारी नौकरी दिला दो. डीएम ने बैरंग लौटा दिया. बाद में पंजाब के फाइनेंस मिनिस्टर परमिंदर सिंह से मिले. अपनी दिक्कत बताई. कई बार मिलने के बाद ये बात सामने आई कि मामला सीएम तक पहुंचाया गया.लेकिन उन्होंने ये कहकर मना कर दिया कि भई ये नियुक्ति पत्र तो अमरिंदर सिंह वक्त दिया गया था. अब इसका कुछ नहीं हो सकता. बाबा रामदेव से मिले. रामदेव ने भी पंजाब के सीएम को चिट्ठी लिखी इस बाबत. उसका भी कोई जवाब नहीं आया. संगरूर से आम आदमी पार्टी विधायक हैं भगवंत मान. उनसे मिले तो कहा कि चिट्ठी लिखो. अपनी समस्या पर. चिट्ठी भेज दी गई. फिर जवाब मिला कि वो सत्ता में नहीं हैं. सत्ता में आएंगे तो कुछ हो पाएगा. फिर कुछ दिन बाद भगवंत मान ने फोन उठाना भी बंद कर दिया. अब शहीद क्रांतिकारी के परिवार की रोजीरोटी की लड़ाई दिल्ली तक पहुंच गई है. इतनी सर्दी में जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की ठान चुके हैं जग्गा सिंह. फिर भी अभी पंजाब स्टेट में या सेंट्रल गवर्नमेंट से कोई दिलासा तक नहीं मिला है.
ये भी पढ़ें: कश्मीर में उमड़ा ये हुजूम शहीद पुलिस वाले के जनाज़े का है  

Advertisement
Advertisement