शिवसेना (UBT) के मुखपत्र 'सामना' ने अमेरिकी एजेंसी USAID से मिलने वाली आर्थिक मदद को लेकर मचे बवाल को हवा दे दी है. अखबार ने BJP पर आरोप लगाया है कि उसने 2024 के लोकसभा चुनावों और हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए USAID के 21 मिलियन डॉलर (करीब 174 करोड़ रुपये) का ‘गलत इस्तेमाल किया’ है. पार्टी ने इसकी जांच की मांग भी की है. उसका दावा है कि विदेशी फंड का इस्तेमाल भारत में वोट खरीदने और राजनीतिक दल-बदल को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है.
"बीजेपी ने USAID के पैसे का चुनावों में गलत इस्तेमाल किया", शिवसेना (UBT) के मुखपत्र का बड़ा आरोप
कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में ये बात सामने आई थी कि ये 21 मिलियन डॉलर भारत के लिए जारी ही नहीं किए गए थे. इन रिपोर्ट्स में बताया गया कि असल में अमेरिका ने बांग्लादेश में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए ये रकम जारी की थी. लेकिन अब शिवसेना (UBT) ने बीजेपी पर इस पैसे के गलत इस्तेमाल का आरोप लगा दिया है.


USAID के फंड को लेकर पिछले कुछ दिनों से अमेरिका ही नहीं भारत में भी विवाद छिड़ा हुआ है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने USAID फंडिंग पर सवाल उठाया. अमेरिका के स्टेट गवर्नर्स की एक बैठक में ट्रंप ने कहा था,
"भारत में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर प्रधानमंत्री मोदी को? हम भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर दे रहे हैं. तो हमारे लिए क्या? मुझे भी वोटर टर्नआउट चाहिए."
ट्रंप के इस बयान पर भारत में सियासी बवाल मच गया. बीजेपी के नेताओं ने अपने बयानों में ये जताने की कोशिश की कि कहीं इस पैसे का इस्तेमाल चुनाव में विपक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए तो नहीं किया गया. हालांकि कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में ये बात सामने आई कि ये 21 मिलियन डॉलर भारत के लिए जारी ही नहीं किए गए थे. इन रिपोर्ट्स में बताया गया कि असल में अमेरिका ने बांग्लादेश में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए ये रकम जारी की थी.
लेकिन अब शिवसेना (UBT) ने बीजेपी पर ही ये आरोप लगा दिया है. सामना के संपादकीय में BJP पर हमला बोलते हुए लिखा गया,
"अगर किसी और देश में ऐसा मामला सामने आता, तो वहां की सरकार गिर जाती और नेता को इस्तीफा देना पड़ता. अमेरिका का पैसा आखिर गया कहां?"
सामना ने इस विवाद पर सवाल उठाया और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच की मांग की है. उद्धव की शिवसेना ने आरोप लगाया है कि BJP ने इस पैसे का इस्तेमाल महाराष्ट्र में विधायकों और सांसदों को खरीदने में किया. सामना में तंज कसते हुए लिखा गया,
कांग्रेस ने भी मोदी सरकार से जवाब मांगा"ट्रंप ने मजाक-मजाक में सच बोल दिया. धन्यवाद, राष्ट्रपति ट्रंप!"
इससे पहले कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर BJP को घेरा और प्रधानमंत्री मोदी से ट्रंप के आरोपों पर जवाब देने की मांग की है. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा,
"पीएम मोदी को अपने दोस्त ट्रंप से बात करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग क्यों की जा रही थी?"
खेड़ा ने USAID फंडिंग के आंकड़े पेश करते हुए कहा था कि 2001 से 2024 तक USAID ने भारत को कुल 2.9 बिलियन डॉलर (करीब 24,000 करोड़ रुपये) की मदद दी. इसमें से 1.3 बिलियन डॉलर (44.4%) मोदी सरकार (2014-2024) के दौरान मिले. जबकि 1.2 बिलियन डॉलर (41.3%) कांग्रेस की UPA सरकार (2004-2013) के समय मिले थे.
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी भारत में USAID फंड के गलत इस्तेमाल के आरोपों को खारिज करती है. पार्टी ने इसे गलत जानकारी बताया है. बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासन के दौरान विदेशी हस्तक्षेप को बढ़ावा दिया गया था. उन्होंने दावा किया कि 2004 से 2013 के बीच भारत में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा की USAID फंडिंग आई, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह राशि सिर्फ 1.5 मिलियन डॉलर रही.
वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: USAID की फंडिंग पर क्या है विवाद?


















