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इन दलित लेखकों को सम्मेलन से बाहर कर देने पर शिवाजी का इतिहास बदल जाएगा क्या?

बात का जवाब तर्क से दिया जाता तो बेहतर था.

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प्रज्ञा पवार और रावसाहेब कास्बे.
महाराष्ट्र के सतारा में 'विभाग्य साहित्य सम्मेलन' हो रहा है. वही जिसमें पढ़े-लिखे लोग शामिल होते हैं. बड़ी ज्ञान-श्यान की बातें होती हैं, मगर साहित्य सम्मेलनों में कुछ ऊंट-पटांग हरकतें करने वाले भी शामिल हो जाते हैं. तो हुआ ये है कि दो दलित राइटर थे, उन्होंने अपनी बात रखी. उससे कुछ लोग चिढ़ गए. तो होना तो ये चाहिए था कि उन राइटर की बात का जवाब तर्क से दिया जाता. मगर ये कमबख्त 'भावना' जो है न, वो शायद अक्ल को खा जाती है. बस उन दोनों दलित राइटर को सम्मेलन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. ये दो राइटर हैं प्रज्ञा पवार और रावसाहेब कास्बे. सतारा के पाटन में महाराष्ट्र साहित्य परिषद ने दो दिन का साहित्य सम्मेलन कराया. कई राइटर और इन्टलेक्चुअल लोग शामिल हुए. प्रज्ञा पवार प्रोग्राम की सदारत कर रही थीं . और रावसाहेब कास्बे सम्मेलन की शुरुआत करने आए थे.

ये कहा था दलित राइटर ने

दलित राइटर और थिंकर दया पवार की बेटी हैं प्रज्ञा पवार. उन्होंने सम्मेलन में इंटोलरेंस पर बात की. इकोनॉमिक टाइम से बातचीत में प्रज्ञा पवार ने बताया कि मैंने इंटोलरेंस पर बात करते हुए लोगों के डबल स्टैंडर्ड की बात की. उनका कहना था कि कोपर्डी रेप के केस में मराठा कम्युनिटी मार्च निकलती है, लेकिन जब दलित औरतों पर जुल्म होता है तो वो चुप रहते हैं.
कास्बे ने अपनी स्पीच में कहा कि कैसे मराठा और ब्राह्मण कम्युनिटी का एक वर्ग मराठा वीर शिवाजी की राजा के तौर पर ताजपोशी के खिलाफ था.
प्रज्ञा पवार ने कहा कि उन्हें पता चला कि उनकी और कास्बे की स्पीच से भीड़ गुस्से में थी. जबकि कास्बे ने जो भी कहा वह हिस्टोरिकल फैक्ट है. और कई इतिहासकारों ने भी उसका जिक्र किया है. इस विरोध की वजह से शिवाजी को अपनी ताजपोशी के लिए काशी से एक पंडित को लाना पड़ा था. प्रज्ञा और कास्बे की स्पीच को सम्मेलन में काफी सराहा गया था लेकिन रात में पता नहीं क्या गड़बड़ी हुई कि करीब डेढ़ सौ लोगों ने उनके गेस्ट हाउस को घेर लिया. उन लोगों ने कास्बे को धमकाया और माफ़ी मांगने को कहा. प्रज्ञा ने बताया कि सम्मेलन कराने वालों ने भीड़ को उस मंजिल पर जाने से रोक दिया, जहां पर वो रुकी हुई थीं. इसके बाद प्रज्ञा और कास्बे को सतारा छोड़ने के लिए कहा गया. अगले दिन भी दोनों राइटर को प्रोग्राम में शामिल होना था. हंगामा हुआ तो वो प्रोग्राम में शामिल नहीं हुए. प्रज्ञा को बाद में पता चला कि शिवसेना के एक नेता शंभुराज देसाई ने पुलिस में शिकायत की है, जिसमें कहा गया था कि इन राइटर ने अपनी स्पीच में राष्ट्रीय हस्तियों का अपमान किया है.

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