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एक और एयरलाइन वाली खबर, भावनाएं फिर आहत हो गईं

एयर इंडिया ने औरतों को सीट में आरक्षण दिया और औरतें ही बुरा मान गईं. क्यों? यहां जानो.

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फोटो - thelallantop
अभी ये खबर आई थी कि एयर इंडिया दुनिया की तीसरी सबसे रद्दी एयरलाइन है. एक एविएशन कंपनी फ्लाइट स्टैट्स ने ये कहा था. इसके लिए उसने 500 अलग-अलग सोर्स से डेटा लिया था. इसके बाद एयर इंडिया ने क्या किया कि एयरोप्लेन में छह सीटें महिलाओं के लिए रिज़र्व कर दीं. ये डिसीजन 18 जनवरी से लागू हो जाएगा. ट्विटर वाले इस पर भड़के पड़े हैं. और इसमें महिलाएं भी शामिल हैं. ANI की एक रिपोर्ट के हिसाब से पैसेंजेर को रिजर्वेशन के लिए अलग से भुगतान भी नहीं करना होगा. इस तरह की चीजें मेट्रो और बस में दिखाई देती हैं कि महिलाओं औ बुजुर्गों के लिए सीटें रिज़र्व रखी जाती हैं लेकिन प्लेन में ऐसा पहली बार हो रहा है. 'द हिन्दू' के हवाले से खबर है कि एयर इंडिया की जनरल मैनेजर मीनाक्षी मलिक ने कहा, ''एयर इंडिया के प्लेन में इकॉनमी क्लास की तीसरी लाइन में छह सीटें महिलाओं के लिए रिज़र्व होंगी. ऐसा उनकी सेफ्टी और कम्फर्ट को ध्यान में रखकर किया गया है. मलिक ने कहा, ''बहुत सी महिलाएं ऐसी होती हैं जो अकेली सफर करती हैं. इन लोगों के लिए 18 जनवरी से सीटें रिज़र्व की जाएंगी.'' लेकिन महिलाओं के लिए सीट रिज़र्व करने को लेकर ट्विटर पर विमर्श शुरू हो गए. ये नया वर्चुअल अड्डा है जहां हर तरह का विमर्श होता है. इस डिसीजन के भी कई पहलू हो सकते हैं और हैं भी. जैसे कईयों का कहना है कि प्लेन में कौन सा लोग खड़े होकर जाते हैं जो महिलाओं को अलग से ट्रीट किया जा रहा है. कई महिलाओं ने इस पक्ष के साथ ट्वीट किया. एक अकाउंट से ट्वीट किया गया कि हमें रिज़र्व सीट नहीं साफ़ सुथरी सीट चाहिए. AI 1 एक ने कहा कि इससे एयर इंडिया ने जेंडर स्टीरियोटाइप को और मजबूत कर दिया है. इसके लिए धन्यवाद. AI 6 नुपुर ने ट्वीट किया किया महिला होने के नाते ये मेरे लिए इंसल्ट की चीज है. ये मॉडर्न डे का सेक्सिज्म है. AI 2 एक ने इसे जेंडर इक्वलिटी को जबरदस्ती थोपने वाला बताया. AI 3 जैसा कि होता है, इसका मजाक उड़ाने भी पीछे नहीं थे. लेकिन उनका तरीका थोड़ा फूहड़ था. AI 5 एक पक्ष ये भी है कि ऐसा इसलिए किया गया होगा क्योंकि कुछ महिलाएं, महिलाओं के बगल ही बैठना पसंद करती हैं. अकेले सफर करने वाली महिलाओं के लिए ये सही कदम हो सकता है. लेकिन ट्विटर के हिसाब से देखा जाए तो कई लोगों को ये कदम अजीब लग रहा है. ज़मीन से ये कांसेप्ट हवा में पहुंच गया है. आप इस बारे में क्या सोचते हैं, कमेंट बॉक्स में लिखिए.

ये स्टोरी निशांत ने की है.

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