अब इस घटना के इतने दिन बीत जाने का बाद फिर से ये तस्वीर वायरल हो रही है. इस बार मुद्दा पीएम की सुरक्षा से जुड़ा नहीं, बल्कि सबसे आगे खड़े इस SPG कमांडो की जाति से जुड़ा है. दरअसल सोशल मीडिया पर अलग-अलग जातियों की ठेकेदारी का दावा करने वाले पेज सबसे आगे खड़े कमाडों की जाति बता रहे हैं. उसे अपने समाज की जाति से जोड़ रहे हैं. जातीय दंभ दिखाने की कोशिश हो रही है.

पीएम की सुरक्षा में हाथ में बंदूक लिए खड़ा SPG कमांडो.
कोई इनको प्रवेश चौहान गुर्जर बता कर राजपूत समुदाय से जोड़ रहा है, तो कोई इनको बागपत जिले का जाट बता रहा है. यही नहीं कुछ ने तो इस कमांडो का नाम विनोद अंबेडकर कर दिया, तो कुछ ने कहा कि ये हनुमान श्रीवास्तव हैं.
हमें भी इस कमांडो का नाम नहीं पता. जरूरत भी नहीं है. लेकिन जिस तरह से अलग-अलग नाम बताए जा रहे हैं, उससे ये तो तय है इनके असली नाम और जाति का अंदाजा उन्हें भी नहीं है, जो ऐसा दावा कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर इस तरह की कोशिशों को जातिवाद ही कहा जाना चाहिए. इसकी आलोचना भी हो रही है. मसलन, एक ट्विटर यूजर ने इस तरह की पोस्ट्स स्क्रीनशॉट लेकर पोस्ट करते हुए लिखा,
"जातिवाद के जहर का असर देखिए. भक्तों ने SPG कमांडो सतपाल अहीर को अपने ढंग से बांट लिया."
"गुजराती भक्तो जागो, इस को कोई सतीश शाह या सतीश पटेल बना लो, भक्ति रेस में पिछड़ रहे हो."
नाज़िया खान ने एक काफी चर्चित मीम की लाइन ट्वीट करते हुए लिखा,
"सबने अपने-अपने हिसाब से जाति बाँट ली. SPG be like- हाँ ये कर लो पहले."














