कैसे गायब हुए राजेश्वर?
28 नवंबर को राजेश्वर हमेशा की तरह अपने घर महालक्ष्मी सोसाइटी घाटकोपर से अपने ऑफिस पहुंचे. उनके ड्राइवर ने बताया कि राजेश्वर ने उन्हें पंत नगर मार्केट में छोड़ने के लिए कहा. पंत नगर में उन्हें लेने एक दूसरी गाड़ी आई, जिसमें बैठकर वो चले गए. इसके बाद वो लापता हो गए. तब इस मामले में पुलिस ने उनकी गुमशुदगी का मामला दर्ज किया और तलाश में लग गई. उनका मोबाइल ट्रेस करने पर पता लगा कि राजेश्वर नवी मुंबई में हैं. लेकिन इसके बाद उनके फोन का सिग्नल गायब हो गया.
घटना के एक हफ्ते बाद यानी 4 दिसंबर को पुलिस ने राजेश्वर के परिवार के कहने पर अपहरण का मामला दर्ज किया. और इसके ठीक अगले दिन यानी 5 दिसंबर को राजेश्वर की लाश रायगढ़ जिले के पनवेल इलाके में एक जंगल में पाई गई. लाश बुरी तरह सड़ चुकी थी. इतनी बुरी तरह कि पहचान भी नहीं हो पा रही थी. हालांकि बॉडी पर कोई चोट के निशान नहीं थे. राजेश्वर के बेटे ने उनके कपड़े और जूते की मदद से उनकी पहचान की.

28 नवंबर को अपने दफ्तर पहुंचने के बाद से घर नहीं लौटे थे राजेश्वर.
इसमें देवोलीना का नाम कहां से आया?
पुलिस ने जब राजेश्वर की कॉल डीटेल्स खंगाली तो उसमें कई लोगों के नाम सामने आए. इसमें एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्य और नेता सचिन पवार के नाम भी शामिल थे. पुलिस का कहना है कि राजेश्वर कुछ बार में रेगुलर तौर पर जाते थे. और सचिन की मदद से उनकी पहचान एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लोगों से भी थी. पुलिस ने इस मामले में अब तक एक दर्जन से ज़्यादा लोगों से पूछताछ की है, उसी में से एक देवोलीना भी थीं. देवोलीना से पंत नगर थाने में घंटो पूछताछ की गई. यहां से लौटने के बाद देवोलीना ने कोई बयान तो जारी नहीं किया लेकिन उन्होंने ट्वीट कर अपने फैंस को अपना कुशल क्षेम बताया. आप उनका ट्वीट नीचे देख सकते हैं-

देवोलीना ने अपने करियर की शुरुआत 2011-12 में एनडीटीवी इमैजिन पर आने वाले शो 'संवारे सबके सपने प्रीतो' से की थी. लेकिन उन्हें पॉपुलैरिटी मिली स्टार पर आने वाले मशहूर टीवी सीरियल 'साथ निभाना साथिया' में गोपी बहू के किरदार से. वो छह साल तक इस शो से जुड़ी रही थीं. इसके खत्म होने के बाद वो इसी साल 'लाल इश्क' नाम के एक टीवी सीरीज़ में दिखी थीं.

'साथ निभाना साथिया' के एक सीन में देवोलीना. जिया मानेक पहले इस शो में गोपी का किरदार करती थीं, उनके शो छोड़ने के बाद देवोलीना ने जॉइन किया और शो के ऑफ एयर होने तक उससे जुड़ी रहीं.
जहां तक बात सचिन की है, तो वो 2004 से 2009 तक महाराष्ट्र के मंत्री प्रकाश मेहता के पीए रह चुके हैं. लेकिन जब सचिन ने निर्दलीय रूप से बीएमसी (बृह्नमुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) का चुनाव लड़ा, तब से प्रकाश से उनके सारे संबंध खत्म हो गए हैं. पुलिस इस मामले की जांच में जोर-शोर से लगी हुई है.
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