तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान पिछले कई हफ़्तों से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं. (फोटो-PTI)
11वें दौर की वार्ता के बाद भी केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच मामला किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका. इस दौर की बातचीत भी बेनतीजा खत्म हुई है. 22 जनवरी को हुई बातचीत के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, "सरकार की ओर से कहा गया कि 1.5 साल की जगह 2 साल तक कृषि क़ानूनों को स्थगित करके चर्चा की जा सकती है. सरकार ने कहा है कि अगर इस प्रस्ताव पर किसान तैयार हैं तो कल फिर से बात की जा सकती है, कोई अन्य प्रस्ताव सरकार ने नहीं दिया."
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26 जनवरी को योजना मुताबिक़ होगी ट्रैक्टर रैली राकेश टिकैत ने बताया कि गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की ट्रैक्टर प्रस्तावित रैली योजना के मुताबिक़ ही होगी. एक और किसान नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "सरकार द्वारा जो प्रस्ताव दिया गया था वो हमने स्वीकार नहीं किया और कृषि क़ानूनों को वापस लेने की बात को सरकार ने स्वीकार नहीं की. अगली बैठक के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है." किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के नेता एसएस पंढेर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "कृषि मंत्री ने हमें साढ़े तीन घंटे इंतज़ार करवाया. यह किसानों का अपमान है. जब वह हमसे मिलने आए तो उन्होंने हमसे सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने को कहा और बताया कि वह बैठकों की प्रक्रिया को खत्म कर रहे हैं."
किसान नेताओं ने कहा है कि सरकार की ओर से अगली बैठक की कोई तारीख तय नहीं की गई है लेकिन वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते रहेंगे.
सरकार क्या कह रही? 11वें दौर की वार्ता के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया से बात करते हुए कहा-
भारत सरकार PM मोदी के नेतृत्व में किसानों और गरीबों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और रहेगी. विशेष रूप से पंजाब के किसान और कुछ राज्यों के किसान कृषि क़ानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन के दौरान लगातार ये कोशिश हुई कि जनता के बीच और किसानों के बीच गलतफहमियां फैलें. इसका फायदा उठाकर कुछ लोग जो हर अच्छे काम का विरोध करने के आदि हो चुके हैं, वे किसानों के कंधे का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर सकें.
किसान प्रस्ताव पर फिर से विचार करें केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आगे कहा-
भारत सरकार की कोशिश थी कि वो सही रास्ते पर विचार करें जिसके लिए 11 दौर की वार्ता की गई लेकिन किसान यूनियन क़ानून वापसी पर अड़ी रही. सरकार ने एक के बाद एक प्रस्ताव दिए लेकिन जब आंदोलन की पवित्रता नष्ट हो जाती है तो निर्णय नहीं होता. वार्ता के दौर में मर्यादाओं का तो पालन हुआ परन्तु किसानों के हक़ में वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो, इस भाव का सदा अभाव था, इसलिए वार्ता निर्णय तक नहीं पहुंच सकी. इसका मुझे भी खेद है.
कृषि मंत्री ने आगे बताया, "हमने किसान यूनियन को कहा है कि जो प्रस्ताव आपको दिया है, 1 से 1.5 वर्ष तक क़ानून को स्थगित करके समिति बनाकर आंदोलन में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने का, वो प्रस्ताव बेहतर है, उस पर फिर से विचार करें. सरकार ने किसानों से कहा है कि आप लोग अगर निर्णय पर पहुंच सकते हैं तो आप लोग कल (शनिवार) अपना मत बताइए. निर्णय घोषित करने पर आपकी सूचना पर हम कहीं भी मिल सकते हैं.
मृत किसानों के परिवार को सरकारी नौकरी पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें रिपोर्ट मिली है कि कृषि कानूनों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान 76 किसानों का निधन हो गया है. मैं घोषणा कर रहा हूं कि आंदोलन के दौरान पंजाब के जिन किसानों की मौत दिल्ली के बॉर्डर पर हुई है उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी.