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पुलिस ने CJP के प्रोटेस्ट में जा रहे नेता को उत्तराखंड में रोका, HC बोला- 'ये तो गुंडागर्दी है'

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने संसद मार्च में शामिल होने जा रहे प्रभात ध्यानी को ऋषिकेश में हिरासत में लेने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए इसे नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ बताया. कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस किसी को सिर्फ इस आधार पर दिल्ली जाने से नहीं रोक सकती कि वहां धारा 144 लागू है.

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प्रभात ध्यानी को उत्तराखंड पुलिस ने ऋषिकेष स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया था. (फोटो- India Today)

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  • उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रभात ध्यानी को दिल्ली जाने से रोकने वाले पुलिस के हिरासत को अवैध करार देते हुए कहा कि पुलिस को सरकार की इमेज की बजाय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
  • यह कार्रवाई तब हुई जब प्रभात ध्यानी संसद मार्च में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे और पुलिस ने धारा 144 के हवाले से उन्हें ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लिया था, जिससे सवाल उठे।
  • कोर्ट ने कहा कि प्रभात ध्यानी का यात्रा का अधिकार संवैधानिक है और यदि मार्च दिल्ली में था तो गिरफ्तारी की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की थी, जिससे उत्तराखंड पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़ा हुआ।

‘उत्तराखंड की पुलिस गुंडागर्दी कर रही है.’ ये विपक्ष के किसी नेता का बयान नहीं है. उत्तराखंड के हाई कोर्ट ने ये बात कही है. हुआ ये कि उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के नेता प्रभात ध्यानी कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे. उन्हें ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने ये कहते हुए हिरासत में ले लिया कि दिल्ली में धारा 144 लगी है.

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प्रभात ध्यानी इस डिटेंशन के खिलाफ कोर्ट चले गए. यहां जजों ने उत्तराखंड की पुलिस को कायदे से फटकारा. ये भी नसीहत दी कि पुलिस को सरकार की इमेज बचाने की बजाय नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर काम करना चाहिए.  

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभात ध्यानी को ‘अवैध’ तरीके से हिरासत में लिए जाने के मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सवाल किया कि उत्तराखंड पुलिस किसी को केवल इसलिए दिल्ली जाने से कैसे रोक सकती है क्योंकि वहां धारा-144 लागू है. इस कानून के तहत अगर कोई अपराध होगा तो वो दिल्ली में होगा. फिर उत्तराखंड की पुलिस को क्या अधिकार है कि वो किसी को इसलिए हिरासत में ले ले कि वो धारा-144 लागू क्षेत्र में जा रहा है, यह तो ‘गुंडागर्दी’ है. 

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कोर्ट ने आगे कहा कि प्रभात ध्यानी देश में कहीं भी यात्रा कर सकते हैं. उन्हें ये अधिकार संविधान ने दिया है. जज ने उत्तराखंड पुलिस से पूछा कि वो बताए किस अपराध में या किसके निर्देश पर प्रभात ध्यानी की गिरफ्तारी उचित थी. अगर वो दिल्ली में संसद मार्च में हिस्सा लेने जा रहे थे तो इस स्थिति से निपटना दिल्ली पुलिस का काम था. फिर उत्तराखंड पुलिस ने इस पर कार्रवाई क्यों की?

मामले की सुनवाई जस्टिस रवींद्र मैठाणी और एक अन्य जज की डिवीजन बेंच ने की. पीठ ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सबसे तीखी टिप्पणी ये की, 

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आप इस देश में क्या कर रहे हैं? क्या आप सरकार की छवि बचाने के लिए हैं या लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए? पुलिस का व्यवहार बेतुका है.

दिल्ली में संसद मार्च

बता दें कि प्रभात ध्यानी जिस संसद मार्च में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली जा रहे थे, उसे कॉकरोच जनता पार्टी ने बुलाया था. पार्टी की मांग है कि नीट पेपर लीक के लिए जिम्मेदार शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. सीजेपी के इस मार्च में हजारों की संख्या में लोग दिल्ली में जुट गए थे. संसद की ओर जाते हुए उनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई, जिसमें सैकड़ों पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी भी घायल हुए.

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