एक से दूसरी कॉल, और लड़की का फ़ोन नंबर एक DIG को जा लगा. DIG जीतेंद्र कुमार साही ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया: 'लड़की फोन पर बहुत नर्वस थी. अपनी लाइफ ख़त्म करना चाहती थी. उसने बताया गूगल सर्च में उसे मेरा नंबर मिला. मैंने उससे कहा कि वो मेरे ऑफिस आ जाए और हम इत्मिनान से बैठकर बात करेंगे.' लड़की जीतेंद्र के ऑफिस पहुंची और अपनी कहानी सुनाई. बहुत दिनों से एक लड़के के साथ रिलेशनशिप में थी. दोनों शादी करना चाहते थे. लेकिन जबसे लड़के की गवर्मेंट जॉब लगी, उसने लड़की से कटना शुरू कर दिया. और कहा कि लड़के के घरवाले उसकी शादी कहीं और करवा रहे हैं. DIG के कहने पर लड़की को काउन्सलिंग के लिए भेजा गया. फिर लड़के को बुलाकर दोनों की काउन्सलिंग करवाई गई. भविष्य में पता नहीं क्या होगा लेकिन फ़िलहाल एक लड़की की जान बच गई. जान जरूर DIG ने बचाई लेकिन उसे DIG तक लाने वाला गूगल था.गूगल ने खुदकुशी करने जा रही बरेली की लड़की की जान बचाई
सुसाइड करने के लिए नहर के पास पहुंच गई थी, लेकिन फिर...
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हम सब के दिमाग में कभी न कभी ये ख़्याल आता है कि चलो रोज-रोज की टेंशन ख़त्म करें और मर जाएं. लेकिन ये बस ख़्याल भर रहता है. सोचिए, वो पल कितना ताकतवर होता होगा और इंसान की निराशा उस पर कितनी हावी होती होगी जब वो अपनी जान लेने का फैसला करता है. ऐसी ही एक लड़की है बरेली में. उसके बॉयफ्रेंड के घर वालों ने उसकी शादी तय कर दी. कहा कि लड़की से सारे नाते तोड़ दो. लड़की टूट गई. 24 साल का दिल न इतना जवान होता है कि एक को छोड़ झट से किसी दूसरे में लग जाए. न इतना बूढ़ा कि किसी के चले जाने पर तसल्ली कर ले. लड़की ने सुसाइड करने का फैसला लिया. सुसाइड का ऐसा अटेम्प्ट जो सचमुच उसकी जान ले ले. सहारनपुर से 4 किलोमीटर दूर यमुना की नहर में डूबने के लिए चल पड़ी. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की इस खबर के मुताबिक़, लड़की को लगा कि क्या मरने का कोई इससे आसान तरीका भी हो सकता है. और उसने वही किया जो हम सभी दिमाग में कोई भी सवाल आने पर करते हैं. गूगल पर 'how to commit suicide' डालकर सर्च का बटन दबा दिया. लेकिन गूगल को भी समझ-बूझ कर बनाया गया है. जब कोई गूगल पर ऐसा सर्च करता है तो सुसाइड करने के तरीकों के बजाय एक फ़ोन नंबर आता है. जो आपको मदद ऑफर करता है. ये असल में 'आसरा' नाम की संस्था का नंबर है. जो लोगों को मुश्किल में मदद करती है. इसके अलावा कई हेल्पलाइन्स और ऐसी वेबसाइट के लिंक होते हैं जिनसे मदद ली जा सकती है.
एक से दूसरी कॉल, और लड़की का फ़ोन नंबर एक DIG को जा लगा. DIG जीतेंद्र कुमार साही ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया: 'लड़की फोन पर बहुत नर्वस थी. अपनी लाइफ ख़त्म करना चाहती थी. उसने बताया गूगल सर्च में उसे मेरा नंबर मिला. मैंने उससे कहा कि वो मेरे ऑफिस आ जाए और हम इत्मिनान से बैठकर बात करेंगे.' लड़की जीतेंद्र के ऑफिस पहुंची और अपनी कहानी सुनाई. बहुत दिनों से एक लड़के के साथ रिलेशनशिप में थी. दोनों शादी करना चाहते थे. लेकिन जबसे लड़के की गवर्मेंट जॉब लगी, उसने लड़की से कटना शुरू कर दिया. और कहा कि लड़के के घरवाले उसकी शादी कहीं और करवा रहे हैं. DIG के कहने पर लड़की को काउन्सलिंग के लिए भेजा गया. फिर लड़के को बुलाकर दोनों की काउन्सलिंग करवाई गई. भविष्य में पता नहीं क्या होगा लेकिन फ़िलहाल एक लड़की की जान बच गई. जान जरूर DIG ने बचाई लेकिन उसे DIG तक लाने वाला गूगल था.
एक से दूसरी कॉल, और लड़की का फ़ोन नंबर एक DIG को जा लगा. DIG जीतेंद्र कुमार साही ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया: 'लड़की फोन पर बहुत नर्वस थी. अपनी लाइफ ख़त्म करना चाहती थी. उसने बताया गूगल सर्च में उसे मेरा नंबर मिला. मैंने उससे कहा कि वो मेरे ऑफिस आ जाए और हम इत्मिनान से बैठकर बात करेंगे.' लड़की जीतेंद्र के ऑफिस पहुंची और अपनी कहानी सुनाई. बहुत दिनों से एक लड़के के साथ रिलेशनशिप में थी. दोनों शादी करना चाहते थे. लेकिन जबसे लड़के की गवर्मेंट जॉब लगी, उसने लड़की से कटना शुरू कर दिया. और कहा कि लड़के के घरवाले उसकी शादी कहीं और करवा रहे हैं. DIG के कहने पर लड़की को काउन्सलिंग के लिए भेजा गया. फिर लड़के को बुलाकर दोनों की काउन्सलिंग करवाई गई. भविष्य में पता नहीं क्या होगा लेकिन फ़िलहाल एक लड़की की जान बच गई. जान जरूर DIG ने बचाई लेकिन उसे DIG तक लाने वाला गूगल था.Advertisement











