
Anusha Raichur
अनुषा रायचुर. बेंगलुरु में रहने वाली 24 साल की ग्राफ़िक डिज़ाइनर. इकॉनोमिक जर्नलिज़्मकी पढ़ाई की. फिर करीब एक साल तक मीडिया में काम भी किया. अनुषा को लगा कि वो वहां फिट नहीं हो पा रही थीं. इसलिए नौकरी छोड़ कर अपने सपनों के पीछे निकल पड़ीं. प्यार था आर्ट. प्यार बहुत पुराना था. देर से ही सही लेकिन अपने सपने को पूरा करने निकल पड़ीं. अब इंडिपेंडेंट डिज़ाइनर हैं.
अनुषा ने कुछ दिनों पहले LGBTQ सीरीज शुरू की. जिसमें वो रंग-बिरंगे इलस्ट्रेशन के ज़रिये हिंदी भाषा में लोगों को इस कम्युनिटी के बारे में बता रही हैं.
हमने अनुषा से बात की. अनुषा ने हमको अपने बारे में बताया. और ये भी बताया कि ट्रांसजेंडर और बाईसेक्शुअल लोगों को आज भी हमारी सोसाइटी में कैसे देखा और समझा जाता है. भले ही अमेरिका में सेम सेक्स की शादियां लीगल हो गई हैं. लेकिन हमारे देश में आज भी इस बारे में खुल कर बातें नहीं होतीं. जो काम बातें नहीं कर पातीं, तस्वीरें कर जाती हैं. इसलिए अनुषा ने ये इलस्ट्रेशन बनाए हैं.

अनुषा, ये इलस्ट्रेशन आप कब से बना रही हैं? क्या आपने कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली है?
ड्राइंग करने का शौक मुझे बचपन से था. ड्राइंग की मैंने कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. मैं हमेशा से पेंट करती आ रही हूं. जॉब मैंने छोड़ी ही इसलिए थी क्योंकि मुझे लगता था कि मैं वहां फिट नहीं हो पा रही थी. ये LGBTQ वाली सीरीज मैंने 10 अगस्त से शुरू की थी.
गे वो लड़के होते हैं जो दूसरे लड़कों की तरफ सेक्शुअली आकर्षित होते हैं.

LGBTQ कम्युनिटी पर ड्राइंग इलस्ट्रेशन करने की कैसे सोची?
मैं LGBTQ कम्युनिटी और उनकी परेशानियों को लेकर हमेशा से बहुत जागरूक थी. लेकिन हमारी सोसाइटी में आज भी बहुत सारे लोग हैं. जिनको ट्रांसजेंडर और बाई-सेक्शुअल के बारे में ठीक से पता ही नहीं है. बातें सब करते हैं. लेकिन क्लियर नहीं पता होता है. इसलिए मैं अपनी पेंटिंग्स से लोगों को बहुत सिंपल तरीके से ये बातें समझाना चाहती हूं.
जब मैं कुछ ट्रांसजेंडर लोगों से मिली. मुझे लगा शायद वो दुनिया के सबसे अच्छे लोगों में से थे. लोग उनके साथ इतनी बुरी तरह से सुलूक करते हैं. तब भी वो लोग इस दुनिया में बहुत सारा प्यार बांटना चाहते हैं. लोगों के बीच अपनी पहचान बनाना चाहते हैं. अभी भी वो हम लोगों से बात करने के लिए तैयार हैं.
जो लड़की किसी दूसरी लड़की की तरफ सेक्शुअली अट्रैक्ट होती है. वो लेस्बियन होती है.

आपके इलस्ट्रेशन्स में हिंदी में लिखा होता है. इसके पीछे की क्या कहानी है?
मैं देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहती थी. मुझे लगा हिंदी में लिखने से बहुत सारे लोग इसको पढ़कर समझ सकेंगे.
जो लोग लड़कों और लड़कियों दोनों की तरफ सेक्शुअली आकर्षित होते हैं. वो बाईसेक्शुअल होते हैं.

LGBTQ कम्युनिटी से जुड़ा कोई खास किस्सा?
कोई एक किस्सा तो नहीं है. लेकिन मेरे बहुत सारे फ्रेंड हैं जो बाईसेक्शुअल या ट्रांसजेंडर हैं. कॉलेज में मैंने ट्रांसजेंडर्स पर एक सेमिनार अटेंड किया था. जर्नलिज़्म के वक़्त भी कई ऐसे लोगों से मिली और उनके इंटरव्यू किये. उन्होंने मुझे अपने बॉयफ्रेंड्स के बारे में बताया. सेक्स वर्कर के तौर पर अपनी जिंदगी के बारे में बताया. लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं. सोसाइटी उनको कैसे देखती हैं. ये सब देख, समझकर मुझे लगा कि मुझे इस बारे में ज़रूर कुछ करना चाहिए.
जो लोग अपने बायोलॉजिकल जेंडर से अलग महसूस करते हैं. वो ट्रांसजेंडर होते हैं. मतलब अगर कोई लड़का पैदा हुआ है. लेकिन वो दिल से खुद को लड़का नहीं,लड़की जैसा महसूस करता है. वैसे ही कपड़े पहनना चाहता है. वैसा ही दिखना चाहता है. जैसे उनकी आत्मा गलत शरीर में फंसी हुई है.

आपके ड्राइंग इलस्ट्रेशन में आर्ट का कौन सा फॉर्म यूज़ होता है?
ये कोई एक फॉर्म नहीं है. मैं ज़्यादातर आर्ट ग्राफ़िक डिजाइन और फोटोशॉप से करती हूं.

ये है पूरी सीरीज का एक लोगो
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