कोई उम्मीद बर नहीं आती, कोई सूरत नज़र नहीं आती,
जितनी हमारी उम्र है, उतने साल से ये आदमी मौत चाहता है
हर सालगिरह पर मौत की बात करता है. मगर मौत जाने कहां है?
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146 साल के हो गए हैं.
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मरते हैं आरज़ू में मरने की मौत आती है पर नहीं आती
- मिर्ज़ा ग़ालिब
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मौत. आखिरी मंजिल. जब आती है तो कहर भी बन जाती है. और कभी बहुत खूबसूरत भी. आप सोच रहे होंगे कैसा आदमी है जो मौत को भी खूबसूरत बता रहा है. ज़रा उससे पूछो, जिसके यहां मौत हो जाती है. बिल्कुल सही सोचा आपने. बेवक्त आई मौत से परिवार बिखर जाता है. मगर इसी तरह से सोचो ,उस शख्स के बारे में जो 24 साल से मौत का इंतजार का रहा हो और मौत न आए. जो अब चल नहीं सकता है. जो अब दूसरों का मोहताज है. मगर मौत उससे नाराज़ हो गई है. हर सालगिरह पर वो मौत की बात करता है. मगर मौत है कि आती नहीं.
ये कहानी है इंडोनेशिया के मबाह गोथो की, जो 31 दिसंबर 1870 को इस दुनिया में आए. और आज भी जिंदा हैं. 146 साल की जिंदगी पूरी हो चुकी है. दुनिया के सबसे उम्रदराज इंसान कहलाने के लिए उनके दस्तावेजों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणिकता मिलना जरूरी है. फिलहाल दुनिया की सबसे बुजुर्ग होने का रिकॉर्ड फ्रांस की 'जैन कालमेंट' के नाम है. वो 122 साल तक जिंदा रहीं. साल 2016. फिर वही तारीख थी. 31 दिसंबर. सामने केक था. परिवार के लोगों ने एक छोटी सी पार्टी रखी थी. मगर इस बुज़ुर्ग को किसी सरप्राइज का इंतजार नहीं था, क्योंकि वो तो मौत पर टकटकी लगाए हुए है. मौत कब करीब आये और वो उसे गले लगा ले. और फिर जाने न दे.
इस बुज़ुर्ग के एक पोते ने बताया, 'गोथो 1992 से मौत की तैयारी कर रहे हैं. वो अपने बेटों के करीब ही दफ्न होना चाहते हैं. वो अपनी कब्र की जगह तय कर चुके हैं और अपने ताबूत भी तैयार करा कर रख लिया है.' गोथो अपना वक्त रेडियो सुनकर गुजार रहे हैं. उनकी आंखों की रोशनी न के बराबर रह गई है. इसलिए वो टीवी नहीं देख पाते.
ये कहानी है इंडोनेशिया के मबाह गोथो की, जो 31 दिसंबर 1870 को इस दुनिया में आए. और आज भी जिंदा हैं. 146 साल की जिंदगी पूरी हो चुकी है. दुनिया के सबसे उम्रदराज इंसान कहलाने के लिए उनके दस्तावेजों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणिकता मिलना जरूरी है. फिलहाल दुनिया की सबसे बुजुर्ग होने का रिकॉर्ड फ्रांस की 'जैन कालमेंट' के नाम है. वो 122 साल तक जिंदा रहीं. साल 2016. फिर वही तारीख थी. 31 दिसंबर. सामने केक था. परिवार के लोगों ने एक छोटी सी पार्टी रखी थी. मगर इस बुज़ुर्ग को किसी सरप्राइज का इंतजार नहीं था, क्योंकि वो तो मौत पर टकटकी लगाए हुए है. मौत कब करीब आये और वो उसे गले लगा ले. और फिर जाने न दे.
मबाह गोथो की इस सालगिरह पर उसके पोते थे और पोतों की बीवियां. गोथो ने चार शादियां की थीं. चारों बीवियां तो बड़ी बात उनके बच्चे भी मर चुके हैं.पोतों ने घर पर कुछ पड़ोसियों को भी बुलाया था. हैप्पी बड्डे का गीत गुनगुनाया गया. गोथो फूट फूट कर रोने लगे. 146 साल के बुज़ुर्ग ने एक फूंक मारी और सारी मोमबत्तियां बुझ गईं. इसी तरह वो अपनी जिंदगी को बुझा देना चाहते हैं. उनकी इस ख्वाहिश को उनके रिश्तेदार ने मीडिया को बताया था कि वो मर जाना चाहते हैं. वो मौत का इंतजार का रहे हैं.
इस बुज़ुर्ग के एक पोते ने बताया, 'गोथो 1992 से मौत की तैयारी कर रहे हैं. वो अपने बेटों के करीब ही दफ्न होना चाहते हैं. वो अपनी कब्र की जगह तय कर चुके हैं और अपने ताबूत भी तैयार करा कर रख लिया है.' गोथो अपना वक्त रेडियो सुनकर गुजार रहे हैं. उनकी आंखों की रोशनी न के बराबर रह गई है. इसलिए वो टीवी नहीं देख पाते.
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