
कुछ किसानों की कर्ज माफी की रकम इतनी कम निकली है.
1. जितना 31 मार्च तक बचा था, उतना मिला
सरकार ने 31 मार्च, 2016 तक लिए गए कर्ज की माफी की घोषणा की थी. इसके बाद के कर्ज से सरकार को कोई मतलब नहीं. इसे ऐसे समझिए कि किसी किसान ने अपने किसान क्रेडिट कार्ड से 31 मार्च, 2016 से पहले 1 लाख रुपये का कर्ज लिया. अब पहले तो किसान को पता नहीं था कि कर्ज माफ हो जाएगा सो वो किस्तें देता रहा. फिर 2017 में कर्ज माफी हो गई. जब इस किसान का खाता जांचा गया तो वो 31 मार्च तक 99, 980 रुपये मूल और चार हजार ब्याज जमा कर चुका था. यानी कुल 1,03,980 रुपये उसने चुका दिए. उसके महज 20 रुपये बचे. वो अब सरकार ने चुका दिए. इसी तरह ये 10-20 पैसे और 400-500 रुपये की कर्ज माफी का आंकड़ा सामने आया. यानी उन किसानों पर 31 मार्च तक लिए गए कर्ज की इतनी राशि ही बची थी. और ऐसे 4814 किसान ही हैं, जिनका एक रुपये से लेकर 100 रुपये तक का कर्ज माफ हुआ है. यूपी सरकार ने 13 सितंबर को प्रेस नोट जारी कर खुद इस बात की जानकारी दी है.

योगी सरकार ने कर्जमाफी पर विवाद के बाद सफाई दी है.
2. दूसरा मसला लापरवाही का है
ये लापरवाही या तो लेखपाल की तरफ से हुई है जिसका काम गांव-गांव जाकर लाभार्थियों को जांचना था. या फिर बैंक की तरफ से गलती हुई है, जिसने कुछ किसानों का कर्ज सही से कैल्कुलेट नहीं किया कि 31 मार्च, 2016 तक उनका कितना बकाया है. सरकार को जो लिस्ट भेजी गई, उसमें गलत आंकड़े थे.
शांति देवी को मिला कर्जमाफी का प्रमाण पत्र.
हमीरपुर का ही एक मामला ले लेते हैं. शांति देवी को दिया गया कर्जमाफी का प्रमाणपत्र सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है. उनका 10.37 रुपये का कर्ज माफ हुआ है. हमने पता लगाया तो जानकारी मिली कि उन पर करीब 1,65,000 रुपये का कर्ज है और ये लोन उन्होंने 2016 से पहले ही लिया था. साफ है कि इसमें या तो बैंक की तरफ से गलती हुई है या तो लेखपाल की तरफ से कोई गड़बड़ की गई है. नुकसान तो एक गरीब किसान परिवार का ही हुआ न. शांति देवी इस बात से बेहद नाराज हैं और राज्य सरकार को कोस रही हैं. सरकार को ऐसे मामलों को छंटवाकर उनका कर्ज माफ करवाना चाहिए.

शांति देवी का महज 10 रुपये का कर्ज माफ हुआ है.
विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा था कर्ज माफी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले किसान कर्ज माफी का मुद्दा जोर-शोर से उठा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के सभी बड़े नेताओं ने किसान कर्ज माफी का वादा किसानों से किया था. सरकार बनी तो पहली कैबिनेट में ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कर्ज माफी की घोषणा कर दी. 17 अगस्त को पहले चरण (11,93,224 किसानों का 7,371 करोड़ का कर्ज माफ होगा, जिनके खाते आधार से लिंक हो गए हैं) की कर्जमाफी शुरू हुई.
17 अगस्त को किसानों को खुद गृहमंत्री राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने प्रमाण पत्र दिए थे.
गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने खुद 51 किसानों को प्रमाण पत्र दिए. इस दौरान करीब 7500 लोगों को कर्ज माफी के प्रमाण पत्र दिए गए. इसके बाद जिलों में ये कर्ज माफी के प्रमाण पत्र बांटने शुरू किए गए तो हंगामा शुरू हो गया. वो इसलिए कि कई किसानों का इतना कम कर्ज जैसे 90 पैसे, 1 रुपये माफ हुआ था जोकि किसी मजाक से कम नहीं लग रहा था.
यह है कर्ज माफी योजना?
यूपी की योगी सरकार ने लघु और सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी. एक हेक्टेयर तक की भूमि के मालिकों को सीमांत किसान और दो हेक्टेयर की भूमि के मालिक किसानों को लघु किसान माना जाता है. सरकार ने तय किया था कि 31 मार्च 2016 से पहले तक का कर्ज ही माफ किया जाएगा. प्रदेश में करीब 86 लाख किसानों को इस योजना का लाभ मिलने की बात कही गई है. इसके लिए करीब 36,000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान भी किया गया है.वीडियो देखें-
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