मुल्ला मंसूर फिर से मारा गया. अमेरिका के ड्रोन हेलिकॉप्टर से उसकी कार पर हमला हुआ. अमेरिका के लोग ये दावा कर रहे हैं कि मुल्ला मंसूर मर गया है. लेकिन अभी तक तालिबान वालों ने इसे नहीं माना है. तालिबान ने कहा कि उनका लीडर उस वक़्त उस एरिया में था ही नहीं जहां पर हमला हुआ था.
बड़े दिनों से अमेरिकी सेना इस ताक में थी कि मंसूर को मारा जा सके. 2011 में ओसामा बिन लादेन की मारने के लिए जो अभियान चला था. उसके बाद ये दूसरा उतना ही बड़ा और हाई प्रोफाइल अभियान था. शनिवार को सुबह आखिरकार हमला किया गया. मुल्ला मंसूर पाकिस्तान के बलूचिस्तान एरिया से गुज़र रहा था. उसी समय अमेरिका के ड्रोन हेलिकॉप्टरों ने उसपर हमला कर दिया. कार में दो लोग थे. दोनों मारे गए. अफ़ग़ानिस्तान की डिफेन्स मिनिस्ट्री और वहां के एक बड़े गवर्नमेंट डॉक्टर अब्दुल्ला ने ये कन्फर्म कर दिया है कि मंसूर मारा गया है.
कौन था मुल्ला मंसूर
1. पूरा नाम है मुल्ला अख्तर मोहम्मद मंसूर. 2. 1985 में सोविअत संघ के खिलाफ जिहादी वॉर में शामिल था. वहीँ मुल्ला उमर से मिला. 3. 1994 में जब मुल्ला उमर ने कंधार में तालिबान बनाया था. बहुत सारे लोग उसके साथ जुड़े. 1995 में मुल्ला मंसूर ने मुल्ला उमर को जॉइन किया. उसके साथ रहकर काम सीखा. 4. 2015 में जब मुल्ला उमर की मौत का खुलासा हुआ तो उसे तालिबान चीफ बनाने की बातें शुरू हुईं. 2016 में तालिबान का चीफ बना. 5. अल-कायदा और ISIS से बहुत नजदीकी रिश्ते भी रहे. इसी वजह से अफगानिस्तान और पाकिस्तान में उसका टेरर बहुत बढ़ गया था.
ये अभियान क्यों चला:
तालिबान बनाने वाला और शुरुआत से ही उसका चीफ था मुल्ला उमर. 2013 में उमर को मार दिया गया था. लेकिन इसका खुलासा हुआ 2015 में . उसके बाद तालिबान में फूट पड़ गयी थी. काफी दिनों तक खींचा-तानी चलती रही. कुछ लोग थे जो मुल्ला मंसूर को अपना चीफ बनाना चाहते थे. कुछ इसके खिलाफ थे. उधर मुल्ला मंसूर अल-कायदा से अपने रिश्ते मज़बूत कर रहा था. आखिर में मंसूर को ही तालिबान चीफ बना दिया गया. इससे काफी सारे तालिबानी नाराज़ हो गए. मुल्ला मंसूर पर ये इल्ज़ाम भी लगा कि उसने ही कुछ पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ मिलकर मुल्ला उमर को मरवा दिया था. ताकि वो खुद चीफ बन जाये.
अब मुल्ला मंसूर अफगानिस्तान में काफी मज़बूत हो गया था. उसके साथ अल-कायदा का भी सपोर्ट था. अफगानिस्तान और पाकिस्तान में उसने मासूम लोगों पर हमले शुरू कर दिए.
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा अफगानिस्तान से अपने रिश्ते सुधारने की कोशिशें कर रहे थे. इस कोशिश में उनका सबसे बड़ा दुश्मन मुल्ला मंसूर ही साबित हो रहा था.
अमेरिका को ये बात समझ आ रही थी कि मंसूर और अल-कायदा का एक साथ होना उनके लिए खतरनाक हो सकता है. इसीलिए ओबामा ने मुल्ला मंसूर को मरवाने के मिशन पर हामी भर दी.
अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर से काफी दूर अहमद वाल शहर के पास एक कार पर अमेरिका ने ड्रोन हेलीकॉप्टरों से हमला कर दिया. इस कार में मुल्ला मंसूर के साथ एक और आदमी भी था. पाकिस्तान के भी कई अधिकारी भी मुल्ला मंसूर के मारे जाने से बहुत खुश हैं. अमेरिका के सीनेट सदस्यों ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ये एक बहुत बड़ी जीत हो सकती है. लेकिन ऐसा तभी होगा जब मुल्ला मंसूर सच में मारा गया होगा. अभी सिर्फ दावे हो रहे हैं.
अमेरिका का कहना है कि इस बार 'ही इज फाइनली डेड.'
फाइनली डेड इसलिए क्योंकि ये कोई पहली बार नहीं है कि मंसूर को मारा गया हो. या इस बात का दावा किया गया हो.
इससे पहले 2 दिसम्बर 2015 भी उसके मारे जाने की खबर ई थी. पाकिस्तान के क्वेटा इलाके में तालिबान की एक मीटिंग चल रही थी. उन लोगों में आपस में कोई बात हो गयी. अचानक गोलियां चलनी शुरू हो गयीं. उसी में गोलियां मुल्ला मंसूर को भी लगीं. ख़बरें आयीं कि मुल्ला की मौत हो गयी है. लेकिन फिर तालिबान के लोगों ने ही ये क्लियर किया कि मुल्ला सिर्फ घायल था, लेकिन जिंदा था. तो मीडिया के हिसाब से मुल्ला मंसूर अबकी दूसरी बार मारा गया है. मुल्ला न हुआ रक्तबीज हो गया. बार बार मौत की ख़बरें आयीं. बार बार जिंदा निकल जाता है. इस बार तो गवर्नमेंट और डॉक्टर्स ने उसकी मौत कन्फर्म कर दिया है. लेकिन तालिबान वालों का कहना है कि हमारा चीफ जिंदा है और हो सकता है बहुत जल्द वो कोई ऑडियो या वीडियो जारी करें.