The Lallantop

पाकिस्तान से खरीदा फोन, एनक्रिप्टेड ऐप और लोकल सपोर्ट... ऐसे हुई थी पहलगाम हमले की तैयारी

NIA की चार्जशीट के अनुसार, आतंकियों के फोन से मिले डेटा ने पहलगाम हमले की साजिश का खुलासा किया. डेटा से पता चला कि हमले की तैयारी एक हफ्ते से चल रही थी. इस हमले में शामिल आतंकियों को 28 जुलाई, 2026 को सुरक्षाबलों ने 'ऑपरेशन महादेव' में मार गिराया था.

Advertisement
post-main-image
पहलगाम आतंकी हमले के दौरान बैसारन घाटी में 26 लोग मारे गए थे (PHOTO-X)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • पहलगाम हमले की योजना 22 अप्रैल 2024 को हुए हमले से एक हफ्ते पहले पाकिस्तान स्थित आतंकवादी हैंडलर साजिद जट्ट की मदद से बनाई गई थी, जिसकी जानकारी NIA चार्जशीट में मिली।
  • यह हमले की योजना आतंकवादियों ने GPS बेस्ड मोबाइल ऐप का उपयोग कर बैसारन घाटी की रेकी और कोऑर्डिनेट्स साझा करने के लिए बनाई, साथ ही स्थानीय लोगों ने आतंकवादियों को शरण और भोजन दिया।
  • NIA ने इस मामले में ऑपरेशन महादेव के तहत आतंकियों को मार गिराया और 1100 से अधिक गवाहों से पूछताछ करते हुए जांच आगे बढ़ाई है।

पहलगाम हमले को एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. इस बीच खुलासा हुआ है कि 22 अप्रैल को हुए इस हमले की योजना लगभग एक हफ्ते पहले बनाई गई थी. NIA की चार्जशीट के अनुसार, आतंकियों के फोन से मिले डेटा ने पहलगाम हमले की साजिश का खुलासा किया. डेटा से पता चला कि हमले की तैयारी एक हफ्ते से चल रही थी. इस हमले में शामिल आतंकियों को 28 जुलाई, 2026 को सुरक्षाबलों ने 'ऑपरेशन महादेव' में मार गिराया था. उनके पास से जो फोन मिले, उनमें NIA को 2 स्क्रीनशॉट मिले जिनमें बैसारन घाटी का नक्शा था.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इन स्क्रीनशॉट्स पर टाइम स्टैंप भी था. इससे ये पता चला कि ये स्क्रीनशॉट 15 और 16 अप्रैल को लिए गए थे. NIA के मुताबिक, स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि पॉइंट्स को एक मोबाइल ऐप पर मार्क किया गया था. ये मार्क उन्हीं पॉइंट्स पर लगाए गए जो पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर साजिद जट्ट ने आतंकियों को बताए थे. टाइम स्टैम्प से पता चलता है कि कम से कम 15 अप्रैल से ही आतंकियों ने हमले की प्लानिंग और बैसारन घाटी की रेकी शुरू कर दी थी. साथ ही इस मामले में जीपीएस (GPS) पर आधारिए एक ऐप के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है. इस GPS बेस्ड मोबाइल ऐप का इस्तेमाल हाइकिंग और पहाड़ों पर जाने के लिए किया जाता है. लेकिन आतंकवादियों ने कोऑर्डिनेट्स शेयर करने के लिए इसका इस्तेमाल किया.

दो लोगों ने दिया लोकल सपोर्ट

NIA की जांच के मुताबिक, 21 अप्रैल को तीनों आतंकी फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी ने घाटी के ऊपरी इलाकों में बनी मिट्टी की एक झोपड़ी में शरण ली थी. कश्मीर में ऐसी झोपड़ी को ढोक कहते हैं जिसका इस्तेमाल गर्मियों में चरवाहे करते हैं. ये परवेज और उसके चाचा बशीर अहमद की ढोक थी जिन्होंने आतंकियों को लोकल सपोर्ट दिया था. इन दोनों पर हमले से एक दिन पहले आतंकवादियों को खाना और शरण देने का आरोप है.

Advertisement

NIA के मुताबिक, दो मोबाइल फोन से निकाले गए डेटा के एनालिसिस से पता चला है कि उनमें आतंकवादियों की कई तस्वीरें, आतंकवादी हैंडलर अली साजिद उर्फ अली भाई के साथ चैट के स्क्रीनशॉट मौजूद थे. स्क्रीनशॉट्स में वह आतंकवादियों को आगे बढ़ने के लिए रास्ता बता रहा था. इसके अलावा फोन्स में बैसारन के पास की जगहों के कोऑर्डिनेट्स दिखाने वाले ऐप के स्क्रीनशॉट मौजूद थे. जिस हैंडलर साजिद की बात हो रही है, वो एक पाकिस्तानी नागरिक है. चार्जशीट में साजिद को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' का कमांडर बताया गया है.

NIA को पता चला है कि साजिद एक सीक्रेट एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन नेटवर्क का इस्तेमाल करता था. वो कोऑर्डिनेट्स और लॉजिस्टिक्स का काम संभालता था. वो आतंकियों को जगह बदलने के आदेश देता था और रास्ते की जानकारी (रूट नेविगेशन) को कंट्रोल करता था.

गवाह ने भी पहचान लिया

एक गवाह जिसने फैसल की लाश की पहचान की थी, उसने NIA को बताया कि सितंबर 2024 में उसकी मुलाकात फैसल और तीन अन्य आतंकियों से हुई थी. इस गवाह की सुरक्षा के लिए उसकी पहचान उजागर नहीं की गई. गवाह के मुताबिक चारों आतंकी पंजाबी और उर्दू बोल रहे थे. गवाह ने बताया कि उसे आतंकियों को उस जगह ले जाने के लिए मजबूर किया गया जहां एक ड्रोन ने पीले रंग का पैकेट गिराया. उस पैकेट में 20 पिस्तौल, 15 लाख रुपये और तिकोने आकार के बम थे.

Advertisement

(यह भी पढ़ें: 'पहलगाम के बाद मशहूर हो गया... सेना भी मुझे बुलाती है', आतंकी ने खुद खोल दी पाकिस्तान की पोल)

पाकिस्तान में खरीदे गए थे फोन

जांच में यह भी पता चला है कि आतंकवादियों से बरामद दो फोन पाकिस्तान में खरीदे गए थे. वे अपने मोबाइल फोन पर ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) से बातचीत करने के लिए खास ऐप्स का इस्तेमाल करते थे. बैसारन की दूर-दराज की लोकेशन और सीसीटीवी कैमरे न होने की वजह से वह आतंकवादियों के लिए एक आसान टारगेट था. पूरी जांच के दौरान NIA ने 1100 से ज्यादा गवाहों पर पूछताछ की है.

वीडियो: पहलगाम आतंकी हमले को एक साल हो गए, पीड़ित परिवारों का ज़ख्म अब भी ताज़ा

Advertisement