ताइवान की मंत्री शू मिंग चूं (Hsu Ming-chun ) ने पूर्वोत्तर भारत के लोगों पर बयान दिया था. जिसे लेकर अब विवाद शुरू हो गया है. उनका ये बयान भारत से हुए एक करार पर किए गए सवाल के दौरान आया था. हालांकि, विवाद के बाद बयान को लेकर ताइवान के विदेश मंत्रालय ने माफी मांगी है.
मंत्री ने भारतीयों पर की थी नस्लभेदी टिप्पणी, अब ताइवान ने माफी मांग क्या कहा?
Taiwan की मंत्री ने भारतीयों पर नस्लभेदी बयान दिया था. अब वहां के विदेश मंत्रालय ने भारत से माफी मांगी है. कुछ ही दिन पहले भारत और ताइवान के बीच एक MoU साइन किया गया था.
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डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में भारत और ताइवान के बीच कामगारों को ताइपे बुलाने के लिए एक समझौता हुआ था. 29 फरवरी को ताइवान की लेबर मिनिस्टर शू मिंग चूं यूट्यूब पर एक लाइव प्रोग्राम में शामिल हुई थीं. इस दौरान उनसे भारत और ताइवान के बीच हुए लेबर मोबिलिटी करार पर सवाल पूछा गया. जिसे लेकर उन्होंने कहा था कि ताइवान में पूर्वोत्तर भारत के लोगों को बुलाना ज्यादा मुफीद रहेगा. अपने बयान में उन्होंने कहा था,
'पूर्वोत्तर भारत के लोगों का रंग, खाने के तौर तरीके हमसे मिलते जुलते हैं. साथ ही वो ईसाई धर्म में ज्यादा विश्वास रखते हैं. और वहां के लोग निर्माण कार्यों, उत्पादन और कृषि क्षेत्र में ज्यादा निपुण भी हैं.'
उनके इस बयान के बाद भारत की तरफ से अनौपचारिक तरीके से आपत्ति जताई गई थी. जिसके बाद ताइवान के विदेश मंत्रालय ने माफी मांगते हुए बयान जारी किया. कहा,
भारत-ताइवान के बीच क्या डील?'हाल ही में, ताइवान का सरकारी एजेंसियों द्वारा कुछ ऐसे बयान दिए गए जो सही नहीं हैं. इन बयानों की ताइवान के समाज में आलोचना हुई है. हमारे भारतीय दोस्तों और अंतराष्ट्रीय खेमे में भी इनकी आलोचना हुई है. सरकार इसके लिए माफी मांगती है. सरकार मामले की जांच कर जरूरी बदलाव करेगी.'
भारत और ताइवान ने 17 फरवरी, 2024 को एक MoU (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए थे. इस MoU के तहत भारतीय कामगारों के लिए ताइवान के दरवाजे खुल जाएंगे. दरअसल, ताइवान इस वक्त उत्पादन, निर्माण और कृषि के क्षेत्र कामगारों की तंगी से जूझ रहा है. इस करार के तहत ताइवान ही निर्धारित करेगा कि भारत से कितने प्रवासी कामगारों को वहां भेजा जाएगा. और भारत ताइवान की जरूरत के मुताबिक लोगों की भर्ती कर उन्हें ट्रेनिंग देगा.










