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स्विट्जरलैंड के पानी में डूबे बम निकालने का कारगर आइडिया लाइए, 49 लाख रुपये ले जाइए

Swiss Military ने 1918 से 1964 तक कई झीलों में हथियार डंप करवाए थे. अब इन्हें निकालने का कारगर आइडिया देने वालों को 49 लाख रुपये मिल रहे हैं.

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स्विट्ज़रलैंड की झीलों में हजारों टन गोला-बारुद है (फोटो- गेट्टी)

स्विट्ज़रलैंड घूमने का प्लान बना रहे हैं तो एक काम है जो आपकी ट्रिप की लागत को पूरा कर सकता है. ये काम है पानी में बम और गोलियां ढूंढने का. स्विस फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ डिफेन्स प्रोक्यूरमेंट ने पानी में डूबे बम और गोलियों को निकालने के लिए प्राइज मनी की घोषणा की है.

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कुछ लोग कहेंगे कि हमें तो तैरना ही नहीं आता भई, पानी में उतरेंगे कैसे? तो आपको खुद पानी में नहीं उतरना है. आपको बस आइडिया देना है कि कैसे इन बमों-गोलियों को बाहर निकाला जा सकता है. अगर आपका आइडिया काम का हुआ तो आपको 50 हज़ार स्विस फ्रैंक, माने भारतीय करेंसी में 49 लाख 22 हजार रुपये से भी ज्यादा का प्राइज मिलेगा.

स्विट्जरलैंड के डिफेंस विभाग ने एक बयान जारी कर कहा है,

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"हम शिक्षाविदों और उद्योगों को झीलों के अंदर से जंग का सामान निकालने के लिए आमंत्रित करते हैं. ये रिकवरी पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित होनी चाहिए."

अल-जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार 1918 से 1964 के बीच डंप किए गए इन एम्युनिशंस को निकालने का खर्च अरबों डॉलर तक का हो सकता है. ये सारा खर्च सरकार को ही उठाना पड़ेगा.

झील में हथियार डंप क्यों?

स्विट्ज़रलैंड बहुत छोटा देश है. दूसरे तरीके से कहें तो यहां जगह की कमी है. लोगों के रहने के लिए ज़मीन कम है. ऐसे में हथियारों को डंप करने का सबसे अच्छा जरिया बना पानी. स्विट्ज़रलैंड में कई झीलें हैं. एक अनुमान है कि इन झीलों में लगभग 12 हज़ार टन बम डूबे हुए हैं. इसे सेफ भी समझा जाता था. प्रथम विश्व युद्ध के समय से ही यहां गोले डंप किए जाते रहे हैं.

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बीबीसी की एक रिपोर्ट कहती है कि स्विस मिलिट्री और एयरफोर्स भी 2021 तक अपनी प्रैक्टिस के लिए झीलों में गोले दागते थे. कुछ झीलों में ये 150 से 200 मीटर तक गहराई में डूबे हैं. वहीं कुछ में केवल 7 से 8 मीटर की गहराई तक. एक्सपर्ट्स का मानना है कि पानी में डंप करने से हथियार कम खतरनाक होते हैं. उनके फटने का डर काफी कम हो जाता है.

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पहले भी कई बार झीलों की सफाई के दौरान हथियार निकाले जा चुके हैं (Photo-Keystone-SDA)
डूबे बम क्यों निकालना चाहता है स्विट्ज़रलैंड?

बीते कुछ सालों में ये बात सामने आई कि डूबे हुए गोलों की वजह से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है. 2020 में कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की. पॉलिश एकेडमी ऑफ साइंस, जर्मनी के इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्महोल्ट्स और फिनलैंड के सेंटर फॉर पोलर एंड मरीन रिसर्च की इस रिपोर्ट एम्युनिशंस की वजह से पानी को होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार हथियारों के खोखे एक ज़हरीला पदार्थ छोड़ते हैं जो पानी को प्रदूषित करता है. इन्हें बाहर निकालने के अलावा इस समस्या से निपटने का कोई और तरीका भी नहीं है. लिहाजा स्विस सरकार झीलों को साफ करने के लिए इन्हें निकाल रही है.

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