इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में नर्स शीतल प्रेग्नेंट थीं. उनकी डिलीवरी 26 मई को कमला नेहरू हॉस्पिटल में हुई. उसके पास ही एक बेड पर डिलीवरी के लिए ही आई हुई औरत अंजना ने बताया कि उसे लड़का हुआ है. पर जब हॉस्पिटल वालों ने शीतल को बच्चा थमाया तो वो लड़की थी.
वहीं अंजना, जिसकी थोड़ी देर बाद डिलीवरी हुई उसके बारे में बताया गया कि उसे लड़का हुआ है. इसके बाद शीतल का माथा ठनका. शीतल ने हॉस्पिटल में शिकायत की कि उसे लड़का हुआ था. उसे लड़की क्यों थमाई जा रही है. हॉस्पिटल वालों ने कहा कि उसे लड़की ही हुई थी और शीतल को टाल दिया.

बच्चों के साथ शीतल और अंजना एक धार्मिक कार्यक्रम में
पर शीतल को पूरा शक था कि उसका बच्चा हॉस्पिटल वालों ने बदल दिया है. इसलिए शीतल ने एक याचिका हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल की. जिसके बाद शिमला पुलिस को इस मामले में जांच के आदेश दिए गए. बच्चा बदला गया है या नहीं, ये कंफर्म करने के लिए DNA टेस्ट करवाया गया.
NDTV की खबर के हिसाब से DNA टेस्ट ने कंफर्म कर दिया कि शीतल का बच्चा अंजना को दे दिया गया था. इसलिए पिछले हफ्ते हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दोनों परिवारों को कोर्ट के बाहर ही मामला सुलटाने को कह दिया है.
इसके बाद दोनों परिवार बच्चे को बदलने के लिए राजी हो गए हैं. शीतल फाइनली सारे बवाल के बाद अपने बच्चे को पाकर बेहद खुश हैं. कहती हैं, मैं खुद एक नर्स हूं, ये अनदेखी या साजिश थी हॉस्पिटल वालों की. उनको मेरी इतनी परेशानियों के लिए सजा मिलनी चाहिए.

बच्चों के साथ शीतल और अंजना एक धार्मिक कार्यक्रम में
हालांकि अंजना इस लड़के को शीतल को देते हुए रो रही थीं. अंजना का कहना था, मैं पिछले 5 महीने से इस लड़के को अपने बेटे की तरह से पाल रही थी. ये मुश्किल है. पर मैं हमेशा से ही एक लड़की चाहती थी क्योंकि मेरा पहले से ही एक 10 साल का लड़का है.
पुलिस ने एक स्टाफ नर्स और एक मिड-वाइफ को बच्चा बदलने के मामले में गिरफ्तार किया है. इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट में आरोप ये है कि ये सारी साजिश रची थी लड़की को जन्म देने वाली औरत और उसके हसबैंड ने.
बी. डी. नेगी जो Shimla के एडिशनल SP हैं, कहते हैं, हमने बच्चा बदलने के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है. जरूरत पड़ी तो और भी गिरफ्तारियां करेंगे. ताकि जो भी इस साजिश का असली दोषी है उसे पकड़ा जा सके.
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