धरती से चांद को हर तरह देखा गया. बचपन ने कौतूहल की नजर से देखा. विज्ञान ने संभावनाओं की उम्मीद से. लेकिन आज रात चांद बिल्कुल अलग तरह दिखाई देगा (Supermoon in India). ये नजारा दुर्लभ होगा, क्योंकि चांद और पृथ्वी आज दोनों एक-दूसरे के सबसे नजदीक आ गए हैं. आज रात 12 बजे से चांद सामान्य से कहीं बड़ा और चमकीला दिखेगा. इस बड़े आकार के दिखने वाले चांद को ‘सुपरमून’ कहते हैं. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि चांद की कक्षा इसे पृथ्वी के सबसे नजदीक ले आएगी.
आज रात चांद का साइज हैरान करने वाला, Supermoon देखने का करेक्ट टाइम जान लें
इस 'सुपरमून' से पृथ्वी पर क्या बदलेगा?


पूर्णिमा और अमावस्या तो हम जानते ही हैं. पूर्णिमा तब जब चांद, पृथ्वी से पूरा दिखे और अमावस्या (अमावस) तब जब चांद बिल्कुल न दिखे. ऐसे चांद की पृथ्वी से दूरी और उसकी स्थिति के चलते होता है. अब दो चीजें और जान लीजिए- एपोजी (Apogee) और पेरिजी (Perigee). असल में चांद हमारी पृथ्वी के चारों तरफ एक गोलाकार रास्ते में चक्कर नहीं लगाता. इसकी कक्षा इलिप्टिकल यानी अंडाकार है. ऐसे में चांद, पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए किसी वक़्त पृथ्वी से बहुत दूर भी होता है. और किसी वक़्त बहुत नजदीक भी. चांद की कक्षा का वो पॉइंट, जहां से चांद पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, उसे पेरिजी कहते हैं. इस वक़्त चांद की पृथ्वी से दूरी करीब 3 लाख 63 हजार 104 किलोमीटर होती है.
और जब चांद पृथ्वी से सबसे दूर के पॉइंट पर होता है तो उस पॉइंट को एपोजी कहते हैं. एपोजी से पृथ्वी की दूरी लगभग 4 लाख 5 हजार किलोमीटर होती है. पेरिजी और एपोजी के बीच की दूरी होती है करीब 42 हजार किलोमीटर. और एपोजी से पेरिजी के बीच, यात्रा के दौरान चांद कई बार सुपरमून बन जाता है.
कोलकाता के MP Birla Planetarium से जुड़ी ऑफिसर शिल्पी गुप्ता, इंडिया टुडे को बताती हैं,
"जब चांद, पृथ्वी से 3 लाख 60 हजार किलोमीटर से कम दूरी पर होता है तो सामान्य चांद से काफी बड़ा दिखता है. इसे सुपरमून कहते हैं. सुपरमून असल में चांद का पूरा फेज़ है."
जब सुपरमून बनता है तो चांद का आकार सामान्य से 14 फीसद तक बड़ा और 30 फीसद तक ज्यादा चमकीला दिखता है. माने असल में चांद का आकार बढ़ता नहीं, पृथ्वी के क्षितिज (होरिजन) पर ऐसा लगता है कि चांद बड़ा है और पृथ्वी के काफी नजदीक है. 'सुपरमून' एस्ट्रोनॉमी (खगोल विज्ञान) का कोई आधिकारिक शब्द नहीं है. पहली बार, 'सुपरमून' शब्द का इस्तेमाल 1979 में हुआ था.
आम तौर पर एक साल में 3 या 4 बार सुपरमून दिखते हैं. इस साल का एक सुपरमून 1 अगस्त यानी आज देर रात से शुरू होगा. भारतीय समय के अनुसार 2 अगस्त की तारीख शुरू होते ही, 12 बजकर 2 मिनट पर सुपरमून का फुलफेज़ दिखेगा. इस वक़्त ये सबसे बड़ा होगा.
इसके बाद इसी साल 30 अगस्त को दूसरा सुपरमून दिखेगा. तब चांद पृथ्वी से सबसे कम दूरी पर होगा. एक ही महीने में दूसरा सुपरमून दिखता है तो इसे ब्लूमून कहते हैं. ये दुर्लभ घटना होती है. इससे पहले साल 2018 में ब्लूमून दिखा था. और इसके बाद साल 2037 में अलग सुपरमून दिखेगा. इसी साल सितंबर में भी एक सुपरमून दिखेगा.
मौसम, और बादल सामान्य रहे तो आज रात 12 बजे के बाद सुपरमून को भारत के लगभग हर हिस्से में देखा जा सकेगा. सुपरमून के चलते समुद्र में ज्वार तेज उठ सकते हैं, लेकिन आम जीवन और मानव शरीर पर न के बराबर प्रभाव पड़ता है.
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