स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में कुवैत के झंडे वाले टैंकर पर एक प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट जैसा हथियार) का हमला हुआ है. इस टैंकर पर 5 भारतीय नागरिक सवार थे. प्रोजेक्टाइल लगने के बाद पांचो भारतीय नागरिकों को सुरक्षित किनारे पर लाया गया. 2 अक्टूबर को ओमान के मस्कट स्थित दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी.
होर्मुज में कुवैत के टैंकर पर हमला, ओमान की मदद से जहाज पर सवार सभी 5 भारतीय बचे
Strait of Hormuz में कुवैत के झंडे वाले MT Kazimah III कमर्शियल टैंकर पर हमला हुआ. जहाज पर पांच भारतीय नागरिक सवार थे. हमले के बाद सभी पांचों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित किनारे पर पहुंचा दिया गया.

भारत के दूतावास ने बताया कि टैंकर का नाम MT काजिमाह III (MT Kazimah III) था. 3 अक्टूबर को पोस्ट में दूतावास ने कहा,
आज सुबह, मिशन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में प्रोजेक्टाइल की चपेट में आए कुवैत के झंडे वाले टैंकर MT काजिमाह III पर सवार पांच भारतीय नागरिकों को बचाने के काम में मदद की. सभी 5 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित किनारे पर पहुंचा दिया गया है. हम ओमान के अधिकारियों को उनके लगातार सहयोग और मदद के लिए धन्यवाद देते हैं.

वेस्ट एशिया में चल रही जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ओमान की खाड़ी, लाल सागर, अदन की खाड़ी, बाब-अल-मंडेब और ब्लैक सी सहित कई इलाकों में कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए. कई नाविकों की मौत हुई. जबकि उन नाविकों का इस जंग से कोई वास्ता नहीं था. इन इलाकों से गुजरने वाले भारतीय और विदेशी झंडे वाले कमर्शियल जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं.

29 सितंबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने वीकली मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) रीजन में अभी 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं. इनमें 12 एक्टिव कार्गो जहाजों पर 163 भारतीय नागरिक शामिल हैं, जो होर्मुज के पास हैं.
बीते महीने, भारत ने नाविकों को निशाना बनाए जाने पर चिंता व्यक्त की थी. भारत ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में उठाया था. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि लगातार जारी तनाव और हमलों को लेकर भारत बहुत चिंतित हैं.
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न सिर्फ नाविक, बल्कि वेस्ट एशिया के कई देशों में भी लाखों भारतीय काम करते हैं. ऐसे में न सिर्फ भारत की ऊर्जा जरूरतें, बल्कि वहां मौजूद उसके नागरिक, चाहे वो नाविक हों या कामगार, सब पर खतरा बना हुआ है. खतरा इसलिए भी बढ़ा है, क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग में खाड़ी देशों पर भी हमले हुए.
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