The Lallantop

कहानी ममी वाले देश मिस्र की, जहां पीएम मोदी को सबसे बड़ा सम्मान दिया गया

इस ज़मीन पर इंसानों की बसाहट लगभग 08 हज़ार बरस पहले शुरू हुई थी.

Advertisement
post-main-image
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी से मिले PM मोदी. (तस्वीर: Twitter/NarendraModi)

मोदी फिलहाल मिस्र के दौरे पर गए हुए है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी ने PM मोदी को अपने देश के सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ़ द नाइल से भी नवाज़ा. PM मोदी अपने दौरे के दूसरे दिन मिस्र की ऐतिहासिक मस्जिद अल हकीम गए. चलिए आपको बताते है जहां मोदी पहुंचे उस देश की कहानी क्या है, इतिहास क्या है. 

Advertisement

इस ज़मीन पर इंसानों की बसाहट लगभग 08 हज़ार बरस पहले शुरू हुई थी. नील नदी के किनारे पर. नील दुनिया की सबसे लंबी नदी है. शुरुआती दौर में लोगों ने शिकार और मछलियों के सहारे जीवनयापन करते थे. फिर उन्होंने खेती सीखी, जंगली जानवरों को पालतू बनाया और घर बनाने लगे. इस तरह उनका क़स्बा तैयार हुआ. इसके बाद उन्होंने नाव चलाना सीखा. दूर-दूर तक व्यापार करने गए. तीन हज़ार ईसा पूर्व तक नील नदी के तट पर अच्छी-खासी सभ्यता विकसित हो चुकी थी. 

उसी दौर में मिस्र पर ताक़तवर राजाओं का शासन शुरू हुआ. इन्हें फ़ैरो कहा जाता था. इन राजाओं ने विशाल पिरामिड बनाए, मंदिरों का निर्माण कराया और पड़ोसी इलाकों पर क़ब्ज़ा भी किया. एक हज़ार ईसापूर्व के आसपास फैरो का साम्राज्य बिखरने लगा. 31 ईसापूर्व में मिस्र पर रोमन्स ने कंट्रोल कर लिया.सातवीं सदी में इस्लाम का उदय हुआ. इस्लाम की धारा मिस्र में भी पहुंची. उन्होंने काहिरा की स्थापना की. कालांतर में ये शहर मिस्र की राजधानी बना.

Advertisement
PM मोदी मिस्र की अल-हकीम मस्जिद पहुंचे (तस्वीर: Twitter/NarendraModi)

 

16वीं सदी में मिस्र, तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा बन गया. 18वीं सदी में यूरोप की नज़र पड़ी. 1882 में ब्रिटेन ने मिस्र पर क़ब्ज़ा कर लिया. इसके साथ ही उन्हें स्वेज़ नहर का नियंत्रण भी मिल गया. ये नहर भूमध्यसागर को लाल सागर से जोड़ती है. इससे यूरोप और एशिया के बीच की दूरी कम हो गई.

1952 में मिस्र आज़ाद हो गया. 1954 में गमाल अब्देल नासेर मिस्र के दूसरे राष्ट्रपति बने. 1956 में उनके आदेश पर मिस्र की सेना ने स्वेज़ नहर पर क़ब्ज़ा कर लिया. इसके ख़िलाफ़ ब्रिटेन, फ़्रांस और इज़रायल ने हमला कर दिया. मगर वे फिर से कंट्रोल लेने में नाकाम रहे. इस घटना को स्वेज़ संकट के नाम से जाना जाता है. इसने ब्रिटेन की बची-खुची ताक़त भी खत्म कर दी. (स्वेज़ क्राइसिस के बारे में हमने ऐतिहासिक कहानियों वाले शो तारीख़ में विस्तार से बात की है. लिंक डिस्क्रिप्शन में मिलेगा.)
खैर, स्वेज़ क्राइसिस के बाद नासेर का रुतबा बढ़ गया. उनका शासन 1970 तक चला. नासेर की मौत के बाद अनवर सादात मिस्र के राष्ट्रपति बने.
1981 में सादात की हत्या हो गई. फिर होस्नी मुबारक राष्ट्रपति बने. मुबारक ने हंटर के दम पर सरकार चलाई. 2011 की अरब क्रांति के बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा.
फिर मुस्लिम ब्रदरहुड के मोहम्मद मोर्सी सत्ता में आए. मगर उनका भी तख़्तापलट हो गया. तब से अब्देल फ़तह अल-सीसी मिस्र के राष्ट्रपति बने हुए हैं. वे सेना में जनरल रह चुके हैं. आधिकारिक तौर पर मिस्र एक लोकतांत्रिक गणराज्य है. लेकिन शासन में सेना का दखल हमेशा बना रहता है.
सबसे ज़्यादा ताक़तवर राष्ट्रपति हैं. राष्ट्र के साथ-साथ सेना की कमान भी उन्हीं के हाथों में होती है.

Advertisement

वीडियो: अमेरिकी संसद में आतंकवाद पर प्रधानमंत्री मोदी ने खरी-खरी सुना दी

Advertisement