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नेपाल सरकार का यू-टर्न, रेस्क्यू में दुनिया की मदद कबूल; भारत और चीन की टीमें पहुंच भी गईं

Nepal Flash Floods: नेपाल सरकार ने टनल रेस्क्यू, DNA टेस्टिंग और फॉरेंसिक जांच के लिए कुछ विदेशी टीमों को नेपाल आने की इजाज़त दे दी है. इसमें भी केवल भारत, चीन, साउथ कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को मदद भेजने की मंजूरी मिली है.

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नेपाल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए भारत तैयार. (फोटो- X/@DrSJaishankar)

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  • नेपाल सरकार ने विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीम की मदद लेने से पहले इनकार किया था, लेकिन बाद में टनल रेस्क्यू, DNA टेस्टिंग और फॉरेंसिक जांच के लिए विदेशी टीमों को अनुमति दे दी है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव और विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेपाल सरकार ने विदेशी टीमों को सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल होने की अनुमति दी।
  • भारत, चीन सहित विदेशी टीमें नेपाल पहुंच चुकी हैं और ये टीमें विशेष रूप से रासुवा और नुवाकोट जिलों के हाइड्रोपावर टनलों में फंसे लोगों को बचाने के लिए कार्य कर रही हैं।

नेपाल सरकार ने विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीम की मदद लेने से इनकार करने का फैसला वापस ले लिया है. सरकार ने पहले कहा था कि बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए नेपाल की रेस्क्यू टीम काफी है. ये फैसला एक दिन भी नहीं टिक सका. अब नेपाल ने टनल रेस्क्यू, DNA टेस्टिंग और फॉरेंसिक जांच के लिए विदेशी टीमों को आने की इजाजत दे दी है. भारत और चीन की टीमें नेपाल पहुंच भी चुकी हैं.

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नेपाल सरकार ने मंजूरी क्यों दी?

नेपाल के एक सीनियर अधिकारी ने नेपाली अखबार द काठमांडू पोस्ट को बताया कि अंतरराष्ट्रीय कम्युनिटी की तरफ से गुज़ारिश की गई. अधिकारी ने बताया कि कई देशों ने नेपाल पर दबाव डाला कि कम से कम उनकी सर्च एंड रेस्क्यू टीम को आने की इजाज़त दी जाए क्योंकि उनके नागरिक भी वहां फंसे हैं. इसलिए सरकार ने कुछ फील्ड एक्सपर्ट को आने की इजाज़त दे दी.

इसी बात पर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल का कहना है कि नेपाल में कुछ फील्ड एक्सपर्ट की ज़रूरत है, जहां कमी है. लेकिन सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाल खुद काबिल है. अचानक आई बाढ़ ने भोटकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे इलाकों को तबाह कर दिया, जिसमें अब तक 626 लोगों की मौत चुकी है. नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2426 लोग अभी भी लापता हैं. 

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नेपाल पर्यटन बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार, लापता विदेशियों की संख्या में सबसे ज्यादा 288 भारतीय नागरिक हैं. इसके बाद 100 चीनी, 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिक हैं. बताया गया कि विदेश से आ रही टीम रासुवा और नुवाकोट जिले के हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों को रेस्क्यू करेंगे. 

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भारत मदद के लिए आगे आया

नेपाल सरकार भारत, चीन, साउथ कोरिया और ऑस्ट्रेलिया से मदद लेने के लिए तैयार है. इन देशों से कुछ टेक्नीशियन और एक्सपर्ट नेपाल जाएंगे और लोगों की मदद करेंगे. कुछ और देशों ने भी स्पेशल राहत टीम भेजने की बात कही थी. मगर नेपाल ने साफ इनकार कर दिया है. 

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भारत ने पहले ही खुले तौर पर नेपाल को सपोर्ट भेजने की बात की थी. इसमें टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए टीम, मेडिकल टीम और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीम को भेजने की बात थी. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुद नेपाली विदेश विदेश मंत्री शिशिर खनल से बात की थी.

मंजूरी मिलने के बाद भारत ने अब केवल 11 सदस्यीय टीम नेपाल भेजी है. इसके अलावा 10 टन मानवीय सहायता सामग्री भेजी गई जिसमें खाने के पैकेट, पानी साफ करने की गोलियां और सेफ्टी किट शामिल है. 

चीन की रेस्क्यू टीम को क्या मिला?

चीन की 21 सदस्यीय रेस्क्यू टीम ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर पहुंच चुकी है, जहां उन्हें केवल मलबा और मिट्टी का सैलाब दिखा. ग्यिरोंग बॉर्डर नेपाल और तिब्बत को जोड़ता है. यहां एक इमीग्रेशन सेंटर भी है जिसके बाढ़ में तबाह होने का CCTV फुटेज वायरल हो गया.

बाढ़ से पहले इमिग्रेशन सेंटर पर कई भारतीय श्रद्धालु मौजूद थे. तिब्बत में कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा जाने के लिए श्रद्धालुओं को यहां से होकर गुज़रना पड़ता है. श्रद्धालुओं में सदगुरु ईशा फाउंडेशन के 80 सदस्य भी यहां मौजूद थे. लेकिन रेस्क्यू टीम को यहां मलबे और मिट्टी के सिवा कुछ भी नहीं मिला.  

वीडियो: नेपाल में अचानक बाढ़ से अब तक 450 मौते, अस्पतालों में शव रखने की जगह नहीं

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