
ये एक दुर्लभ किस्म का संक्रमण है. इसमें इंसान के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा प्रतिक्रिया करने लगती है. इसमें दवाई या फिर किसी भी तरह के मामूली इंफेक्शन के कारण इम्यूनिटी ओवर-रिऐक्ट करती है (फोटो: real life)
स्टीवन्स और जॉनसन नाम के दो डॉक्टरों ने इसका पता लगाया था स्टीवन्स-जॉनसन सिंड्रोम. जिसे ये संक्रमण होता है, उसे देखकर ऐसा लगता है मानो किसी ने उसके शरीर को जला दिया हो. सबसे डरावनी बात. ये सब एकाएक होता है. बड़ी तेजी से होता है. स्टीवन्स और जॉनसन नाम के दो डॉक्टरों ने इस इंफेक्शन का पता लगाया था. उनके ही नाम पर इस सिंड्रोम का नाम रखा गया है.

इस संक्रमण का सबसे ज्यादा असर पड़ता है शरीर की त्वचा और आंखों पर (फोटो: real life)
इसमें शरीर की त्वचा पर फफोले हो जाते हैं. खाल छिलके की तरह उतरने लगती है. आंखों की सतह भी बाहर आने लगती है. मुंह और गले में भी फफोले हो जाते हैं.

फीनिक्स एक स्वस्थ बच्ची थी. उसे एकाएक ये इंफेक्शन हुआ और फिर तेजी से उसकी हालत बिगड़ती चली गई (फोटो: real life)
अक्सर वायरल या फ्लू जैसे मामूली संक्रमण से होता है ये इंफेक्शन स्टीवन्स-जॉनसन सिंड्रोम एक दुर्लभ किस्म की एलर्जी है. इसमें त्वचा, आंख और श्लेषमा झिल्ली पर अटैक होता है. ज्यादातर तो ये किसी दवा के रिऐक्शन से होता है. फीनिक्स को कैसे हुआ, ये अभी मालूम नहीं चला है. आसार तो ये ही लगते हैं कि किसी तरह के संक्रमण के कारण फीनिक्स को ये सिंड्रोम हुआ. इस इंफेक्शन में कोशिकाओं की वो नर्म परत, जो कि पाचन तंत्र के साथ मुंह से लेकर गुदा द्वार तक फैली होती है, प्रभावित होती है. साथ ही, प्रजनन अंग भी प्रभावित होते हैं.

फीनिक्स और उसकी मां निकोल, दोनों ने अपनी कलाई पर ये 'ब्रेव' का टैटू कराया है (फोटो: real life)
छिलके की तरह खाल उतरने लगती है इस साल 7 जनवरी तक सब ठीक था. फीनिक्स अपने परिवार के साथ थी. 9 साल के बच्चे अमूमन जैसा करते हैं, वही सब कर रही थी. अगली सुबह जब वो सोकर उठी, तो गला बैठा हुआ था. संक्रमण ने असर दिखाना शुरू किया. फीनिक्स के शरीर की त्वचा फूलने लगी. तेज बुखार हो गया. फीनिक्स की मां निकोल को अपनी बेटी के शरीर में बदलाव नजर आ रहा था. उसे ICU में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने एक तरह से जवाब दे दिया. बोले, हालत बहुत खराब है. शायद बच नहीं पाएगी. डॉक्टरों को समझ ही नहीं आ रहा था कि फीनिक्स को हुआ क्या है. वो उसके शरीर की जांच करते रहे. इधर फीनिक्स का हाल बुरा था. उसकी चमड़ी उखड़कर बाहर निकलने लगी थी.

जिस दिन फीनिक्स को ये जानलेवा इंफेक्शन हुआ था, उसके ठीक एक दिन पहले उसने पूरे परिवार के साथ ये तस्वीर खिंचाई थी (फोटो: real life)
संक्रमण का पता बहुत देर से चला फिर 10 जनवरी आई. फीनिक्स को हेलिकॉप्टर की मदद से ऐल्बैमा अस्पताल भेजा गया. वहां एक त्वचा रोग विशेषज्ञ ने आखिरकार फीनिक्स की परेशानी का पता लगा लिया. वही, स्टीवन्स-जॉनसन सिंड्रोम. एक हफ्ते बाद फीनिक्स को खास इलाज के लिए ओहियो भेज दिया गया. डॉक्टर उसके शरीर से संक्रमण निकालने की कोशिश करते रहे. जो लोग मिलने आते, फीनिक्स को पहचान भी नहीं पाते. उसका शरीर इतना फूल गया था. उसकी खाल मानो बूंद-बूंद बह रही थी. डॉक्टर बहुत संभलकर कदम आगे बढ़ा रहे हैं. नतीजा दिखने भी लगा है. फीनिक्स की त्वचा वापस आने लगी है.

अस्पताल में अपनी छोटी बहन के साथ फीनिक्स (फोटो: real life)
स्कूल जाने लगी है फीनिक्स, लेकिन पूरी तरह से ठीक होने में वक्त लगेगा डॉक्टर ने उसकी आंखों की रोशनी बचाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की. उसकी बाईं आंख को सिल दिया गया. ताकि संक्रमण न हो. उसकी दाहिनी आंख में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया. फीनिक्स स्कूल जाने लगी है. पूरी तरह से ठीक होने में समय लगेगा पर. इलाज अभी बाकी है. इतने लंबे इलाज के कारण फीनिक्स के परिवार की आर्थिक स्थिति डंवाडोल हो गई है. वो फीनिक्स के इलाज के लिए क्राउडफंडिंग कर रहे हैं. इस परिवार को पैसे और हिम्मत की सख्त जरूरत है. पैसा क्राउडफंडिंग से मिल रहा है. जहां तक बात है हिम्मत की, तो फीनिक्स और उसके परिवार के पास ये भरपूर है.

फीनिक्स ने दोबारा स्कूल जाना शुरू कर दिया है. फिलहाल उसका इलाज भी जारी है. पूरी तरह से ठीक होने में अभी उसे समय लगेगी (फोटो: real life)
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