लकड़ी का कंप्यूटर
पहला मैक कंप्यूटर स्टीव के गैराज में बना था. लकड़ी की बॉडी में इसकी मशीन फिट की गई थी. स्टीव प्रोग्रामर या इंजीनियर नहीं थे. मगर डिज़ाइन की गहरी समझ रखते थे. स्टीव का कहना था कि एक खूबसूरत डिज़ाइन उन्हें स्तब्ध कर देती है. एपल ने ही कंप्यूटर में अलग-अलग फॉन्ट्स का इस्तेमाल शुरू किया.
Source- ilmessaggero
लैंडलाइन वाला आई फोन
पहला आईफोन 2006 में नहीं 1983 में आया था. ये एक लैंडलाइन फोन था जिसमें स्टायलस वाली टच स्क्रीन थी. उस समय इस डिज़ाइन को समय से बहुत आगे माना गया. क्योंकि तब ईमेल और इंटरनेट शुरुआती स्टेज में ही था. वैसे ये प्रोडक्ट कभी मार्केट में नहीं आया. ये समझो कि दिखा के छोड़ दिया.
पहला मोबाइल वाला आई फोन
पहला आई फोन एपल ने नहीं मोटोरोला ने लॉन्च किया था. मोटो रॉकर नाम का ये मोबाइल पहली ऐसी डिवाइस थी जिसमें आइट्यून्स का फीचर था. उस दौर में लोगों को ये फीचर कुछ ज़्यादा समझ नहीं आया. तो ये प्रयोग कुछ खास नहीं चला. बाद में एपल ने जब अपने फोन खुद बनाना शुरू किए तो दुनिया में तहलका मच गया.कलाई पर कंंप्यूटर
ये कॉन्सेप्ट 1991 में आया. इसकी तस्वीरें जापान की एक्सिस मैगज़ीन में छपी थीं. कुछ लोग कहते हैं कि ये एपल के तब के सीईओ का एक मज़ाक भर था. क्योंकि ये प्रोडक्ट भी वो बाज़ार में नहीं लाए. वैसे इसे आज की एपल आई वॉच का पूर्वज मान सकते हैं.
दो स्क्रीन वाला कंप्यूटर
ये भी 90 के दशक में चर्चा में आया. पर सीरियसली, दो स्क्रीन वाला कंप्यूटर, सच में. आखिर क्यों भाई?
स्टीव ने फिल्में भी बनाई हैं.
स्टीव जॉब्स को 1985 में उनकी खुद की ही कंपनी से निकाल दिया गया था. 1997 में उन्होंने वापस एपल जॉइन कर ली थी. मगर इससे पहले 1986 में एक और कंपनी शुरू की पिक्सार. 44 लोगों की इस कंपनी ने थ्री डी एनीमेशन बनाना शुरू किया और 1996 में डिज़नी के साथ मिलकर पिक्सार मे दुनिया की कुछ सबसे हिट ऐनीमेशन फिल्म्स बनाई हैं. पिक्सार की बनाई फिल्मों में 'टॉय स्टोरी', 'द बग्स लाइफ', 'फाइंडिंग नीमो' और 'मॉन्स्टर इंक' जैसी फिल्में शामिल हैं.
फोटो- पिक्सार स्टूडियो
ग्रैमी जीत चुके हैं स्टीव जॉब्स
ग्रैमी अवॉर्ड्स संगीत के लिए दिए जाते हैं. स्टीव जॉब्स ने आई ट्यून और आई पॉड के ज़रिए संगीत की दुनिया को बदल कर रख दिया. आई ट्यून स्टोर ने देखते ही देखते दुकान पर जाकर सीडी, कैसेट खरीदने के दिनों को इतिहास बना दिया. लोग सीधे डाउनलोड करने लगे. स्टीव को मरने के बाद संगीत में इस योगदान के लिए ग्रैमी अवॉर्ड दिया गया.
एपल के लॉन्च पर स्टीव जॉब्स
आखिर क्यों है एपल कंप्यूटर्स और स्टीव जॉब्स खास
एपल की दीवानगी पर तमाम चुटकुले बनते हैं. तमाम बहस होती हैं. मगर स्टीव जॉब्स ने एपल के ज़रिए दुनिया को एक नई सोच दी. इससे पहले धारणा थी कि जितनी हाई-फाई टेक्नॉलजी उतने ज़्यादा बटन. नोकिया कम्युनिकेटर और ओटू के फोन याद करिए. हर कोने में एक अलग बटन. लोग देखकर ही डर जाएं. स्टीव ने कहा कि सबसे अच्छी टेक्नॉलजी वो है जिसमें कोई बटन ही न दबाना पड़े. आज भी दुनिया के सारे टच स्क्रीन फोन के पीछे स्टीव का ही मूल डिज़ाइन काम कर रहा है. सामने एक बटन, साइड में आवाज़ के कंट्रोल और पीछे कैमरा. मोबाइल में मेगापिक्सल कितने भी बढ़ गए हों हम तकनीक के मामले में स्टीव जॉब्स की सोच के बाद अगला मुकाम नहीं छू पाए हैं.सुनिए उनके सबसे प्रसिद्ध और मोटिवेश्नल भाषणों में से एक, जिसमें वो अपने कैंसर और उससे लड़ने की बात कर रहे हैं.
https://www.youtube.com/watch?v=D1R-jKKp3NA
ये आर्टिकल अनिमेष ने लिखा है.















