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क्या शिवराज सिंह चौहान ने पत्नी को स्कूटी पर बिठाकर सरकारी बंगला खाली किया?

कहा जा रहा है कि शिवराज ने हारते ही बंगला छोड़ दिया और एक फूल तक तोड़कर नहीं ले गए. जानिए सच्चाई...

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सोशल मीडिया पर बीजेपी सपोर्टर्स के ये तस्वीर खूब शेयर हो रही है. लोग दावा कर रहे हैं कि शिवराज सिंह चौहान ने बड़ी सादगी से मुख्यमंत्री बंगला खाली कर दिया. स्कूटी की पिछली सीट पर पत्नी साधना सिंह को बिठाया और निकल गए (फोटो: सोशल मीडिया)
क्या शिवराज सिंह चौहान ने हार के एक-दो दिन बाद ही मुख्यमंत्री आवास खाली कर दिया? क्या वो स्कूटी पर बैठकर सरकारी बंगले से निकल गए? क्या अपनी पत्नी को स्कूटी की पिछली सीट पर साथ बिठाकर उन्होंने सरकारी घर से रुख़सती ले ली?
11 दिसंबर, 2018 को पांच विधानसभा चुनावों का रिज़ल्ट आया. इनमें से एक राज्य मध्य प्रदेश भी था. वहां सत्ता बदल गई. बीजेपी हार गई, कांग्रेस जीत गई. हार के साथ बहुत सारी चीजें होती हैं. एक ये भी चीज होती है कि मुख्यमंत्री को CM वाला बंगला खाली करना होता है. कई सारे मुख्यमंत्री कई-कई दिनों तक सरकारी बंगला खाली नहीं करते. मगर सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट के अंदर शिवराज की नज़ीर दी जा रही है. पोस्ट लिखने और शेयर करने वालों का दावा है कि शिवराज इतने आम, इतनी सादगी से भरे हैं कि स्कूटी पर बैठकर बंगले से निकल गए.
क्या है इस वायरल पोस्ट में? एक फोटो है. इसमें दिख रहे हैं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान. जिन्होंने ताज़ा-ताज़ा सत्ता गंवाई है. इस तस्वीर में शिवराज एक स्कूटी पर बैठे हैं. पीछे वाली सीट पर उनकी पत्नी साधना सिंह बैठी हैं. बगल में शिवराज के बेटे कार्तिकेय हाथ बांधे खड़े हैं. कार्तिकेय के सिर पर लाल टीका है. लाल टीका शिवराज के माथे पर भी है. स्कूटी के सामने की तरफ सिंदूर से स्वास्तिक का निशान बना हुआ है. स्कूटी के गले में गेंदे के फूलों की बनी माला भी है. स्कूटी के पीछे एक दीवार दिख रही है. जैसे बाउंड्री वॉल होती है. पेड़-पौधे भी लगे दिख रहे हैं. इस फोटो के साथ कई तरह के मेसेज चल रहे हैं. एक सैंपल मेसेज देखिए-
टोंटी चोर, बंगले में तोड़-फोड़ करने वालों देख लो. 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे मामा शिवराज सिंह अपनी पत्नी के साथ सरकारी आवास से विदा लेते हुए. सादगी की मिसाल जन-जन के प्रिय शिवराज.
इस पेज का नाम देखिए-
इस पेज का नाम देखिए- मिशन मोदी 2019. यहां इस पोस्ट को छह हज़ार लोग लाइक कर चुके हैं. 1,100 से ज़्यादा शेयर हैं इसपर.

 
इस पेज का भी नाम
इस पेज का भी नाम देखिए- बीजेपी सोशल मीडिया. ऑफिशली बीजेपी का न भी हो, मगर उसके समर्थकों का तो है ही.

 
इस पेज का भी नाम देखिए.
ये पेज भी देखिए. नाम है- 100 करोड़ राष्ट्रवादी हिंदुओं का ग्रुप. नीचे कमेंट करने वाले लोग भी पूरे जोश से जयकारा लगा रहे हैं. पार्टी की, नेता की जय-जयकार कर रहे हैं.

इसी नेचर का एक और पोस्ट घूम रहा है इसी मेसेज से मिलता-जुलता एक और पोस्ट भी वायरल हो रहा है. इसमें दो फ्रेम हैं. दाहिनी तरफ हैं अखिलेश यादव. दाहिनी ओर हैं शिवराज सिंह चौहान. अखिलेश की फोटो के नीचे लिखा है कि उन्होंने सरकारी बंगले में जमकर तोड़-फोड़ की. जबकि शिवराज ने हार के बाद तुरंत ही सरकारी बंगला छोड़ा. ये बात बताकर लिखा गया है कि दोनों के बर्ताव से दोनों के बीच का अंतर साफ है.
 
ये भी इसी टाइप का पोस्ट है. इसमें शिवर
ये भी इसी टाइप का पोस्ट है. इसमें शिवराज के कथित तौर पर बंगला छोड़ने की तुलना अखिलेश यादव के साथ की गई है. अखिलेश ने जब उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री का बंगला खाली किया, तो टाइल्स उखड़ी हुई थीं. इसे लेकर कई तरह की बातें कही गईं.

सच्चाई क्या है? सच ये है कि 17 दिसंबर को ये पड़ताल किए जाने के वक़्त तक शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री का बंगला खाली ही नहीं किया है. हमने भोपाल में इंडिया टुडे के ब्यूरो चीफ हेमेंद्र शर्मा से इस बारे में पूछा. उन्होंने बताया कि प्रक्रिया चल रही है. मगर बंगला अभी खाली नहीं किया गया है. बंगला खाली नहीं किया है, इस एक लाइन पर सारी बातें खत्म हो जाती हैं. जब बंगला खाली नहीं किया, तो स्कूटी पर गए, फूल-पत्ती नहीं तोड़ी टाइप्स की चीजें बेमानी हो जाती हैं.
पढ़ें: अखिलेश यादव के बंगले में क्या छिपा था, जिससे ध्यान भटकाने के लिए खुदाई हुई!

जहां तक तस्वीर की बात है, तो जिस तरह स्कूटी के ऊपर माला डली है और स्वस्तिक बना है, उससे लगता है कि ये नई स्कूटी है. आमतौर पर कोई गाड़ी खरीदने पर ऐसे ही उसे माला चढ़ाई जाती है. टीका लगाया जाता है, स्वस्तिक बनाया जाता है. तो इससे लगता है कि नई स्कूटी के घर आने पर ये तस्वीर ली गई होगी. हमें ये पता है कि काइनेटिक ब्लेज़ नाम की इस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन किन्हीं मोहर सिंह के नाम से है. बाइक का रजिस्ट्रेशन 2008 का है, इस लिहाज से अगर बाइक पर चढ़ी फूलमाला को उसके खरीदने पर चढ़ाया मानें, तो फोटो पुरानी लगती है. वैसे मध्य प्रदेश में शक्ति पूजा और दीवाली पर भी गाड़ियों की पूजा करने की परंपरा है. वैसे ही जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश की तरफ विश्वकर्मा पूजा पर लोग गाड़ियों पर टीका लगाते हैं और फूल चढ़ाते हैं. तो ये भी हो सकता है कि ये तस्वीर ऐसे किसी मौके पर ली गई हो.
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खैर स्कूटी के रजिस्ट्रेशन पर जो पता लिखा है वो है- B8, 74 बंगला. ये शिवराज सिंह चौहान के नाम ही अलॉट है. उनके पास मुख्यमंत्री रहते हुए दो बंगले थे. बतौर मुख्यमंत्री वो श्यामला हिल्स वाले बंगले में रहते थे. B8, 74 वाले बंगले को लेकर एक छोटा रोचक किस्सा आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

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कुल मिलाकर कहें, तो ये पॉलिटिकल फर्जी पोस्ट है, जो बीजेपी से जुड़े पेजों और पार्टी समर्थकों के बीच काफी शेयर हो रही है. ये और कुछ नहीं, शिवराज का महिमामंडन है. हो सकता है कि वो वाकई बंगला खाली करते वक्त फूल तक तोड़कर न ले जाएं. हो सकता है कि वो बाइक के बजाय, साइकल या पैदल जाएं, लेकिन वो बाद की बात है. उसके लिए पहले उनको बंगला तो खाली कर लेने दीजिए.


अखिलेश यादव के बंगले में क्या छिपा था, जिससे ध्यान भटकाने के लिए खुदाई हुई!

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