स्कूल वाले बच्चों की शिकायत तो अक्सर उनके घर भेजते रहते हैं. फर्ज कीजिए कि किसी दिन बच्चे के स्कूल से एक करोड़ का नोटिस घर आ जाए. सोचिए क्या बीतेगी? आगरा में एक आठवीं क्लास के बच्चे को उसके स्कूल ने एक करोड़ रुपये देने का नोटिस थमा दिया है. शहजान नाम के बच्चे को फेल कर उसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट पकड़ा दिया. दरअसल शहजान के पापा ने एक वकील के जरिए नोटिस भेजकर बच्चे को फेल करने की वजह पूछी थी. इसी बात से खफा होकर स्कूल ने मानहानि के लिए 1 करोड़ का नोटिस भेज दिया.
आगरा में एक मोटर मेकैनिक सागिर आहमद का 14 साल का बेटा शहज़ान सेंट फ्रांसिस स्कूल में पढ़ता है. उसे एग्जाम में फेल कर दिया गया. सागिर ने स्कूल वालों से शहनाज़ के फाइनल एग्जाम के नंबर दिखाने को कहा. पर, उसे नंबर नहीं दिखाए गए.
उसने HRD मिनिस्ट्री के 'कॉन्टिन्यूअस और कॉम्प्रिहेन्सिव रूल' का हवाला दिया. इस रूल के हिसाब से पहली क्लास से 8वीं क्लास तक के बच्चे को फेल नहीं कर सकते हैं. तब स्कूल ने बच्चे को प्रमोट करने की बात कह दी थी. लेकिन, उसके बाद बार-बार रिक्वेस्ट करने पर भी स्कूल ने कोई रेस्पॉन्स नहीं दिया. सागिर ने आगरा के ज्वाइंट डायरेक्टर एजुकेशन से शिकायत की. स्कूल को नोटिस भेजा गया. लेकिन स्कूल ने कोई जवाब नहीं दिया. 18 अप्रैल को सागिर ने एक वकील से स्कूल को नोटिस भेजा. स्कूल की तरफ से नोटिस का भी जवाब नहीं आया. 28 अप्रैल को नोटिस का रिमाइंडर भेजा. बदले में स्कूल वालों ने सागिर के वकील को ही जवाब दे दिया कि माइनॉरिटी स्कूल होने के कारण वो राइट टू एजुकेशन के दायरे में नहीं आता है. नोटिस के साथ ही झूठा आरोप लगाने के लिए 1 बच्चे को करोड़ रुपये देने के लिए कहा है. उसे ये रकम 15 दिन में देनी है.
सागिर का आरोप है कि एक बार बच्चों से 300 रुपए कलेक्ट किए जा रहे थे. सागिर ने सवाल उठा दिए थे कि किस बात के पैसे लिए जा रहे हैं. तब से स्कूल वाले उससे चिढ़े हुए थे. वो आपना सबकुछ बेच दें तब भी एक करोड़ रुपए नहीं जमा हो पाएंगे.
डीएम ने इस बात की सिटी मजिस्ट्रेट को चांच के आदेश दे दिए हैं. स्कूल वालों का कहना है कि सागिर ने जो नेटिस भेजा था उसमें कहा था कि स्कूल वाले गलत तरीके से पैसे लेते हैं. स्कूल की नीयत के अगेन्स्ट कुछ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसलिए इतनी बड़ी रकम का जुर्माना लगाया है.
(ये स्टोरी दी लल्लनटॉप के साथ कर रही आकांक्षा ने लिखी है.)