केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके ही मंत्रालय से करीब 1 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिली है. जिस ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड’ ने यह तिजोरी खोली है, भागीरथ चौधरी खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिस योजना का लाभ उठाने के लिए आम आदमी दफ्तरों के चक्कर काटता रहता है, उस योजना के तहत 50% सब्सिडी की ‘कृपा’ मंत्रीजी पर कैसे बरस गई?
केंद्रीय मंत्री को अपने ही विभाग से 1 करोड़ की सब्सिडी मिली, बोले, 'कुछ छिपाकर थोड़े किया'
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) से करीब 1 करोड़ की सब्सिडी मिली है. NHB ने 2025 में ऐसे करीब 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी. केंद्रीय मंत्री का प्रोजेक्ट भी उसी में शामिल है.


केंद्र सरकार ने 2014-15 में चुनिंदा सब्जियों और फूलों की ‘कमर्शियल फार्मिंग’ को बढ़ावा देने के लिए एक स्कीम लॉन्च की थी. यह स्कीम 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर' (MIDH) के तहत आती है. इसे 'नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड' (NHB) चलाता है, जो भागीरथ चौधरी के मंत्रालय के नियंत्रण में एक स्वायत्त (ऑटोनॉमस) संस्था है. खुद भागीरथ चौधरी इस बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं.
50% तक मिल सकती है सब्सिडी
इस स्कीम के तहत शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर, और गुलाब, एंथुरियम और ऑर्किड समेत 8 तरह के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट की अधिकतम 50 फीसदी सब्सिडी दी जाती है, जो हर परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये तक हो सकती है. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े हरिकिशन शर्मा की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक, भागीरथ चौधरी को तीन महीने पहले इसी स्कीम के तहत 50% सब्सिडी मिली थी, जिसकी रकम 99,60,000 रुपये है. केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी का 16 हजार 592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट है. NHB ने 2025 में ऐसे करीब 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी थी. मंत्री का प्रोजेक्ट भी उसी में शामिल है.
NHB के पदेन उपाध्यक्ष हैं भागीरथ चौधरी
NHB की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, इसके कामकाज का प्रबंधन एक ‘बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स’ करता है, जिसके पदेन अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री और पदेन उपाध्यक्ष कृषि राज्य मंत्री होते हैं. वेबसाइट पर इसके पदेन उपाध्यक्ष के तौर पर ‘माननीय कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री’ का नाम दिया गया है, और इसके लिए bagirath.choudhary@sansad.nic.in/ mosafwoffice@gmail.com ईमेल पते दिए गए हैं.

इस योजना के तहत प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने में राज्य मंत्री (MoS) की कोई सीधा हाथ नहीं होता है. अंतिम मंजूरी NHB की प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी देती है, जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते हैं.
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14 दिन में मिली मंजूरी'द इंडियन एक्सप्रेस' ने राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में भागीरथ चौधरी के फार्म पर बने प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया. साइट पर लगे साइनबोर्ड पर प्रोजेक्ट की कुल लागत ‘1,99,20,000’ (1.99 करोड़ रुपये) दिखाई गई है. इसमें बताया गया है कि प्रमोटर का हिस्सा ‘49,80,000’ रुपये था और मंत्री ने HDFC बैंक से ‘1,49,40,000’ का लोन लिया था.
- भागीरथ चौधरी ने 15 अप्रैल 2025 को NHB स्कीम के तहत प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की मंजूरी के लिए आवेदन किया था.
- इस स्कीम के तहत प्रोजेक्ट को 14 दिन बाद यानी 29 अप्रैल 2025 को मंजूरी मिल गई थी.
- 11 मार्च, 2026 को प्रोजेक्ट को NHB से फाइनल मंजूरी मिल गई.
- 30 मार्च को राजस्थान के किशनगढ़ में केंद्रीय मंत्री के HDFC बैंक लोन अकाउंट में 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी जमा की गई.
मंजूरी मिलने से एक महीने पहले PMO में जमा की गई उनकी संपत्ति की जानकारी में 'पीह' में मौजूद उनके खेत का जिक्र तो है, लेकिन NHB के पेंडिंग प्रोजेक्ट का कोई जिक्र नहीं है. उनके एक सहयोगी का कहना है कि ‘इसकी जानकारी बाद में दी जाएगी.’
इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले में केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी का पक्ष जानने की कोशिश की कि क्या उन्होंने अपने पद का फायदा उठाकर सब्सिडी हासिल की है? भागीरथ के ऑफिस ने यह तो मान लिया कि उन्हें अखबार का ईमेल मिल गया है, लेकिन वे टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे. हालांकि, बाद में समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि उन्होंने कोई काम छिपकर नहीं किया है. भागीरथ चौधरी ने कहा कि वो एक किसान हैं और बचपन से खेती कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि हजारों किसान पॉलीहाउस लगाते हैं और सब्सिडी का फायदा उठाते हैं तो मैंने भी उसी के तहत सब्सिडी लिया था. मैंने 2018 में अप्लाई किया था. मैंने वहां एक बोर्ड लगाया है और अपने लिए गए सभी लोन और सब्सिडी के बारे में बताया है. मैंने कुछ नहीं छिपाया है. चौधरी ने कहा कि वो किसानों को नई तकनीक और नेचुरल फार्मिंग की ट्रेनिंग भी देते हैं. उन्होंने कोई भी काम छिपाकर थोड़ी किया?
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