बीते कई दिनों से अयोध्या का राम मंदिर सुर्खियों में है. पहले चढ़ावा चोरी का मामला, फिर ट्रस्ट के दो सदस्यों का इस्तीफा. लेकिन इन सबके बीच अब एक राजनीतिक मुद्दा भी सामने आया है. दरअसल आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल 26 जून को रामलला के दर्शन करने पहुंचे थे. दिलचस्प बात ये थी कि वहां उनका जोरदार स्वागत हुआ लेकिन ये ‘स्वागत’ और ‘स्वागत व्यवस्था’ कांग्रेस को पसंद नहीं आई. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने तो इसे 'वीआईपी भेदभाव' बता दिया.
राम मंदिर में केजरीवाल के लिए इंतजाम देख भड़के अजय राय! पूछा- 'मेरे लिए क्यों नहीं थी?'
मंदिर में कैमरा आदि ले जाना, और फोटो पोस्ट करना. ये अपने आप में दिखाता है कि मंदिर प्रशासन की ओर से अरविंद केजरीवाल को 'पूरी व्यवस्था' दी गई.


26 जून को अरविंद केजरीवाल अपने साथियों के साथ रामलला के मंदिर पहुंचे. केजरीवाल पूरे दलबल के साथ थे. मंदिर में दर्शन के बाद उन्होंने साथियों के साथ फोटो क्लिक करवाई. इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया. उन्हीं में से एक तस्वीर में केजरीवाल मंदिर के अंदर पूजा करते नजर आए. हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा करने के बाद AAP के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह के साथ केजरीवाल ने मीडिया से भी बात की. उन्होंने मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी का जिक्र करते कहा,
मैंने प्रार्थना की कि जो कोई भी इस 'महापाप' का दोषी है, उसे भगवान से कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. यह FIR सिर्फ दिखावा और धोखा है. इस मामले में आठ निचले स्तर के कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है. यह घोटाला इतने लंबे समय से चल रहा था. साफ है कि सिर्फ जूनियर कर्मचारी इतने लंबे समय तक ऐसी हरकतें नहीं कर सकते थे. इस घोटाले के तार बहुत ऊपर तक जुड़े हैं, लेकिन बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है और सारा दोष इन छोटे कर्मचारियों पर मढ़ा जा रहा है.
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कांग्रेस को पसंद नहीं आयाअरविंद केजरीवाल ने रामलला के दर्शन किए. बयान भी दिए. लेकिन कांग्रेस को ये पसंद नहीं आया. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने तो उनको मिलने वाले वीआईपी ट्रीटमेंट पर ही सवाल उठा दिए. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा,
'राम' सबके हैं, फिर भाजपा सरकार की दोहरी नीति क्यों? अयोध्या में अरविंद केजरीवाल के लिए कैमरे और विशेष छूट. लेकिन कांग्रेस के नेताओं और आम श्रद्धालुओं के लिए कड़े नियम? कुछ दिन पहले जब मैंने दर्शन किए. तब व्यवस्था अलग थी. राजनीतिक सुविधा देखकर नियम बदलने वाली भाजपा सरकार बताए कि आखिर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है?’ आस्था के केंद्र पर यह वीआईपी भेदभाव और दोहरी राजनीति बेहद निंदनीय है.

अजय राय ने बातों-बातों में ये हिंट देने की कोशिश की कि केजरीवाल और भाजपा एक पाले में हैं. उन्होंने तंज कसा कि अगर मंदिर भगवान का है तो दर्शन के लिए दोहरी नीति क्यों?
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