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चुनावी बॉन्ड का डेटा देने की जानकारी में SBI ने अहम बात छिपाई? यूनीक कोड वाला ऐंगल क्या है?

ये एफिडेविट SBI के मुख्य प्रबंध निदेशक दिनेश खारा ने दाखिल किया. SBI ने बॉन्ड के खरीदारों और बेचने वालों के नाम साझा कर दिए हैं, लेकिन कथित तौर पर यूनीक कोड पर कुछ नहीं कहा है. बताया गया है कि इस कोड की मदद से इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी काफी अहम जानकारी सामने आने की संभावना थी.

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SBI ने सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट फाइल की है जिसमें यूनीक कोड पर कुछ नहीं कहा गया है. (तस्वीर:PTI)

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इलेक्टोरल बॉन्ड का जो डेटा चुनाव आयोग को सौंपा है, उसे लेकर एक जानकारी सामने आई है. एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि SBI ने इस संबंध में जो हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया है, उसमें डेटा से जुड़े यूनीक कोड की कोई जानकारी नहीं है. बताया गया है कि इससे ये पता लगाना मुश्किल हो जाएगा कि किस शख्स या कॉर्पोरेट ने किस पार्टी के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे.

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SBI के हलफनामे में क्या है?

ये एफिडेविट SBI के मुख्य प्रबंध निदेशक दिनेश खारा ने दाखिल किया. SBI ने बॉन्ड के खरीदारों और बेचने वालों के नाम साझा कर दिए हैं, लेकिन कथित तौर पर यूनीक कोड पर कुछ नहीं कहा है. बताया गया है कि इस कोड की मदद से इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी काफी अहम जानकारी सामने आने की संभावना थी.

सुप्रीम कोर्ट को सौंपे एफिडेविट में बताया गया है कि इलेक्टोरल बॉन्ड की खरीद, बिक्री और खरीदारों के नाम सहित इससे जुड़ी सारी जानकारी 12 मार्च को चुनाव आयोग को सौंप दी गई है. यह जानकारी SBI ने एक सीलबंद लिफाफे में एक पेनड्राइव और दो पीडीएफ फाइल के जरिए चुनाव आयोग को सौंप दी है. लेकिन अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट कहती है कि प्रत्येक चुनावी बॉन्ड पर दर्ज 'यूनीक कोड’ के बारे में एफिडेविट में कुछ नहीं कहा गया है. रिपोर्ट के अनुसार, यूनीक कोड से यह पता लगाना आसान होता है कि किसने किस पार्टी को कितना चंदा दिया.

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SBI को 12 अप्रैल 2019 से 15 फरवरी 2024 तक जारी किए गए इन बॉन्ड्स की जानकारियों को दो सेट में जारी करना है. एक सेट में बॉन्ड खरीदने की तारीख, खरीदने वाले का नाम और कितने का बॉन्ड खरीदा गया, जैसी जानकारी है. वहीं, दूसरे सेट में बॉन्ड भुनाने वाली राजनीतिक पार्टियों के नाम, भुनाए जाने की तारीख और कितने का बॉन्ड भुनाया गया, ये सब जानकारी है. अब इन दोनों डेटा सेट का स्पष्ट रूप से मिलान करने पर ही पता लग सकेगा कि किसने किस पार्टी का बॉन्ड खरीदा है. रिपोर्ट के मुताबिक दोनों डेटा सेट का मिलान करने के लिए यूनीक कोड एक अहम कड़ी है. यह कोड अल्ट्रा वॉयलट लाइट में ही पढ़ा जा सकेगा. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा बॉन्ड पर ऐसा कोई निशान नहीं है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि उसका खरीददार कौन है.  

यूनीक कोड पर जुदा राय भी

वहीं, इस यूनीक कोड को लेकर कुछ अलग राय भी सामने आई हैं. दैनिक भास्कर ने पूर्व फाइनेंस सेक्रेट्री सुभाष गर्ग के हवाले से लिखा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड में यूनीक कोड जैसा कुछ नहीं होता. रिपोर्ट में बताया गया है कि बॉन्ड के कागज पर एक सीक्रेट नंबर होता है, जिसे देखा तो केवल अल्ट्रा वॉयलेट लाइट में ही जा सकता है, लेकिन यह केवल सुरक्षा के लिए होता है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि नकली इलेक्टोरल बॉन्ड चलन में न आए. इस नंबर को बॉन्ड के खरीदार या उसकी खरीद और भुनाने की तारीख से भी नहीं जोड़ा जा सकता.

यहां बता दें, जब साल 2017 में इलेक्टोरेल बॉन्ड प्रोजेक्ट की तैयारी चल रही थी तब सुभाष चंद्र गर्ग आर्थिक मामलों के सचिव थे.

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अब आगे क्या हो होगा?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ADR की तरफ से केस लड़ रहे वरिष्ठ वकील  प्रशांत भूषण ने उम्मीद जताई थी कि डेटा सेट्स में पर्याप्त सबूत दिए जाएंगे. वो उम्मीद कर रहे थे कि SBI की तरफ से यूनीक कोड की जानकारी भी साझा की जाएगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्रशांत भूषण ने फिर से SBI के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने की बात कही थी.

वीडियो: इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद SBI ने कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स जमा किए?

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