रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद और यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान को झटका लगा है. ADM प्रशासन के राजस्व न्यायालय ने जौहर ट्रस्ट की करीब 70 हेक्टेयर ज़मीन यूपी सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है. यूनिवर्सिटी के पास साढ़े बारह एकड़ से अधिक जमीन है. अब साढ़े बारह एकड़ तो यूनिवर्सिटी के पास रहेगी, लेकिन करीब 173 एकड़ जमीन (70 हेक्टेयर) राज्य सरकार के नाम दर्ज की जाएगी. इंडिया टुडे से जुड़े रामपुर के संवाददाता आमिर खान ने बताया कि इस फैसले के बाद करीब 70 हेक्टेयर जमीन अब सरकार की हो जाएगी. जौहर यूनिवर्सिटी के नाम साढ़े बारह एकड़ से अधिक जो जमीनें थीं, उनको सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है. अब SDM सदर को इस जमीन पर कब्जा लेना होगा और राजस्व अभिलेखों में इसे राज्य सरकार के नाम दर्ज कराना होगा. मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान हैं. ट्रस्ट ने शासन से 12 एकड़ से अधिक भूमि रखने की अनुमति ली थी. इसके बाद ट्रस्ट ने आसपास की जमीनें खरीदीं. आरोप है कि इस दौरान जमीनों पर अवैध कब्जे किए गए और सरकारी नियमों में फेरबदल किया गया. अब ADM प्रशासन रामपुर के राजस्व न्यायालय ने माना है कि जिन शर्तों के अधीन यूनिवर्सिटी ट्रस्ट को जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी, उनका पालन नहीं किया गया है. न्यायालय ने कहा कि शर्तों के उल्लंघन के कारण साढ़े बारह एकड़ भूमि को छोड़ जो बाकी भूमि है (करीब 70 हेक्टेयर यानी 173 एकड़) उसको राज्य सरकार के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया जाए और उस पर कब्जा प्राप्त किया जाए. इस मामले में शासकीय अधिवक्ता अजय तिवारी ने कहा कि,
"एक वाद एडीएम जेपी गुप्ता की कोर्ट में चल रहा था. उसमें आदेश हुआ है कि साढ़े बारह एकड़ लैंड को छोड़ कर बाकी 70 हेक्टेयर जमीन, राज्य सरकार में निहित कराई जाए. उप जिलाधिकारी सदर को यह भी आदेशित किया है कि वह नियमानुसार कब्जा प्राप्त करें और अभिलेखों में अंकन की कार्रवाई करें."
इस मामले में शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना ने बताया कि सपा सरकार के दौरान यूनिवर्सिटी ने चकरोड की जमीनों पर भी कब्जा किया था. नदी की जमीन पर भी कब्जा किया था. उन्होंने कहा,
"2005 में जब सरकार ने जौहर ट्रस्ट को साढ़े बारह एकड़ से अधिक जमीनें खरीदने की अनुमति दी थी तब कुछ शर्तें भी लगाई थीं. ट्रस्ट को चैरिटी का काम करना था लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया. डीएम ने जब डिटेल मांगी तब ट्रस्ट की ओर से समय मांगा गया. हर बार यही हो रहा था."
2006 में इस यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया गया था और 2012 में इसका उद्घाटन हुआ था. 2017 में सरकार बदलने के बाद कार्रवाई शुरू हुई. आजम खान ने इस कार्रवाई को राजनीतिक कार्रवाई बताया. 2019 में 26 किसानों ने मुकदमे दर्ज कराए, प्रशासन ने आजम खान को भूमाफिया के रूप में दर्ज किया. फिलहाल आजम खान अपने बेटे अबदुल्ला आजम खान के साथ पिछले 11 महीनों से सीतापुर जेल में बंद हैं.